{"_id":"5903a9d74f1c1bc12cc0c229","slug":"20-of-domestic-disputes-rise-in-muslim-families","type":"story","status":"publish","title_hn":"मुस्लिम परिवारों में घरेलू विवाद के 20 फीसदी मामले बढ़े ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मुस्लिम परिवारों में घरेलू विवाद के 20 फीसदी मामले बढ़े
अमर उजाला ब्यूूराे
Updated Sat, 29 Apr 2017 02:15 AM IST
विज्ञापन
demo pic
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
तीन तलाक का मामला सुर्खियों में आने के बाद पुलिस परिवार परामर्श केंद्र में पहली जनवरी से 28 अप्रैल 2017 तक 350 पारिवारिक विवाद के मामले आए हैं, जिसमें लगभग 180 मामले मुस्लिम परिवारों से जुड़े हैं। पिछले साल की तुलना में मुस्लिम परिवारों के घरेलू विवाद मामलों में 20 फीसदी तक इजाफा हुआ है। इनमें से कुछ मामले तीन तलाक से भी जुडेे़ हैं।
लेकिन प्रबुद्धजनों की मानें तो तीन तलाक के मामलों में वृद्धि नहीं हुई है। शहर मुफ्ती मोहम्मद खालिद हमीद कहते हैं कि तलाक के मामलों में कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुई है, ये आंकड़ा पहले जैसा ही है। वहीं शरीयत अदालत के काजी मुफ्ती आमिर समदानी भी शहर मुफ्ती की बात से इत्तेफाक रखते हैं। कहा, उनकी अदालत में तलाक के मसले कभी-कभी आते हैं।
वर्ष 2016 में पुलिस परिवार परामर्श केंद्र के रिकॉर्ड के मुताबिक, पारिवारिक विवाद के 700 मामले आए थे। इनमें 60 फीसदी मामले मुस्लिम परिवार से थे।
आधी रात दिया तलाक
महानगर के हमदर्द नगर में 20 साल पहले एक महिला को उसके शौहर ने आधी रात को तलाक देकर घर से बाहर भगा दिया। उसके पांच बच्चों को भी उससे छीन लिया। रात भर वह घर के दरवाजे पर पड़ी रही और रात में ही उसकी मानसिक स्थिति बिगड़ गई। वक्त के साथ उसका जिस्म भी सड़ चुका है। महिला पागल हो चुकी है। तलाकशुदा महिला अपने मां के साथ रह रही है, लेकिन वह मौत के करीब पहुंच चुकी है।
विज्ञापन
एसएसपी दफ्तर में कहा, तलाक
पारिवारिक विवाद का मामला कुछ दिनों पहले एसएसपी दफ्तर पहुंच गया। शौहर ने अपनी बीवी को मौके पर तलाक तलाक तलाक कह दिया। सासनीगेट निवासी महिला का आरोप था कि उसका शौहर दूसरी शादी करना चाहता है। इसलिए बोला कि अगर तुम पुलिस के पास गई तो तेजाब डाल दूंगा। शौहर के व्यवहार से बीवी क्षुब्ध है। इसलिए उसने ससुराल पक्ष के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
जनवरी 2015 से दिसंबर 2016 तक मीडिएशन सेंटर में 1500 मामले आए थे, जिसमें 457 मामलों का निस्तारण हो गया। इनमें मुस्लिम परिवार से 95, पांच ईसाई और बाकी हिंदू परिवार के मामले थे। कहा, ये बात सच है कि तलाक को कोर्ट नहीं मानती है। इसलिए मामले फैमिली कोर्ट पहुंचते हैं। महिलाएं गुजारा भत्ता, घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न का मुकदमा करती हैं। मुस्लिमों का तलाक का मामला मुंसिफ कोर्ट कोल में पहुंचता है।
- राकेश पंडित, पूर्व मीडिएटर दीवानी कोर्ट
विज्ञापन
लेकिन प्रबुद्धजनों की मानें तो तीन तलाक के मामलों में वृद्धि नहीं हुई है। शहर मुफ्ती मोहम्मद खालिद हमीद कहते हैं कि तलाक के मामलों में कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुई है, ये आंकड़ा पहले जैसा ही है। वहीं शरीयत अदालत के काजी मुफ्ती आमिर समदानी भी शहर मुफ्ती की बात से इत्तेफाक रखते हैं। कहा, उनकी अदालत में तलाक के मसले कभी-कभी आते हैं।
विज्ञापन
वर्ष 2016 में पुलिस परिवार परामर्श केंद्र के रिकॉर्ड के मुताबिक, पारिवारिक विवाद के 700 मामले आए थे। इनमें 60 फीसदी मामले मुस्लिम परिवार से थे।
आधी रात दिया तलाक
महानगर के हमदर्द नगर में 20 साल पहले एक महिला को उसके शौहर ने आधी रात को तलाक देकर घर से बाहर भगा दिया। उसके पांच बच्चों को भी उससे छीन लिया। रात भर वह घर के दरवाजे पर पड़ी रही और रात में ही उसकी मानसिक स्थिति बिगड़ गई। वक्त के साथ उसका जिस्म भी सड़ चुका है। महिला पागल हो चुकी है। तलाकशुदा महिला अपने मां के साथ रह रही है, लेकिन वह मौत के करीब पहुंच चुकी है।
विज्ञापन
एसएसपी दफ्तर में कहा, तलाक
पारिवारिक विवाद का मामला कुछ दिनों पहले एसएसपी दफ्तर पहुंच गया। शौहर ने अपनी बीवी को मौके पर तलाक तलाक तलाक कह दिया। सासनीगेट निवासी महिला का आरोप था कि उसका शौहर दूसरी शादी करना चाहता है। इसलिए बोला कि अगर तुम पुलिस के पास गई तो तेजाब डाल दूंगा। शौहर के व्यवहार से बीवी क्षुब्ध है। इसलिए उसने ससुराल पक्ष के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
जनवरी 2015 से दिसंबर 2016 तक मीडिएशन सेंटर में 1500 मामले आए थे, जिसमें 457 मामलों का निस्तारण हो गया। इनमें मुस्लिम परिवार से 95, पांच ईसाई और बाकी हिंदू परिवार के मामले थे। कहा, ये बात सच है कि तलाक को कोर्ट नहीं मानती है। इसलिए मामले फैमिली कोर्ट पहुंचते हैं। महिलाएं गुजारा भत्ता, घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न का मुकदमा करती हैं। मुस्लिमों का तलाक का मामला मुंसिफ कोर्ट कोल में पहुंचता है।
- राकेश पंडित, पूर्व मीडिएटर दीवानी कोर्ट