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हाथियों के रास्ते में जब आया इंसान, तब बदला व्यवहार
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आगरा। भारतीय वन्यजीव संस्थान की ओर से होटल रेडीसन में आयोजित कार्यशाला में हाथियों के प्रबंधन और व्यवहार में बदलाव पर चर्चा की गई। पद्मश्री से सम्मानित देश के पहले पशु चिकित्सक और हाथी डॉक्टर के नाम से चर्चित डॉ. केके शर्मा ने कहा कि इंसान और हाथियों के बीच में टकराव बढ़ गया है। साल में दो बार हाथी जगह बदलते हैं। उन रास्तों पर इंसान ने घर बना लिए, जिसने हाथियों के व्यवहार को बदला है। हाथियों के लिए संवेदनशील बनना होगा, तब ये टकराव थमेगा।
तीन दिवसीय कार्यशाला में देश भर के 24 पशु चिकित्सक हिस्सा ले रहे हैं। वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट आफ इंडिया, प्रोजेक्ट एलीफेंट डिवीजन और वाइल्फ लाइफ एसओएस द्वारा हाथियों के प्रबंधन, रखरखाव और स्वास्थ्य पहलुओं पर आयोजित कार्यशाला का उद्घाटन प्रधान मुख्य वन संरक्षक ममता संजीव दुबे और भारत सरकार के आईजी फॉरेस्ट और प्रोजेक्ट एलीफेंट के डायरेक्टर रमेश पांडे ने किया। वाइल्ड लाइफ एसओएस के संस्थापक कार्तिक सत्यनारायन ने बताया कि 14 फरवरी तक चलने वाली कार्यशाला का मकसद हाथी रिजर्व और उसके पास काम करने वाले 24 पशु चिकित्सा अधिकारियों को हाथियों के व्यवहार, इलाज, बीमारियों और उनके परिवहन से जुड़े मुद्दों पर संवेदनशील बनाना है। इस दौरान प्रोजेक्ट एलीफेंट के साइंटिस्ट डी डॉ. के मुथामिज सेलवन, डॉ. पराग निगम, डॉ. धनंजय मोहन, सीपी गोयल और बैजूराज एमवी आदि मौजूद रहे।
डॉ. केके शर्मा के मुताबिक इंसान की गतिविधियों का बुरा असर हाथियों पर पड़ा। इंसानी गतिविधियों के हाथी अब आदी हो गए। पहले पटाखों के शोर से डरकर हाथी भाग जाते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं करते। एशिया में मौजूद हाथियों का 60 फीसदी हिस्सा भारत में हैं। 10 हजार हाथियों का अब तक इलाज कर चुके डा. शर्मा के मुताबिक जंगल में निर्माण गतिविधियों को रोकने के साथ हाथियों के प्रति संवेदनशील होना होगा।
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बैजूराज एमवी ने बताया कि मथुरा-आगरा सीमा पर बने गांव चुरमुरा में वाइल्ड लाइफ एसओएस हाथी संरक्षण केंद्र और हाथी अस्पताल संचालित कर रहा है। सभी चिकित्सक कार्यशाला के दूसरे दिन रविवार को इस अस्पताल को देखने जाएंगे।
हाथी इंसानों से करीब से जुड़े हैं। लोक कथाओं के साथ प्राचीन संस्कृति, युद्ध, दैनिक जीवन का हिस्सा रहे हैं। दोनों एक दूसरे के साथ अपने अपने क्षेत्रों में रहें और टकराव न हो, इसलिए इंसानी व्यवहार में बदलाव की जरूरत है। - ममता संजीव दुबे, आईएफएस, प्रधान मुख्य वन संरक्षक, उप्र
हाथियों की बीमारियों की जांच के लिए नियमित देखभाल और स्वास्थ्य जांच जरूरी है। इस कार्यशाला में मानव हाथी संघर्ष कम करने और उनका सामना करने के साथ अनुभवों को पशु चिकित्सक समझ पाएंगे। - रमेश के पांडे, आईएएफएस, आईजी फॉरेस्ट, प्रोजेक्ट एलीफेंट
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तीन दिवसीय कार्यशाला में देश भर के 24 पशु चिकित्सक हिस्सा ले रहे हैं। वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट आफ इंडिया, प्रोजेक्ट एलीफेंट डिवीजन और वाइल्फ लाइफ एसओएस द्वारा हाथियों के प्रबंधन, रखरखाव और स्वास्थ्य पहलुओं पर आयोजित कार्यशाला का उद्घाटन प्रधान मुख्य वन संरक्षक ममता संजीव दुबे और भारत सरकार के आईजी फॉरेस्ट और प्रोजेक्ट एलीफेंट के डायरेक्टर रमेश पांडे ने किया। वाइल्ड लाइफ एसओएस के संस्थापक कार्तिक सत्यनारायन ने बताया कि 14 फरवरी तक चलने वाली कार्यशाला का मकसद हाथी रिजर्व और उसके पास काम करने वाले 24 पशु चिकित्सा अधिकारियों को हाथियों के व्यवहार, इलाज, बीमारियों और उनके परिवहन से जुड़े मुद्दों पर संवेदनशील बनाना है। इस दौरान प्रोजेक्ट एलीफेंट के साइंटिस्ट डी डॉ. के मुथामिज सेलवन, डॉ. पराग निगम, डॉ. धनंजय मोहन, सीपी गोयल और बैजूराज एमवी आदि मौजूद रहे।
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डॉ. केके शर्मा के मुताबिक इंसान की गतिविधियों का बुरा असर हाथियों पर पड़ा। इंसानी गतिविधियों के हाथी अब आदी हो गए। पहले पटाखों के शोर से डरकर हाथी भाग जाते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं करते। एशिया में मौजूद हाथियों का 60 फीसदी हिस्सा भारत में हैं। 10 हजार हाथियों का अब तक इलाज कर चुके डा. शर्मा के मुताबिक जंगल में निर्माण गतिविधियों को रोकने के साथ हाथियों के प्रति संवेदनशील होना होगा।
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बैजूराज एमवी ने बताया कि मथुरा-आगरा सीमा पर बने गांव चुरमुरा में वाइल्ड लाइफ एसओएस हाथी संरक्षण केंद्र और हाथी अस्पताल संचालित कर रहा है। सभी चिकित्सक कार्यशाला के दूसरे दिन रविवार को इस अस्पताल को देखने जाएंगे।
हाथी इंसानों से करीब से जुड़े हैं। लोक कथाओं के साथ प्राचीन संस्कृति, युद्ध, दैनिक जीवन का हिस्सा रहे हैं। दोनों एक दूसरे के साथ अपने अपने क्षेत्रों में रहें और टकराव न हो, इसलिए इंसानी व्यवहार में बदलाव की जरूरत है। - ममता संजीव दुबे, आईएफएस, प्रधान मुख्य वन संरक्षक, उप्र
हाथियों की बीमारियों की जांच के लिए नियमित देखभाल और स्वास्थ्य जांच जरूरी है। इस कार्यशाला में मानव हाथी संघर्ष कम करने और उनका सामना करने के साथ अनुभवों को पशु चिकित्सक समझ पाएंगे। - रमेश के पांडे, आईएएफएस, आईजी फॉरेस्ट, प्रोजेक्ट एलीफेंट