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आगरा: किशोर न्याय बोर्ड से पकड़ी गई तीन फीट लंबी गोह, असोपा अस्पताल के पीछे नाले से अजगर

Mon, 19 Jul 2021 07:51 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Mon, 19 Jul 2021 07:51 PM IST
सार

मानसून की बारिश के दस्तक देते ही सांप और अन्य जंगली जानवर सूखे स्थानों की तलाश में जंगल से बाहर आने लगे हैं। वाइल्डलाइफ एसओएस की टीम ने रविवार और सोमवार को गोह व दो अजगर को पकड़कर दोबारा जंगल में छोड़ा। 

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Wildlife SOS team rescued monitor lizard and python in Agra
वाइल्डलाइफ एसओएस टीम ने गोह और अजगर को पकड़ा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा के सिरोली स्थित किशोर न्याय बोर्ड के बरामदे में तीन फीट लंबी मॉनिटर लिज़र्ड (गोह) देख वहां अफरा-तफरी मच गई। वाइल्डलाइफ एसओएस टीम द्वारा गोह को सुरक्षित रूप से रेस्क्यू किया गया और बाद में वापस जंगल में छोड़ दिया गया।

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आगरा में मानसून बारिश के दस्तक देते ही सांप और अन्य जंगली जानवर सूखे स्थानों की तलाश में जंगल से बाहर आने लगे हैं। ऐसे में सोमवार की सुबह आगरा के सिरोली में तीन फीट लंबी मॉनिटर लिज़र्ड किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) में घुस गई। गोह को बरामदे में देखा गया था।
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जेजेबी के अधिकारियों ने वाइल्डलाइफ एसओएस की सूचना दी। वाइल्डलाइफ एसओएस रैपिड रिस्पांस यूनिट की दो सदस्यीय टीम तुरंत स्थान पर पहुंची और गोह को सावधानी से रेस्क्यू किया। गोह को कुछ घंटे निगरानी में रखने के बाद वापस जंगल में छोड़ दिया गया।

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गोह के अंगों के आयात या निर्यात पर है प्रतिबंध
बंगाल मॉनिटर या कॉमन इंडियन मॉनिटर भारत में पाए जाने वाले चार मॉनिटर लिज़र्ड की प्रजातियों में से एक है, और यह सभी भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची 1 के तहत संरक्षित हैं एवं इनके शरीर के अंगों के आयात या निर्यात पर पूर्णतः प्रतिबंध लगा हुआ है।

इससे पहले टीम ने देर रात एक अजगर की रेस्क्यू कॉल का भी जवाब दिया। असोपा अस्पताल के पीछे निर्भय नगर में नाले में सात फीट लंबा अजगर देखा गया था। टीम ने अजगर को नाले से सुरक्षित रूप से बाहर निकाला और कपड़े के बैग में डाल दिया।

टीम ने आगरा कैंट स्थित डिफेंस कॉलोनी में एक घर के ड्रेनेज पाइप में फंसी मॉनिटर लिज़र्ड को भी बचाया और आगरा के खंदारी में केंद्रीय हिंदी संस्थान परिसर के अंदर स्टाफ क्वार्टर से पांच फीट लंबा अजगर भी पकड़ा।

विषैली नहीं होती गोह
वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने कहा कि लोगों का वन्यजीवों के प्रति अधिक संवेदनशील दृष्टिकोण देख कर हमें ख़ुशी है। हमारी रेस्क्यू टीम सार्वजनिक सुरक्षा और वन्यजीवों की सुरक्षा के हित में किसी भी स्थिति से निपटने के लिए प्रशिक्षित है। मॉनिटर लिज़र्ड विषैली नहीं होती, लेकिन उकसाने पर वह अपने मजबूत पंजों की मदद से घायल भी कर सकती है, इसलिए जानवर और लोग दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बहुत महत्वपूर्ण है। 

वाइल्डलाइफ एसओएस के डायरेक्टर कंज़रवेशन प्रोजेक्ट्स बैजूराज एम.वी ने कहा कि सांपों और गोह का इमारतों और आवासों में आ जाना बारिश के दौरान एक सामान्य घटना है। वे अक्सर जमीन के नीचे गड्डा खोद कर अपना घर बनाते हैं और अपना अधिकांश समय वहीं बिताते हैं, लेकिन बारिश के दौरान इनमे पानी भर जाने के कारण उनके घर नष्ट हो जाते हैं, जिसकी वजह से उन्हें सूखी जमीन पर आश्रय लेने के लिए मजबूर होना पड़ता है। 

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