{"_id":"6a9e1b39d6ed893e3607ec6e","slug":"scolded-by-parents-children-fled-home-89-rescued-from-railway-stations-in-one-year-2026-09-07","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"ये कैसी पेरेंटिंग: माता-पिता से नाराज बचपन, घर छोड़ रेलवे स्टेशन पहुंचे; एक साल में 89 बच्चे हुए रेस्क्यू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ये कैसी पेरेंटिंग: माता-पिता से नाराज बचपन, घर छोड़ रेलवे स्टेशन पहुंचे; एक साल में 89 बच्चे हुए रेस्क्यू
Mon, 07 Sep 2026 08:16 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Mon, 07 Sep 2026 08:16 AM IST
सार
आगरा में माता-पिता की डांट बच्चों के घर छोड़ने की बड़ी वजह बन रही है। पिछले एक साल में रेलवे स्टेशनों से 89 बच्चों को रेस्क्यू किया गया। विशेषज्ञों के मुताबिक बच्चों में धैर्य और सहनशीलता की कमी भी इसकी एक वजह है, इसलिए अभिभावकों को बच्चों से मित्रवत संवाद रखना चाहिए।
विज्ञापन
ये कैसी पेरेंटिंग
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
माता-पिता की डांट कई बार बच्चों को इतना उत्तेजित कर देती है कि वे बिना सोचे-समझे घर छोड़कर निकल जाते हैं। आगरा में पिछले एक वर्ष में ऐसे 89 बच्चों को रेलवे चाइल्ड लाइन ने रेलवे स्टेशनों से रेस्क्यू किया। इनमें 7 से 15 वर्ष तक के बच्चे थे। काउंसलिंग में सामने आया कि अधिकांश बच्चे मोबाइल पर वीडियो देखने से रोकने या पढ़ाई के लिए माता-पिता की डांट से नाराज होकर घर से निकले थे।
विज्ञापन
रेलवे स्टेशनों पर अकेले घूमते या संदिग्ध स्थिति में दिखाई देने वाले बच्चों पर चाइल्ड लाइन और रेलवे पुलिस की नजर रहती है। रेलवे पुलिस के सीओ राजेश दीक्षित ने बताया कि अकेला बच्चा दिखाई देने पर उससे बातचीत कर उसके घर से निकलने का कारण जानने का प्रयास किया जाता है। काउंसलिंग के बाद बच्चे को सुरक्षित उसके परिजन के सुपुर्द किया जाता है। हाल ही में सिगरेट के साथ पकड़े जाने पर डांट से नाराज होकर एक राष्ट्रीय स्तर के टेबल टेनिस खिलाड़ी ने भी हॉस्टल और घर छोड़ दिया था। मुंबई में वह मजदूरी कर दिन गुजार रहा था।
विज्ञापन
विज्ञापन
सहनशीलता और धैर्य की कमी बन रहे वजह
एसएन मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विभागाध्यक्ष डॉ. विशाल सिन्हा ने बताया कि बच्चों में सहनशीलता और धैर्य की कमी है। इसके लिए वर्तमान पेरेंटिंग भी एक वजह है। अभिभावक बच्चों की हर मांग को झट से पूरा कर रहे हैं। इससे उनमें ना सुनने और इंतजार की प्रवृत्ति विकसित नहीं हो रही है। अति होने पर अभिभावक बच्चों को डांट देते हैं तो वे इसके आदी नहीं है। इसके चलते वह आत्मघाती कदम उठाने के अलावा घर छोड़कर चले जाते हैं।
एसएन मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विभागाध्यक्ष डॉ. विशाल सिन्हा ने बताया कि बच्चों में सहनशीलता और धैर्य की कमी है। इसके लिए वर्तमान पेरेंटिंग भी एक वजह है। अभिभावक बच्चों की हर मांग को झट से पूरा कर रहे हैं। इससे उनमें ना सुनने और इंतजार की प्रवृत्ति विकसित नहीं हो रही है। अति होने पर अभिभावक बच्चों को डांट देते हैं तो वे इसके आदी नहीं है। इसके चलते वह आत्मघाती कदम उठाने के अलावा घर छोड़कर चले जाते हैं।
इन बातों का रखें ध्यान
- बच्चों की जरूरत पूरी करनी है, मांग नहीं।
- बच्चों को सामाजिक बुराई के प्रति आगाह करें।
- उनके मित्र, व्यवहार और क्रियाकलापों के बारे में मित्रवत होकर जानें।
- बच्चे के व्यवहार में बदलाव आने पर विशेषज्ञ से काउंसिलिंग कराएं।
- मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के टोल फ्री नंबर टेलीमानस 14416 पर फोन करें।
- बच्चों की जरूरत पूरी करनी है, मांग नहीं।
- बच्चों को सामाजिक बुराई के प्रति आगाह करें।
- उनके मित्र, व्यवहार और क्रियाकलापों के बारे में मित्रवत होकर जानें।
- बच्चे के व्यवहार में बदलाव आने पर विशेषज्ञ से काउंसिलिंग कराएं।
- मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के टोल फ्री नंबर टेलीमानस 14416 पर फोन करें।