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श्रावण पूर्णिमा और श्रवण नक्षत्रों का महासंयोग, भद्रा और राहु काल में न बांधें राखी
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कासगंज। रक्षाबंधन पर्व सोमवार को हर्षोल्लास से मनाया जाएगा। वेद विद्वानों की मानें तो इस पर्व पर लगभग 3 दशक बाद नक्षत्रों का महासंयोग बन रहा है। हालांकि एक निर्धारित समय तक भद्रा और राहु का भी साया रहेगा। राहु और भद्राकाल के बाद पूरे दिन बहनें भाई को राखी बांध सकेंगी।
लंबे समय बाद संयोग बना है कि सावन माह के आखिरी सोमवार पर श्रावण पूर्णिमा व श्रवण नक्षत्र शुभ संदेश दे रहे हैं। सोमवार को सोम का ही नक्षत्र है। सुबह 6:51 बजे से सिद्धि योग भी शुरू हो रहा है। सुबह 7 बजकर 20 मिनट तक सूर्य का नक्षत्र समाप्त हो रहा है और चंद्र का नक्षत्र शुरू हो जाएगा।
हालांकि 9:28 बजे तक भद्राकाल रहेगा। सुबह साढ़े सात बजे से नौ बजे तक राहुकाल रहेगा। राहुकाल और भद्राकाल में किसी भी शुभ कार्य को निषेध माना गया है। वेद विद्वानों के अनुसार भद्रा और राहुकाल में राखी नहीं बांधनी चाहिए। 9:29 बजे तक राहु और भद्राकाल का प्रभाव समाप्त हो जाएगा। उसके बाद पूरे दिन शुभ मुहूर्त है।
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क्या है भद्रा और राहुकाल
भद्रा सूर्य की पुत्री और शनि की बहन हैं। भ्रदा में शुभकार्य करना वर्जित माना गया है। भ्रदा शनि की तरह उग्र रहती हैं। इसी तरह राहुकाल का भी प्रभाव रहता है। ग्रह गोचर की स्थिति के अनुसार सुबह उत्तराषाढ़ काल 7:20 बजे समाप्त होगा। फिर श्रवण नक्षत्र लगेगा।
यह है रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त
- सुबह 9:30 बजे से शुरू होगा राखीबंधन का शुभ मुहूर्त।
- रात्रि 21:15 बजे तक रहेगा मुहूर्त।
- 11 घंटे 47 मिनट तक रहेगा शुभ मुहूर्त।
सोरों के ज्योतिषाचार्य रामबल्लभ ने बताया कि भद्रा और राहुकाल में राखी बंधन से बचें। इस काल में शुभ कार्य वर्जित होते हैं। सुबह 9:30 बजे से शुरू हो रहे शुभ मुहूर्त में बहनें भाइयों को राखी बंाधेें। तिलक चंदन लगाएं। रक्षाबंधन पर लगभग 3 दशक बाद नक्षत्रों का महासंयोग बन रहा है।
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लंबे समय बाद संयोग बना है कि सावन माह के आखिरी सोमवार पर श्रावण पूर्णिमा व श्रवण नक्षत्र शुभ संदेश दे रहे हैं। सोमवार को सोम का ही नक्षत्र है। सुबह 6:51 बजे से सिद्धि योग भी शुरू हो रहा है। सुबह 7 बजकर 20 मिनट तक सूर्य का नक्षत्र समाप्त हो रहा है और चंद्र का नक्षत्र शुरू हो जाएगा।
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हालांकि 9:28 बजे तक भद्राकाल रहेगा। सुबह साढ़े सात बजे से नौ बजे तक राहुकाल रहेगा। राहुकाल और भद्राकाल में किसी भी शुभ कार्य को निषेध माना गया है। वेद विद्वानों के अनुसार भद्रा और राहुकाल में राखी नहीं बांधनी चाहिए। 9:29 बजे तक राहु और भद्राकाल का प्रभाव समाप्त हो जाएगा। उसके बाद पूरे दिन शुभ मुहूर्त है।
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क्या है भद्रा और राहुकाल
भद्रा सूर्य की पुत्री और शनि की बहन हैं। भ्रदा में शुभकार्य करना वर्जित माना गया है। भ्रदा शनि की तरह उग्र रहती हैं। इसी तरह राहुकाल का भी प्रभाव रहता है। ग्रह गोचर की स्थिति के अनुसार सुबह उत्तराषाढ़ काल 7:20 बजे समाप्त होगा। फिर श्रवण नक्षत्र लगेगा।
यह है रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त
- सुबह 9:30 बजे से शुरू होगा राखीबंधन का शुभ मुहूर्त।
- रात्रि 21:15 बजे तक रहेगा मुहूर्त।
- 11 घंटे 47 मिनट तक रहेगा शुभ मुहूर्त।
सोरों के ज्योतिषाचार्य रामबल्लभ ने बताया कि भद्रा और राहुकाल में राखी बंधन से बचें। इस काल में शुभ कार्य वर्जित होते हैं। सुबह 9:30 बजे से शुरू हो रहे शुभ मुहूर्त में बहनें भाइयों को राखी बंाधेें। तिलक चंदन लगाएं। रक्षाबंधन पर लगभग 3 दशक बाद नक्षत्रों का महासंयोग बन रहा है।