सेहत की बात: ध्यान नहीं रखा तो चिकनाई से बिगड़ सकता है स्वास्थ्य, खानपान में इन बातों का रखें ध्यान
चिकित्सकों के मुताबिक हाइपरटेंशन, किडनी, दिल आदि के मरीजों को 24 घंटे में 10 मिलीलीटर से अधिक तेल या घी नहीं खाना चाहिए। ज्यादा मात्रा में तैलीय भोजन करने से सेहत खराब हो सकती है।
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कोरोना महामारी ने हमें रोग प्रतिरोधक क्षमता का महत्व समझाया है। इसके लिए खानपान और दिनचर्या का ध्यान रखना महत्व है। विशेषज्ञों के मुताबिक हमें चीनी और नमक के साथ चिकनाई (तेल और घी) भी निर्धारित मात्रा में लेना चाहिए। तेल और घी का अधिक मात्रा में सेवन हमारी सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है।
आगरा के वरिष्ठ फिजीशियन व आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. राजीव उपाध्याय के मुताबिक सामान्य व्यक्ति को 24 घंटे में 30 मिलीलीटर से अधिक तेल या घी का सेवन नहीं करना चाहिए। हाइपरटेंशन, किडनी, दिल आदि के मरीजों को 24 घंअे में 10 मिलीलीटर से अधिक तेल या घी नहीं खाना चाहिए।
खासतौर पर लोगों को ट्रांसफैट वाले पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए। दावत या बाजार में एक ही तेल में बार-बार बेड़ई, कचौड़ी, समोसे आदि तले जाते हैं। इससे ट्रांसफैट बनता है। यह सेहत के लिए बेहद खतरनाक है। इससे हृदय और रक्तचाप के साथ ब्रेन अटैक समस्या हो सकती है।
20 से 30 फीसदी कैलोरी फैट से आनी चाहिए
एसएन मेडिकल कॉलेज के फिजिशियन डॉ. अजीत चाहर ने बताया कि व्यक्ति को 20 से 30 फीसदी कैलोरी फैट के माध्यम से प्राप्त करनी चाहिए। फैट का मुख्य स्रोत तेल या घी होता है। एक ही तेल या घी में बार-बार तले हुए खाद्य पदार्थ को खाना हृदय के लिए खतरनाक हो सकता है। यह खून की प्रवाह को रोक सकता है।
दो भटूरे में 40 मिलीलीटर तेल या घी
डॉ. राजीव उपाध्याय का कहना है कि स्वस्थ रहने के लिए डाइट पर ध्यान देना जरूरी है। उसमें फैट की मात्रा जरूर देखें। हम दो समोसे खाते हैं तो करीब 20 मिलीलीटर तेल या घी खा लेते हैं। इस तरह दो भटूरे में खाने पर पूरे 24 घंटे के कोटे से अधिक तेल या घी का सेवन कर लेते हैं।
बिकिस्ट और कुकीज में भी ट्रांसफैट होता है। इनके सेवन से अच्छा है कि ड्राई फ्रूट या टोस्ट आदि का सेवन कर लें। घी में देशी घी, तेल में सरसों तेल, जैतून का तेल या राइस ग्रेन ऑयल का सेवन अपेक्षाकृत अच्छा होता है।