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Agra News: पिर पक्ष आज से, तीर्थनगरी में उमड़ेंगे श्रद्धालु

Tue, 17 Sep 2024 02:40 AM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा Updated Tue, 17 Sep 2024 02:40 AM IST
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Pir Paksha from today, devotees will flock to tPir Paksha from today, devotees will flock to the pilgrimage cityhe pilgrimage city
सोरोंजी। श्राद्ध पक्ष मंगलवार से शुरू होगा। पहले दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु तीर्थंनगरी की हरि की पौड़ी व लहरा घाट पर गंगा स्नान करेंगे व अपने पितरों का स्मरण करते हुए जलदान करेंगे। 16 दिन तक चलने वाले इस पितृ पक्ष में लाखों श्रद्धालु दूर दराज के प्रांतों से अपने पितरों को जलदान व तर्पण करने पहुंचेंगे। श्राद्ध पूजा के लिए पुरोहितों ने सारी तैयारियां पूर्ण कर लीं हैं, हरि की पौड़ी के वराह घाट, लक्ष्मण जी वाले घाट, लाल घाट, बालाजी घाट, भागीरथी गंगा मंदिर घाट पर, बरी वाले घाट पर मुख्यत: श्राद्ध पूजा के लिए श्रद्धालु जुटते हैं। 2 अक्टूबर को पितृ विसर्जन अमावस्या तक प्रतिदिन तिथियों के अनुसार श्रद्धालु अनवरत अपने पितरों की श्राद्ध पूजा व तर्पण के लिए पहुंचेंगे। तीर्थनगरी में श्राद्ध का विशेष महत्व है। यहां की हरि की पौड़ी के कुंड में जो भी अस्थियां विसर्जित की जाती हैं वह 72 घंटे में जल रूप में परिवर्तित हो जाती हैं। इसी मान्यता के कारण लोग यहां पहुंचते हैं। श्राद्ध पूजा तीर्थ क्षेत्रों में ही की जाती है। विष्णु पुराण के अनुसार अन्य तीर्थों के साथ शूकरक्षेत्र में श्राद्ध पूजा को महत्वपूर्ण बताया है।
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क्या हैं श्राद्ध : श्राद्ध पितरों के उद्देश्य से विधिपूर्वक जो कर्म श्रद्धा से किया जाता है। उसे श्राद्ध कहते हैं। श्रद्धा से ही श्राद्ध शब्द बना है। अपने मातृ पितृगणों को श्रद्धापूर्वक किए जाने वाले कर्म विशेष से उनका स्मरण करते हुए उनका तर्पण कराया जाता है। इसे पितृ यज्ञ भी कहा जाता है। मन स्मृति, धर्म शास्त्रों व पुराणों में श्राद्ध का महत्व वर्णित है। श्राद्ध में पिंड दान, तर्पण एवं ब्राह्मण भोजन कराया जाता है। अपने पितरों की मृत तिथि के अनुसार ही श्राद्ध करना चाहिए। श्राद्ध के दौरान पितरों को जो भी समर्पित किया जाता है वह पितरों तक पहुंचने की मान्यता है। जिससे श्राद्ध करने वाली संतानों को अभीष्ट फल की प्राप्ति होती है।
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श्राद्ध हेतुु स्थान :
जहां तक संभव हो श्राद्ध तीर्थक्षेत्र में ही संपन्न करना चाहिए। जो तीर्थ भुक्ति और मुक्ति प्रदान करने वाले हों वो अति श्रेष्ठ हैं। विष्णुु पुुराण के अनुसार शालगाम, द्वारिका, नैमिशारण्य, पुुष्कर, गया, वाराणसी, प्रयाग, कुुरूक्षेत्र, शूकरक्षेत्र, गंगा, नर्मदा, चंद्रभागा, सरस्वती का तट, पुुरुषोत्तम क्षेत्र तथा महाकाल का अधिष्ठान उज्जैन ये सभी तीर्थ सब प्रकार के पापों का विनाश करने वाले एवं भुुक्ति मुुक्ति प्रदान करने वाले हैं।
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