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UP: यमुना का डूब क्षेत्र हुआ तय...30 जुलाई तक का दिया गया समय, इन 17 जिलों में लगानी होंगी मुड्डियां
Sat, 10 May 2025 09:47 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Sat, 10 May 2025 09:47 AM IST
सार
यमुना डूब क्षेत्र की निशानी के लिए 30 जुलाई तक मुड्डियां लगानी होंगी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने प्रदेश सरकार और सिंचाई विभाग को आदेश दिया है।
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यमुना
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
असगरपुर से प्रयागराज तक 1,056 किमी लंबाई वाली यमुना नदी के दोनों किनारों पर डूब क्षेत्र कागजों में नहीं बल्कि जमीन पर मुड्डियां गाड़कर तय करना होगा। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने प्रदेश सरकार को 30 जुलाई तक का समय यमुना नदी के डूब क्षेत्र में हर 200 मीटर पर मुड्डियां गाड़ने के लिए दिया है। एनजीटी ने कहा कि जिओ कॉर्डिनेट की जगह जमीन पर डूब क्षेत्र के निशान लगाएं ताकि आम लोगों को डूब क्षेत्र समझ में आ सके।
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आगरा के पर्यावरणविद डॉ. शरद गुप्ता की याचिका पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने यमुना नदी में बीते 100 सालों में आई बाढ़ को आधार मानकर डूब क्षेत्र तय किया था। इसमें असगरपुर से इटावा और शाहपुर से प्रयागराज तक 1,056 किमी की लंबाई के लिए हर 200 मीटर पर डूब क्षेत्र तय किया गया। केंद्रीय जल आयोग के रिकॉर्ड के आधार पर तैयार की गई रिपोर्ट में यमुना नदी के डूब क्षेत्र का चिह्नांकन हर 200 मीटर में जिओ कॉर्डिनेट के जरिए बताया गया, लेकिन यह आम लोगों की समझ में नहीं आया।
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डॉ. शरद गुप्ता की याचिका पर अधिवक्ता अंशुल गुप्ता और आदित्य तेंगुरिया ने पैरवी की, जिसमें एनजीटी ने कहा कि हर 200 मीटर पर जहां जिओ कॉर्डिनेट है, वहां मुड्डियां लगाकर लोगों के लिए निशान बना दें ताकि डूब क्षेत्र की जानकारी हो सके। आगरा में 167 किमी लंबाई में बह रही यमुना नदी के दाएं किनारे पर अधिकतम 5.09 किमी तक और बाएं किनारे पर 2.55 किमी तक का डूब क्षेत्र तय किया गया है।
अधिकारी गड़बड़ी कर रहे थे
याचिकाकर्ता डॉ. शरद गुप्ता ने बताया कि एनजीटी ने 30 जुलाई तक का वक्त डूब क्षेत्र के निशान लगाने के लिए दिया है। जिओ कॉर्डिनेट के जरिए सिंचाई विभाग और अधिकारी गडबड़ी कर रहे थे। लोगों को स्पष्ट ही नहीं था कि डूब क्षेत्र कहां तक है। हर 200 मीटर में मुड्डियों से डूब क्षेत्र नजर आ सकेगा, इससे जो भवन बनेंगे, वह स्पष्ट नजर आ सकेंगे।
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याचिकाकर्ता डॉ. शरद गुप्ता ने बताया कि एनजीटी ने 30 जुलाई तक का वक्त डूब क्षेत्र के निशान लगाने के लिए दिया है। जिओ कॉर्डिनेट के जरिए सिंचाई विभाग और अधिकारी गडबड़ी कर रहे थे। लोगों को स्पष्ट ही नहीं था कि डूब क्षेत्र कहां तक है। हर 200 मीटर में मुड्डियों से डूब क्षेत्र नजर आ सकेगा, इससे जो भवन बनेंगे, वह स्पष्ट नजर आ सकेंगे।
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इन जिलों में तय किए गए डूब क्षेत्र
हैदराबाद की रिमोट सेंसिंग एजेंसी ने सेटेलाइट से सर्वे कर 17 शहरों के लिए यमुना नदी का डूब क्षेत्र तय किया। 521 पन्ने की रिपोर्ट एनजीटी में पेश की गई। इनमें जिओ कॉर्डिनेट हैं। आगरा में सिंचाई विभाग को 1670 मुड्डियां यमुना नदी के किनारे लगानी होंगी। इससे लोगों में डूब क्षेत्र को लेकर स्पष्टता रहेगी कि कॉलोनी या भवन, डूब क्षेत्र में है या नहीं। पूर्व में लगाई गई मुड्डियां गायब हो चुकी हैं।
हैदराबाद की रिमोट सेंसिंग एजेंसी ने सेटेलाइट से सर्वे कर 17 शहरों के लिए यमुना नदी का डूब क्षेत्र तय किया। 521 पन्ने की रिपोर्ट एनजीटी में पेश की गई। इनमें जिओ कॉर्डिनेट हैं। आगरा में सिंचाई विभाग को 1670 मुड्डियां यमुना नदी के किनारे लगानी होंगी। इससे लोगों में डूब क्षेत्र को लेकर स्पष्टता रहेगी कि कॉलोनी या भवन, डूब क्षेत्र में है या नहीं। पूर्व में लगाई गई मुड्डियां गायब हो चुकी हैं।
17 शहरों में जमीन पर लगेंगे निशान
- गौतम बुद्ध नगर
- अलीगढ़
- मथुरा
- हाथरस
- आगरा
- फिरोजाबाद
- इटावा
- जालौन
- औरैया
- कानपुर देहात
- हमीरपुर
- कानपुर
- फ़तेहपुर
- बांदा
- चित्रकूट
- कौशाम्बी
- प्रयागराज
- गौतम बुद्ध नगर
- अलीगढ़
- मथुरा
- हाथरस
- आगरा
- फिरोजाबाद
- इटावा
- जालौन
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- कानपुर देहात
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