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Heat In UP: गर्मी से चिड़चिड़ेपन का शिकार हो रहे युवा, एसएन मेडिकल में रोजाना आ रहे 100 से 150 मरीज
Fri, 25 Apr 2025 09:24 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Fri, 25 Apr 2025 09:24 AM IST
सार
भीषण गर्मी से युवा चिड़चिड़ेपन का शिकार हो रहे हैं। आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में रोजाना 100 से 150 मरीज आ रहे हैं।
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भीषण गर्मी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
गर्मी बढ़ने के साथ एसएन मेडिकल कॉलेज में दिमागी बीमारी से पीड़ित मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। गर्मी लोगों के मस्तिष्क को भी नुकसान पहुंचा रही है। लोग चिड़चिड़े हो रहे हैं। सिर दर्द और अवसाद के शिकार हो रहे हैं। इसमें अधिकतर पीड़ित 20 से 40 की उम्र के युवा हैं।
एसएन मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. आशुतोष कुमार गुप्ता ने बताया कि गर्मी की वजह से बायोपुलर मूड डिसऑर्डर के मरीज बढ़ रहे हैं। इस बीमारी में लोगों को अवसाद या सिर दर्द की समस्या हो रही है। ऐसे मरीज ज्यादा बोलने लगते हैं, अचानक गुस्सा हो जाते हैं या फिर अचानक से चुप हो जाते हैं। ऐसा गर्मी में ज्यादा समय तक रहने के कारण होता है। मनोरोग की ओपीडी में रोजाना 100 से 150 से मरीज आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि जो मरीज दिमागी बीमारी की दवा ले रहे हैं वह पर्याप्त पानी पीते रहें। उल्टी होने पर तत्काल ओआरएस घोल का सेवन करें। धूप से बचने के लिए कपड़े या चश्मे का प्रयोग करें। दिक्कत ज्यादा होने पर चिकित्सक से मिलें।
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एसएन मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. आशुतोष कुमार गुप्ता ने बताया कि गर्मी की वजह से बायोपुलर मूड डिसऑर्डर के मरीज बढ़ रहे हैं। इस बीमारी में लोगों को अवसाद या सिर दर्द की समस्या हो रही है। ऐसे मरीज ज्यादा बोलने लगते हैं, अचानक गुस्सा हो जाते हैं या फिर अचानक से चुप हो जाते हैं। ऐसा गर्मी में ज्यादा समय तक रहने के कारण होता है। मनोरोग की ओपीडी में रोजाना 100 से 150 से मरीज आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि जो मरीज दिमागी बीमारी की दवा ले रहे हैं वह पर्याप्त पानी पीते रहें। उल्टी होने पर तत्काल ओआरएस घोल का सेवन करें। धूप से बचने के लिए कपड़े या चश्मे का प्रयोग करें। दिक्कत ज्यादा होने पर चिकित्सक से मिलें।
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जिला महिला अस्पताल में लिफ्ट बंद
लेडी लॉयल में रोजाना सैकड़ों गर्भवती महिलाएं उपचार के लिए आती हैं। गर्भवती महिलाओं को सीढ़ियों से ही पहले व दूसरे तल पर जाना पड़ रहा है। 100 सैया अस्पताल की इमारत में दोनों ओर लिफ्ट लगी हैं, लेकिन एक लिफ्ट बंद हैं। गर्भवती महिलाएं जान जोखिम में डालकर सीढ़ियों पर चढ़ने को मजबूर हैं। अस्पताल प्रशासन का इससे कोई सरोकार नहीं है।
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कबाड़ हो रहा वाटर कूलर
लेडी लॉयल में सैकड़ों महिलाओं के बीच दो ही वाटर कूलर लगे हैं। जहां हमेशा भीड़ लगी रहती है। वहीं दूसरा बड़ा वॉटर कूलर लिनेक ब्लॉक के पास लगा है। जिसके ऊपर बंदर धमा चौकड़ी कर रहे हैं। जबकि यह वाटर कूलर बिल्कुल सही है। अगर इसे सौ सैया अस्पताल की इमारत में लगा दिया जाए तो मरीजों को पानी के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ेगा।
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लेडी लॉयल में सैकड़ों महिलाओं के बीच दो ही वाटर कूलर लगे हैं। जहां हमेशा भीड़ लगी रहती है। वहीं दूसरा बड़ा वॉटर कूलर लिनेक ब्लॉक के पास लगा है। जिसके ऊपर बंदर धमा चौकड़ी कर रहे हैं। जबकि यह वाटर कूलर बिल्कुल सही है। अगर इसे सौ सैया अस्पताल की इमारत में लगा दिया जाए तो मरीजों को पानी के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ेगा।
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शिफ्ट करवा रहे हैं आरओ
जिला महिला अस्पताल की अधीक्षक रचना गुप्ता ने बताया कि इमारत में दो लिफ्ट लगी हुई हैं। मरीज ज्यादा होने की वजह से कर्मचारी एक लिफ्ट को चालू नहीं कर पाए होंगे। मरीजों और तीमारदारों के लिए अस्पताल में दो आरओ लगे हैं। ठेकेदार को बोलकर पुरानी इमारत के पास लगे आरओ को शिफ्ट करवाया जा रहा है।
जिला महिला अस्पताल की अधीक्षक रचना गुप्ता ने बताया कि इमारत में दो लिफ्ट लगी हुई हैं। मरीज ज्यादा होने की वजह से कर्मचारी एक लिफ्ट को चालू नहीं कर पाए होंगे। मरीजों और तीमारदारों के लिए अस्पताल में दो आरओ लगे हैं। ठेकेदार को बोलकर पुरानी इमारत के पास लगे आरओ को शिफ्ट करवाया जा रहा है।