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Flood: ताजमहल की दीवारों पर 1924 से हैं ये निशान, बयां करतें हर बाढ़ की कहानी
Sat, 15 Jul 2023 02:27 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमित कुलश्रेष्ठ, आगरा
अमित कुलश्रेष्ठ, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Sat, 15 Jul 2023 02:27 PM IST
सार
ताजमहल की उत्तरी दीवार को छूती हुई यमुना नदी में जब-जब बाढ़ आई, तब-तब हर बाढ़ के निशान को ताजमहल की दीवार पर उकेरा गया है। ब्रिटिश काल से इसकी शुरुआत हुई। वर्ष 1924 से लेकर अब तक की हर बाढ़ के निशान दर्ज हैं।
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ताज का उत्तरी दरवाजा, जिसमे लकड़ी के दरवाजे को हटाकर ईंटो से बन्द कर दिया गया
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
ताजमहल ने अपनी दीवारों पर यमुना नदी में आई हर बाढ़ को सहेज कर रखा है। ताजमहल की उत्तरी दीवार को छूती हुई यमुना नदी में जब-जब बाढ़ आई, तब-तब हर बाढ़ के निशान को ताजमहल की दीवार पर उकेरा गया है। ब्रिटिश काल से इसकी शुरुआत हुई। वर्ष 1924 से लेकर अब तक की हर बाढ़ के निशान दर्ज हैं। वर्ष 1978 में आई भयंकर बाढ़ के निशान भी ताजमहल के बसई घाट की ओर की उत्तरी दीवार पर मौजूद हैं।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने ताजमहल की दीवारों पर बाढ़ के निशान उकेरे हैं। वर्ष 1924 में सबसे पहले बाढ़ आई। उसके बाद वर्ष 1978 की बाढ़ ऐतिहासिक रही, जब पानी ताजमहल के तहखानों के 22 कमरों में पहुंच गया था। ताजमहल में लकड़ी के दरवाजे बसई और दशहरा घाट की ओर थे। लकड़ी के दरवाजे हटाकर इन्हें ईंटों से बंद कर दिया गया है।
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भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने ताजमहल की दीवारों पर बाढ़ के निशान उकेरे हैं। वर्ष 1924 में सबसे पहले बाढ़ आई। उसके बाद वर्ष 1978 की बाढ़ ऐतिहासिक रही, जब पानी ताजमहल के तहखानों के 22 कमरों में पहुंच गया था। ताजमहल में लकड़ी के दरवाजे बसई और दशहरा घाट की ओर थे। लकड़ी के दरवाजे हटाकर इन्हें ईंटों से बंद कर दिया गया है।
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चमेली फर्श से बाढ़ देखने आया लोगों का हुजूम
ताजगंज निवासी ताहिरुद्दीन ताहिर बताते हैं कि वर्ष 1978 की बाढ़ में चमेली फर्श पर शहर के लोगों का हुजूम उमड़ने लगा था। यहां से चंद हाथ नीचे ही यमुना बह रही थी, जिसे देखने लोग पहुंचते थे। तत्कालीन एएसआई अधिकारियों ने हादसे की आशंका पर ताजमहल को कई दिनों के लिए बंद कर दिया था। एत्माद्दौला में यमुना किनारे बनी संगमरमर की मछली भी पानी में डूब गई थी।
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