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आलू का नहीं मिल रहा भाव, किसान मायूस
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े27एमएनपी-24-राजा मंडी में रखे आली के पैकिट
- फोटो : MAINPURI
मैनपुरी। जिले के किसानों को इस वर्ष उम्मीद के अनुसार आलू का भाव नहीं मिल पा रहा है। इससे किसान मायूस हैं। वर्तमान में आलू तीन सौ रुपये पैकेट से लेकर 550 रुपये पैकेट तक बिक रहा है। हालांकि विगत वर्ष जुलाई माह में आलू छह सौ रुपये पैकेट से लेकर 850 रुपये पैकेट तक बिका था। आलू का भाव कम मिलने के पीछे बंपर पैदावार और पहाड़ी और कर्नाटक के हसन आलू की नई पैदावार का बाजार में आना है।
जिले में आलू का करीब 22 हजार हेक्टेयर रकबा है। प्रतिवर्ष बड़ी मात्रा में आलू की पैदावार होती है और करीब तीन लाख मीट्रिक टन आलू का भंडारण होता है। विगत वर्ष आलू ने किसानों को मालामाल कर दिया था। इसके चलते इस वर्ष जिले में करीब दो हजार हेक्टेयर आलू का रकबा और बढ़ गया। मौजूदा समय में करीब ढाई लाख मीट्रिक टन आलू शीतगृह में भंडारित है। फिलहाल किसानों को आलू का बीते वर्ष जैसा भाव नहीं मिल रहा है। इससे बड़े किसान आलू की निकासी नहीं कर रहे हैं। वर्तमान में करीब ढाई लाख मीट्रिक टन आलू भंडारित हैं।
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आलू के भाव पर एक नजर
वैरायटी जुलाई 2020 जुलाई 2021
हाइब्रिड 1200 से 1500 600 से 800
चिपसोना 1500 से 1700 900 से 1000
3797 1400 से 1600 700 से 850
लाल आलू 1500 से 1700 900 से 1000
नोट-आलू का भाव प्रति क्विंटल की दर से है।
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नए आलू से कम हुई मांग
आलू व्यापारियों का कहना है कि बाजार में पहाड़ी (हल्द्वानी) के नए आलू की आवक शुरू हो गई है। इसके साथ ही कर्नाटक से हसनपुर का आलू भी आ रहा है। इस कारण स्थानीय आलू की मांग कम हुई है। यही कारण है कि इस बार आलू का भाव नहीं चढ़ पा रहा है।
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पहाड़ी और हसन आलू की आवक बाजार में हो गई है। इस कारण स्थानीय आलू की मांग मौजूदा समय में कम है। यही कारण है कि किसानों को आलू का भाव नहीं मिल पा रहा है।
- पीयूष चंदेल, शीतगृह संचालक
इस बार आलू की पैदावार अधिक हुई है। मंडी में भी आलू बड़ी मात्रा में आ रहा है। इसके चलते आलू के दाम गिरे हैं। बाजार के दामों पर ही आढ़ती किसानों से आलू खरीदते हैं।
- विनोद कुमार, किसान धारऊ
किसानों को उम्मीद थी कि इस वर्ष आलू बीते वर्ष की तरह ही बिकेगा। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। इससे आलू किसानों को मायूसी हाथ लगी है।
- राजकुमार, किसान नगला कैथ
महानगरों की मंडियों से आलू की मांग अधिक नहीं आ रही है। यही कारण है कि इस बार आलू का भाव नहीं बढ़ रहा है। नुकसान किसान का हुआ है।
- जयचंद्र सिंह, किसान सीतापुर
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जिले में आलू का करीब 22 हजार हेक्टेयर रकबा है। प्रतिवर्ष बड़ी मात्रा में आलू की पैदावार होती है और करीब तीन लाख मीट्रिक टन आलू का भंडारण होता है। विगत वर्ष आलू ने किसानों को मालामाल कर दिया था। इसके चलते इस वर्ष जिले में करीब दो हजार हेक्टेयर आलू का रकबा और बढ़ गया। मौजूदा समय में करीब ढाई लाख मीट्रिक टन आलू शीतगृह में भंडारित है। फिलहाल किसानों को आलू का बीते वर्ष जैसा भाव नहीं मिल रहा है। इससे बड़े किसान आलू की निकासी नहीं कर रहे हैं। वर्तमान में करीब ढाई लाख मीट्रिक टन आलू भंडारित हैं।
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आलू के भाव पर एक नजर
वैरायटी जुलाई 2020 जुलाई 2021
हाइब्रिड 1200 से 1500 600 से 800
चिपसोना 1500 से 1700 900 से 1000
3797 1400 से 1600 700 से 850
लाल आलू 1500 से 1700 900 से 1000
नोट-आलू का भाव प्रति क्विंटल की दर से है।
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नए आलू से कम हुई मांग
आलू व्यापारियों का कहना है कि बाजार में पहाड़ी (हल्द्वानी) के नए आलू की आवक शुरू हो गई है। इसके साथ ही कर्नाटक से हसनपुर का आलू भी आ रहा है। इस कारण स्थानीय आलू की मांग कम हुई है। यही कारण है कि इस बार आलू का भाव नहीं चढ़ पा रहा है।
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पहाड़ी और हसन आलू की आवक बाजार में हो गई है। इस कारण स्थानीय आलू की मांग मौजूदा समय में कम है। यही कारण है कि किसानों को आलू का भाव नहीं मिल पा रहा है।
- पीयूष चंदेल, शीतगृह संचालक
इस बार आलू की पैदावार अधिक हुई है। मंडी में भी आलू बड़ी मात्रा में आ रहा है। इसके चलते आलू के दाम गिरे हैं। बाजार के दामों पर ही आढ़ती किसानों से आलू खरीदते हैं।
- विनोद कुमार, किसान धारऊ
किसानों को उम्मीद थी कि इस वर्ष आलू बीते वर्ष की तरह ही बिकेगा। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। इससे आलू किसानों को मायूसी हाथ लगी है।
- राजकुमार, किसान नगला कैथ
महानगरों की मंडियों से आलू की मांग अधिक नहीं आ रही है। यही कारण है कि इस बार आलू का भाव नहीं बढ़ रहा है। नुकसान किसान का हुआ है।
- जयचंद्र सिंह, किसान सीतापुर