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Flood In Agra: पानी कम हुआ परेशानी नहीं, बाढ़ में बह गए पशु और फसलें हो गईं बर्बाद; अब दो वक्त की रोटी का संकट
Sun, 23 Jul 2023 12:02 AM IST
भूपेन्द्र सिंह
अमर उजाला, आगरा
अमर उजाला, आगरा
Published by: भूपेन्द्र सिंह
Updated Sun, 23 Jul 2023 12:02 AM IST
सार
Flood In Agra: आगरा में यमुना का पानी कम हुआ लेकिन परेशानी नहीं। बाढ़ में किसानों के पशु बह गए और फसलें बर्बाद हो गईं। अब उनके सामने दो वक्त की रोटी का संकट है।
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Flood In Agra: यमुना की बाढ़ ने लोगों के सामने दो वक्त की रोटी का संकट ला दिया
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
उत्तर प्रदेश के आगरा में यमुना के घटते जलस्तर को देख लोग भी अब अपने-अपने घरों को लौट रहे हैं। घर वापस आने की खुशी से ज्यादा अपनी तबाही का मंजर देख किसान व छोटे व्यापारियों की आंखों में आंसू हैं। 10 दिन पहले जिस मिर्च की खेती को हरा-भरा देखकर वह खुश थे, आज अपने अरमानों की उसी फसल को बाढ़ में बर्बाद हुआ देख गले से निवाला नहीं उतर रहा।
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कैलाश के पास स्थित नगला नाथू, छत्रर सिंह के किसानों व छोटे व्यापारियों को जीवन यापन की चिंता सता रही है। यमुना का जलस्तर कम होने से लोग एक बार फिर पहले की तरह अपने काम-धंधे पर लौटते दिखे। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में बर्बाद हो चुकी फसल, पानी में बह चुके गोवंश और पशुओं के दुःख में गांव के लोग दुःखी नजर आए।
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नगला नाथू निवासी मीरा देवी ने बताया कि यमुना किनारे मिर्च की खेती करके व गाय, बकरी का दूध बेचकर अपने घर को चला रहीं थीं। यमुना का पानी बढ़ने लगा तो सारा सामान लेकर ऊंचे स्थान पर पहुंच गए। दो रात न हम सोए न ही बच्चे। यमुना का पानी उतरा तो अपने घरों में सामान लेकर पहुंचे। घर उजड़ा हुआ और फसलें बर्बाद मिलीं। हमने घर को तो साफ करके ठीक कर लिया। लेकिन, बर्बाद हुई मिर्च की फसल देखकर समझ नहीं आ रहा कि किससे क्या मदद मांगे।
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बकरियां बह गईं, दाना सड़ गया
रियासउद्दीन ने बताया कि 10 साल पहले रॉयल गोट फॉर्म के नाम से बकरी फार्म खोला था। अचानक बाढ़ का पानी आया और 10 से 14 बककियां भी बह गईं। बाकी बकरियों को लेकर शुक्रवार को अपने फॉर्म में लेकर लौटे तो बकरियों का सारा चारा, जौ, मक्का सड़ चुका था। इतना पैसा भी नहीं है कि एक बार फिर से पहले की तरह सब शुरू कर लें।यह भी पढ़ेंः- प्रेमी के साथ संबंध में बना था बाधक: पति की हत्या कर शव को यूं लगाया ठिकाने...पुलिस के आगे होशियारी काम न आई
बाढ़ में जान तो बच गई , लेकिन सब कुछ तो बर्बाद हो गया। खेती कर अपना घर चलाते थे। वह भी नहीं बची। न ही गाय, बकरियां बचीं। सामान तो हमारे पास ज्यादा नहीं था। जो कुछ भी था वह हमारी फसल थी। इससे हमारा घर चलता था। हमारे लिए तो कोई भी सहारा नहीं है। -तेजपाल सिंह, किसान
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प्रशासन की ओर से नहीं मिला सहयोग
प्रशासन की तरफ से कोई भी सहयोग नहीं मिला। गोशाला छोड़ टीले वाले हनुमान मंदिर पर पिछले एक हफ्ते से गायों के साथ रह रहे हैं। गायों के लिए एक तिरपाल का भी इंतजाम नहीं किया। यमुना का पानी उतरने पर यमुना से फैली कीचड़ भी खुद ही साफ कर रहे हैं। -अवधेश पंडित ( मां रेणुका गौसेवा धाम, संचालक)यह भी पढ़ेंः- अखिलेश के निशाने पर भाजपा: बोले- मणिपुर की घटना ने विश्व में गिराई देश की प्रतिष्ठा, सरकार हर मोर्चे पर फेल
श्मसान घाट से यमुना का पानी तो निकल गया, लेकिन कीचड़ के कारण शवों की अंत्येष्टि करने में दिक्क्तों का सामना करना पड़ रहा है। प्रधान की ओर से कीचड़ साफ करवाने का काम नहीं कराया जा रहा है। -गुड्डू, देखरेखकर्ता (पोइया घाट, श्मसान)