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आलाकमान का आदेश होगा तो चुनाव लडूंगा-चीफ
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
प्रभारी जिला पूर्ति अधिकारी से कहासुनी और विवाद के बाद चर्चा में आए भाजपा नेता राजेंद्र वार्ष्णेय चीफ ने कहा है कि उन्होंने अपना जीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सेवा में समर्पित किया है। अब यदि संघ और भाजपा आलाकमान चाहेगा तो वह इस बार सांसद पद का चुनाव लड़ेंगे।
चीफ ने कहा कि उन्होंने छात्र जीवन से ही संघ की सेवा की है। राजस्थान के राज्यपाल एवं पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के साथ सक्रिय रहे हैं। पार्टी के उत्थान के लिए एनएसए जैसी कार्रवाई तक हुई है। लेकिन हौसला कभी नहीं डिगा। किसी भी सत्ता के सामने सिर झुकाया और न ही नौकरशाही ही कभी हावी हो सकी। 30 मार्च 1983 की एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि जनसमस्या को लेकर तत्कालीन कलक्टर पीएल पूनिया तक से भिड़ गए थे। उस समय उन पर 307 की धारा में मुकदमा दर्ज हुआ।
प्रभारी जिला पूर्ति अधिकारी से हुए विवाद पर उन्होंने कहा कि प्रभारी जिला पूर्ति अधिकारी क्षेत्रीय कार्यालय के बाहर मौजूद दलालों का पक्ष ले रही थीं और बेवजह अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर रही थीं। इस मामले में प्रशासन की भूमिका से भी वह खिन्न नजर आए। उन्होंने कहा कि सीनियर लीडर होने के बावजूद प्रशासन ने उनसे अच्छा बर्ताव नहीं किया। रिहाई भी उच्चस्तरीय दबाव का नतीजा रही। भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग जारी रहेगी।
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प्रभारी जिला पूर्ति अधिकारी से कहासुनी और विवाद के बाद चर्चा में आए भाजपा नेता राजेंद्र वार्ष्णेय चीफ ने कहा है कि उन्होंने अपना जीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सेवा में समर्पित किया है। अब यदि संघ और भाजपा आलाकमान चाहेगा तो वह इस बार सांसद पद का चुनाव लड़ेंगे।
चीफ ने कहा कि उन्होंने छात्र जीवन से ही संघ की सेवा की है। राजस्थान के राज्यपाल एवं पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के साथ सक्रिय रहे हैं। पार्टी के उत्थान के लिए एनएसए जैसी कार्रवाई तक हुई है। लेकिन हौसला कभी नहीं डिगा। किसी भी सत्ता के सामने सिर झुकाया और न ही नौकरशाही ही कभी हावी हो सकी। 30 मार्च 1983 की एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि जनसमस्या को लेकर तत्कालीन कलक्टर पीएल पूनिया तक से भिड़ गए थे। उस समय उन पर 307 की धारा में मुकदमा दर्ज हुआ।
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प्रभारी जिला पूर्ति अधिकारी से हुए विवाद पर उन्होंने कहा कि प्रभारी जिला पूर्ति अधिकारी क्षेत्रीय कार्यालय के बाहर मौजूद दलालों का पक्ष ले रही थीं और बेवजह अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर रही थीं। इस मामले में प्रशासन की भूमिका से भी वह खिन्न नजर आए। उन्होंने कहा कि सीनियर लीडर होने के बावजूद प्रशासन ने उनसे अच्छा बर्ताव नहीं किया। रिहाई भी उच्चस्तरीय दबाव का नतीजा रही। भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग जारी रहेगी।
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