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Aligarh News: अपनी सीमा से बाहर निकल संस्कृत के बीज बोएगा एएमयू
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संस्कृत अध्ययन केंद्र। - अमर उजाला
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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी ने अपनी सीमा से बाहर निकल कर पश्चिमी यूपी के पहले संस्कृत अध्ययन केंद्र की स्थापना कर दी है। इसका भवन हिंदी विभाग की दूसरी मंजिल पर बनकर तैयार हो गया है। इस केंद्र में संस्कृत लिखना और बोलना नहीं जानने वाले लोगों को भी सरल तरीके से इसका ज्ञान दिया जाएगा। इसके लिए शैक्षिक योग्यता कम से कम 10वीं पास रखी गई है।
वर्ष 1920 में स्थापित संस्कृत विभाग के साथ ही हिंदी विभाग संचालित हो रहा था। वर्तमान में भूतल पर हिंदी विभाग और पहली मंजिल पर संस्कृत विभाग है। अब दूसरी मंजिल पर संस्कृत अध्ययन केंद्र की शुरुआत की गई है। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने एएमयू के संस्कृत विभाग को संस्कृत अध्ययन केंद्र संचालित करने की जिम्मेदारी सौंपी है।
इस अध्ययन केंद्र में 15 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी व्यक्ति प्रवेश ले सकेगा। प्रवेश के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिसकी अंतिम तिथि 30 सितंबर है। एक वर्ष की पढ़ाई करने के बाद विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा। इसके लिए 1500 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है, जिसमें 300 रुपये परीक्षा शुल्क, जबकि 600 रुपये में पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराई जाएंगी। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने केंद्र में अनुपम माइति को बतौर शिक्षक तैनात किया है। गौर हो कि विवि के संस्थापक सर सैयद अहमद खां कहा था कि हिंदी और उर्दू भारत रूपी दुल्हन की दो खूबसूरत आंखे हैं। विवि प्रशासन ने उनके इस ध्येय वाक्य को एक बार फिर से पुख्ता कर दिया है।
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संस्कृत सीखने का मिलेगा मंच
संस्कृत विभाग की अध्यक्ष प्राे. सारिका वार्ष्णेय ने बताया कि यहां ऐसे लोग भी संस्कृत सीख सकेंगे, जिन्हें संस्कृत लिखना या बोलना नहीं आता। उन्हें भाषा के मूल ज्ञान से लेकर बोलने और लिखने तक का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस केंद्र की शुरुआत से एएमयू में संस्कृत के अध्ययन को नई दिशा मिलेगी।
इसकी दी जाएगी जानकारी
संस्कृत में बोलना, पढ़ना, लिखना, भारतीय ज्ञान, संस्कृत में विज्ञान, आयुर्वेद, संस्कृत साहित्य।
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वर्ष 1920 में स्थापित संस्कृत विभाग के साथ ही हिंदी विभाग संचालित हो रहा था। वर्तमान में भूतल पर हिंदी विभाग और पहली मंजिल पर संस्कृत विभाग है। अब दूसरी मंजिल पर संस्कृत अध्ययन केंद्र की शुरुआत की गई है। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने एएमयू के संस्कृत विभाग को संस्कृत अध्ययन केंद्र संचालित करने की जिम्मेदारी सौंपी है।
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इस अध्ययन केंद्र में 15 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी व्यक्ति प्रवेश ले सकेगा। प्रवेश के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिसकी अंतिम तिथि 30 सितंबर है। एक वर्ष की पढ़ाई करने के बाद विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा। इसके लिए 1500 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है, जिसमें 300 रुपये परीक्षा शुल्क, जबकि 600 रुपये में पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराई जाएंगी। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने केंद्र में अनुपम माइति को बतौर शिक्षक तैनात किया है। गौर हो कि विवि के संस्थापक सर सैयद अहमद खां कहा था कि हिंदी और उर्दू भारत रूपी दुल्हन की दो खूबसूरत आंखे हैं। विवि प्रशासन ने उनके इस ध्येय वाक्य को एक बार फिर से पुख्ता कर दिया है।
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संस्कृत सीखने का मिलेगा मंच
संस्कृत विभाग की अध्यक्ष प्राे. सारिका वार्ष्णेय ने बताया कि यहां ऐसे लोग भी संस्कृत सीख सकेंगे, जिन्हें संस्कृत लिखना या बोलना नहीं आता। उन्हें भाषा के मूल ज्ञान से लेकर बोलने और लिखने तक का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस केंद्र की शुरुआत से एएमयू में संस्कृत के अध्ययन को नई दिशा मिलेगी।
इसकी दी जाएगी जानकारी
संस्कृत में बोलना, पढ़ना, लिखना, भारतीय ज्ञान, संस्कृत में विज्ञान, आयुर्वेद, संस्कृत साहित्य।