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हुजूर धावकों से मेडल हो रहे दूर
Updated Sun, 01 Oct 2017 05:30 PM IST
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हुजूर... धावकों से मेडल हो रहे दूर
ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
महारानी अहिल्याबाई होल्कर स्पोर्ट्स स्टेडियम में धावकों के लिए बने ट्रैक पर धावक नहीं, बल्कि शौकिया लोग दौड़ रहे हैं। इससे धावकों की सही तरीके से प्रैक्टिस नहीं हो पा रही है।
दरअसल, धावकों के लिए दौड़ना काफी नहीं है, उन्हें बेहतर टाइमिंग भी निकालना जरूरी है। टाइमिंग के लिए बाधा रहित ट्रैक होना चाहिए। ट्रैक की यही हालत रही तो धावकों से मेडल दूरी बनाते चले जाएंगे।
कोच न होने को लेकर धावक पहले से ही परेशान हैं। अब उनके सामने शौकिया लोग नई मुसीबत बन गए हैं। सुबह ही स्टेडियम में यह लोग पहुंच जाते हैं और पार्क मानकर इधर-उधर दौड़ने और घूमने लगते हैं।
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ट्रैक पर कब्जा होने से खिलाड़ी थोड़ी-बहुत प्रैक्टिस करके चले जाते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब खिलाड़ी बेस्ट टाइम नहीं निकालेंगे तो मेडल कहां ला पाएंगे। एथलेटिक्स विशेषज्ञ व उप क्रीड़ा अधिकारी डॉ. मंजूर आलम अंसारी का तबादला होने से एथलेटिक्स कोच की कमी आ गई है। हालांकि, कोच की तैनाती के लिए खेल निदेशालय को पत्र भेजा जा चुका है।
कोच के बिना भी धावक मेडल जीत रहे हैं। मगर, जब उन्हें ट्रैक पर प्रैक्टिस करने का वक्त नहीं मिलेगा तो मेडल की उम्मीदें क्षीण हो जाएंगी। खैर, शौकिया खिलाड़ी को ट्रैक से दूर करना होगा।
- शमशाद निसार आजमी, सचिव, जिला एथलेटिक्स संघ
कोच के लिए खेल निदेशालय को अवगत करा दिया गया है। इसके लिए गुजारिश भी की जा रही है। रही बात ट्रैक पर शौकिया लोगों के घूमने और दौड़ने की तो इस पर नजर रखी जाएगी।
- अश्वनी कुमार त्यागी, उप क्रीड़ाधिकारी
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ब्यूरो, अमर उजाला, अलीगढ़।
महारानी अहिल्याबाई होल्कर स्पोर्ट्स स्टेडियम में धावकों के लिए बने ट्रैक पर धावक नहीं, बल्कि शौकिया लोग दौड़ रहे हैं। इससे धावकों की सही तरीके से प्रैक्टिस नहीं हो पा रही है।
दरअसल, धावकों के लिए दौड़ना काफी नहीं है, उन्हें बेहतर टाइमिंग भी निकालना जरूरी है। टाइमिंग के लिए बाधा रहित ट्रैक होना चाहिए। ट्रैक की यही हालत रही तो धावकों से मेडल दूरी बनाते चले जाएंगे।
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कोच न होने को लेकर धावक पहले से ही परेशान हैं। अब उनके सामने शौकिया लोग नई मुसीबत बन गए हैं। सुबह ही स्टेडियम में यह लोग पहुंच जाते हैं और पार्क मानकर इधर-उधर दौड़ने और घूमने लगते हैं।
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ट्रैक पर कब्जा होने से खिलाड़ी थोड़ी-बहुत प्रैक्टिस करके चले जाते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब खिलाड़ी बेस्ट टाइम नहीं निकालेंगे तो मेडल कहां ला पाएंगे। एथलेटिक्स विशेषज्ञ व उप क्रीड़ा अधिकारी डॉ. मंजूर आलम अंसारी का तबादला होने से एथलेटिक्स कोच की कमी आ गई है। हालांकि, कोच की तैनाती के लिए खेल निदेशालय को पत्र भेजा जा चुका है।
कोच के बिना भी धावक मेडल जीत रहे हैं। मगर, जब उन्हें ट्रैक पर प्रैक्टिस करने का वक्त नहीं मिलेगा तो मेडल की उम्मीदें क्षीण हो जाएंगी। खैर, शौकिया खिलाड़ी को ट्रैक से दूर करना होगा।
- शमशाद निसार आजमी, सचिव, जिला एथलेटिक्स संघ
कोच के लिए खेल निदेशालय को अवगत करा दिया गया है। इसके लिए गुजारिश भी की जा रही है। रही बात ट्रैक पर शौकिया लोगों के घूमने और दौड़ने की तो इस पर नजर रखी जाएगी।
- अश्वनी कुमार त्यागी, उप क्रीड़ाधिकारी