बाह। जैतपुर के धर्मसिंह पुरा गांव में गाजे-बाजे के साथ निकली कलश यात्रा के बाद व्यासपीठ पर विराजमान हुए आशुतोष बापू ने अपने प्रवचन में कहा कि श्रीरामचरितमानस केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि व्यवहार संहिता और भवपार संहिता है। उन्होंने कहा कि यह ग्रंथ मनुष्य को जीवन जीने की सही दिशा देता है और भवसागर पार कराने में सक्षम है।
गोस्वामी तुलसीदास ने 452 वर्ष पहले श्रीरामचरितमानस की रचना की थी, लेकिन कथा का स्वरूप इससे कहीं प्राचीन है। उन्होंने कहा कि राम से जुड़ा समय ही जीवन का वास्तविक शुभ समय है। उन्होंने यह भी कहा कि विश्व में 100 करोड़ से अधिक रामायण लिखी गई हैं, क्योंकि भगवान राम के जीवन प्रसंगों को अलग-अलग लोगों ने अपने अनुभव और दृष्टि से वर्णित किया है। इससे पहले गाजे-बाजे के साथ निकली कलश यात्रा पर पुष्प वर्षा की गई। इस दौरान परीक्षत कमला देवी, यज्ञपति आनंद सिंह भदौरिया, कुशमा देवी, श्याम सिंह, श्यामबहादुर सिंह भदौरिया आदि ने व्यवस्थाएं संभाली।