{"_id":"6805bcf2a5f5da25b80eb75f","slug":"supreme-court-serious-on-plea-for-e-challan-based-on-time-of-passage-of-vehicle-through-toll-plaza-2025-04-21","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"UP: ओवरस्पीडिंग पर फास्टैग से चालान की तकनीक...सुप्रीम कोर्ट गंभीर, NHAI को दिया दो महीने का समय","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
UP: ओवरस्पीडिंग पर फास्टैग से चालान की तकनीक...सुप्रीम कोर्ट गंभीर, NHAI को दिया दो महीने का समय
Mon, 21 Apr 2025 09:05 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Mon, 21 Apr 2025 09:05 AM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने ओवरस्पीडिंग पर फास्टैग से चालान की तकनीक का प्रयोग कर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से दो महीने में शपथपत्र मांगा है। एक्सप्रेस-वे पर भी ये व्यवस्था लागू होगी।
विज्ञापन
यमुना एक्सप्रेस वे
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
एक्सप्रेस-वे और हाईवे पर स्पीड कैमरा लगने के बावजूद वाहनों की रफ्तार पर ब्रेक नहीं लग सका है। कैमरे से पहले गति को कम कर वाहन चालक चालान से बच रहे हैं। ऐसा न हो इसके लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। अदालत ने कहा है कि टोल प्लाजा पर वाहन के गुजरने के समय के आधार पर ई-चालान की याचिका पर गंभीर विचार की आवश्यकता है।
अदालत का कहना है कि सबसे पहली शुरूआत भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के साथ की जाए। प्राधिकरण को अगली नियत तिथि पर अपना शपथपत्र दाखिल करना होगा। याचिका युवा उद्यमी हेमंत जैन ने प्रस्तुत की थी, जिसकी सुनवाई न्यायमूर्ति अभय एस ओका एवं न्यायमूर्ति उज्जल भुआन ने बृहस्पतिवार को की थी। विषय को अधिवक्ता केसी जैन ने प्रस्तुत किया।
न्यायमित्र गौरव अग्रवाल ने याचिका का समर्थन करते हुए कहा कि एक टोल प्लाजा से दूसरे टोल प्लाजा के बीच की दूरी को फास्टैग की समय की रीडिंग्स के आधार पर देखा जाए। इसका उपयोग ओवरस्पीडिंग को रोकने के लिए किया जाना चाहिए। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बैनर्जी ने याचिका का विरोध किया। इस पर अदालत ने कहा कि गति सीमा उल्लंघन के मामलों में कोई खामी या चूक नहीं रहनी चाहिए। एनएचएआई के माध्यम से इस प्रयोग पर शपथपत्र दाखिल करना चाहिए।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें - दंपती हत्याकांड में नया मोड: जहरीला लड्डू खिलाकर...इसलिए किया गया कत्ल, मां, भाई और भाभी ने रची थी साजिश
विज्ञापन
अदालत का कहना है कि सबसे पहली शुरूआत भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के साथ की जाए। प्राधिकरण को अगली नियत तिथि पर अपना शपथपत्र दाखिल करना होगा। याचिका युवा उद्यमी हेमंत जैन ने प्रस्तुत की थी, जिसकी सुनवाई न्यायमूर्ति अभय एस ओका एवं न्यायमूर्ति उज्जल भुआन ने बृहस्पतिवार को की थी। विषय को अधिवक्ता केसी जैन ने प्रस्तुत किया।
विज्ञापन
न्यायमित्र गौरव अग्रवाल ने याचिका का समर्थन करते हुए कहा कि एक टोल प्लाजा से दूसरे टोल प्लाजा के बीच की दूरी को फास्टैग की समय की रीडिंग्स के आधार पर देखा जाए। इसका उपयोग ओवरस्पीडिंग को रोकने के लिए किया जाना चाहिए। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बैनर्जी ने याचिका का विरोध किया। इस पर अदालत ने कहा कि गति सीमा उल्लंघन के मामलों में कोई खामी या चूक नहीं रहनी चाहिए। एनएचएआई के माध्यम से इस प्रयोग पर शपथपत्र दाखिल करना चाहिए।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें - दंपती हत्याकांड में नया मोड: जहरीला लड्डू खिलाकर...इसलिए किया गया कत्ल, मां, भाई और भाभी ने रची थी साजिश
यह थी याचिका
भारत में सड़क दुर्घटनाओं से प्रति वर्ष डेढ़ लाख से ज्यादा लोग मारे जाते हैं, जिनमें से 70 प्रतिशत मौतों के लिए ओवरस्पीडिंग जिम्मेदार होती है। चालक कैमरों से पहले वाहन को धीमा कर लेते हैं। फिर तेजी से भाग जाते हैं। इससे स्पीड कैमरे भी धोखा खा जाते हैं। फास्टैग के जरिए टोल से टोल तक वाहन की औसत गति मापी जाए। स्पीड लिमिट से अधिक हो तो अपने-आप चालान जारी हो। इसमें एआई का सहारा लिया जाए। फास्टैग की व्यवस्था केंद्र सरकार के उपक्रम नेशनल हाईवेज मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड की ओर से की जाती है।
भारत में सड़क दुर्घटनाओं से प्रति वर्ष डेढ़ लाख से ज्यादा लोग मारे जाते हैं, जिनमें से 70 प्रतिशत मौतों के लिए ओवरस्पीडिंग जिम्मेदार होती है। चालक कैमरों से पहले वाहन को धीमा कर लेते हैं। फिर तेजी से भाग जाते हैं। इससे स्पीड कैमरे भी धोखा खा जाते हैं। फास्टैग के जरिए टोल से टोल तक वाहन की औसत गति मापी जाए। स्पीड लिमिट से अधिक हो तो अपने-आप चालान जारी हो। इसमें एआई का सहारा लिया जाए। फास्टैग की व्यवस्था केंद्र सरकार के उपक्रम नेशनल हाईवेज मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड की ओर से की जाती है।
एमआईएस से हो सुरक्षा समितियों की निगरानी
हेमंत जैन की दूसरी याचिका पर भी न्यायालय ने सुनवाई की। जो कि देश भर की जिला सड़क सुरक्षा समितियों की मॉनिटरिंग के लिए मैनेजमेंट इनफाॅर्मेशन सिस्टम का प्रयोग किया जाए। सारी सूचनाओं का खुलासा हो। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से एक पोर्टल बनाया जा चुका है, जिस पर जिला सड़क सुरक्षा समितियां अपनी रिपोर्ट व एक्शन टेकन रिपोर्ट को अपलोड कर सकती हैं। न्यायालय ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को दो माह का समय दिया। पोर्टल की कार्यप्रणाली के संबंध में शपथपत्र प्रस्तुत करने के लिए कहा। इसके अलावा इलाज के लिए बीमा कंपनियों की जिम्मेदारी तय करने को लेकर याचिका की सुनवाई के लिए 28 अप्रैल नियत की गई है। वहीं पैदल यात्रियों के संबंध में याचिका पर सुनवाई मई में होगी।
ये भी पढ़ें - UP: महिला ऑटो चालक से दरिंदगी...होटल में ले गए, एक ने खुद को बताया फौजी; फिर बारी-बारी लूटी आबरू
हेमंत जैन की दूसरी याचिका पर भी न्यायालय ने सुनवाई की। जो कि देश भर की जिला सड़क सुरक्षा समितियों की मॉनिटरिंग के लिए मैनेजमेंट इनफाॅर्मेशन सिस्टम का प्रयोग किया जाए। सारी सूचनाओं का खुलासा हो। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से एक पोर्टल बनाया जा चुका है, जिस पर जिला सड़क सुरक्षा समितियां अपनी रिपोर्ट व एक्शन टेकन रिपोर्ट को अपलोड कर सकती हैं। न्यायालय ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को दो माह का समय दिया। पोर्टल की कार्यप्रणाली के संबंध में शपथपत्र प्रस्तुत करने के लिए कहा। इसके अलावा इलाज के लिए बीमा कंपनियों की जिम्मेदारी तय करने को लेकर याचिका की सुनवाई के लिए 28 अप्रैल नियत की गई है। वहीं पैदल यात्रियों के संबंध में याचिका पर सुनवाई मई में होगी।
ये भी पढ़ें - UP: महिला ऑटो चालक से दरिंदगी...होटल में ले गए, एक ने खुद को बताया फौजी; फिर बारी-बारी लूटी आबरू
रखें सुरक्षित भारत की नींव
याचिकाकर्ता हेमंत जैन ने बताया कि फास्टैग तकनीक, सड़क सुरक्षा समितियों की निगरानी, बीमा योजना और पैदल यात्रियों के अधिकार, ये सब मिलकर एक सुरक्षित भारत की नींव रख सकते हैं। - ,
मामला सिर्फ तकनीकी नहीं
वरिष्ठ अधिवक्ता केसी जैन का कहना है कि मामला सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकारों और शासन की जिम्मेदारी का है। हमें एक ऐसी व्यवस्था चाहिए जिसमें एक मां, एक बच्चा, एक श्रमिक, सभी सुरक्षित घर लौट सकें।
याचिकाकर्ता हेमंत जैन ने बताया कि फास्टैग तकनीक, सड़क सुरक्षा समितियों की निगरानी, बीमा योजना और पैदल यात्रियों के अधिकार, ये सब मिलकर एक सुरक्षित भारत की नींव रख सकते हैं। - ,
मामला सिर्फ तकनीकी नहीं
वरिष्ठ अधिवक्ता केसी जैन का कहना है कि मामला सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकारों और शासन की जिम्मेदारी का है। हमें एक ऐसी व्यवस्था चाहिए जिसमें एक मां, एक बच्चा, एक श्रमिक, सभी सुरक्षित घर लौट सकें।