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9 साल के बच्चे को अजीब बीमारी: न चोट लगने पर होता दर्द, ठंडे और गर्म का भी नहीं कोई असर; डॉक्टर भी हैरान

Sat, 02 Sep 2023 01:35 PM IST
धीरेन्द्र सिंह 9 साल के बच्चे को अजीब बीमारी: न चोट लगने पर होता दर्द, ठंडे और गर्म का भी नहीं कोई असर; डॉक्टर भी हैरान
9 साल के बच्चे को अजीब बीमारी: न चोट लगने पर होता दर्द, ठंडे और गर्म का भी नहीं कोई असर; डॉक्टर भी हैरान Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Sat, 02 Sep 2023 01:35 PM IST
सार

यदि चोट लग जाए और दर्द न हो। ठंडे हो या गर्म किसी का एहसास ही न हो। ये तो हैरानी वाली बात है। आगरा में 9 साल का मासूम ऐसी ही बीमारी से जूझ रहा था। उसे एसएन मेडिकल कॉलेज लाया गया, जहां इस विकार को दूर करने के लिए डॉक्टरों की टीम ने बच्चे का ऑपरेशन किया।     
 

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Strange illness of 9 year old child no pain on injury even cold and hot have no effect doctor also surprised
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विस्तार

आगरा में 9 साल के एक ऐसा मासूम बच्चे का केस सामने आया, जिसकी बीमारी के लक्षण देखकर डॉक्टर भी हैरान रह गए। बच्चे को न तो ठंडे और गर्म का और ना हीं शरीर में लगने वाली किसी चोट का एहसास हो रहा था। डॉक्टरों ने इस बच्चे की बीमारी पता करने के लिए जांच कराई। एमआरआई कराने पर पता चला कि बच्चे की रीढ़ की नसें जन्मजात चिपकी थीं। इस वजह से ये सारी समस्याएं उसके सामने आ रहीं थीं। एसएन मेडिकल कॉलेज में इस विकार को दूर करने के लिए बच्चे का ऑपरेशन किया गया। अब बच्चा स्वस्थ है। डॉक्टरों का दावा है कि ऑपरेशन बेहद जटिल था, इसका निजी अस्पताल में 3.50 लाख रुपये से अधिक खर्चा आता।

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ये है इस बीमारी का नाम

न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉ. मयंक अग्रवाल ने बताया कि खंदौली के इस बच्चे की जन्म से ही रीढ़ की हड्डी पर बालों का गुच्छा था, नसें भी चिपकी थीं। शरीर सुन्न रहने की वजह से पैर की चोट का घाव नहीं भर रहा था। तब परिजन ने बच्चे को न्यूरो सर्जरी विभाग में दिखाया। एमआरआई कराने पर डायस्टमेटोमाइलिया टाइप-1 बोनी स्पर विद टेथर्ड बीमारी की पुष्टि हुई। बच्चे का ऑपरेशन 6 घंटे चला।

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10 हजार में से एक को होती है ये बीमारी 

न्यूरोसर्जन डॉ. गौरव धाकरे ने बताया कि ये बीमारी 10 हजार में किसी एक को होती है। ऑपरेशन कर नस पर दबाव कम किया और बोनी स्पर निकाला गया। ऑपरेशन में मल-मूत्र त्यागने में मस्तिष्क को सूचना देने वाली नस के प्रभावित होने का भी खतरा था। शुक्रवार को बच्चे को पूर्ण स्वस्थ घोषित कर दिया गया। 

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निशुल्क हुआ ऑपरेशन 

प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि बेहद जटिल ऑपरेशन निशुल्क हुआ। निजी अस्पताल में 3.50 लाख रुपये से अधिक खर्च हो जाते। ऑपरेशन में डॉ. आदित्य वार्ष्णेय, डॉ. क्षितिज, डॉ. अनूप, डॉ. नितिका मित्तल और डॉ. दीपक शामिल रहे।

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