{"_id":"66b4f0a84093ca094002a4b6","slug":"nag-panchami-2024-rare-yoga-after-500-years-do-puja-in-auspicious-time-puja-vidhi-shubh-muhurat-2024-08-08","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Nag Panchami 2024: नागपंचमी पर 500 साल बाद दुर्लभ योग...इस शुभ मुहूर्त में करें पूजा; मेहरबान होंगे भोलेनाथ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Nag Panchami 2024: नागपंचमी पर 500 साल बाद दुर्लभ योग...इस शुभ मुहूर्त में करें पूजा; मेहरबान होंगे भोलेनाथ
Fri, 09 Aug 2024 08:53 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Fri, 09 Aug 2024 08:53 AM IST
सार
Nag Panchami 2024: नागपंचमी का पर्व आज यानि 9 अगस्त को मनाया जा रहा है। इस बार नागपंचमी पर आज 500 साल बाद पांच दुर्लभ योग बन रहे हैं। ऐसे में शुभ मुहूर्त में पूजा करने से बिगड़े काम बनेंगे।
विज्ञापन
नाग पंचमी 2024
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
नाग पंचमी पर शुक्रवार को 500 साल बाद पांच दुर्लभ योग बन रहे हैं, जो विशेष पुण्य फलदायी साबित होंगे। ज्योतिषाचार्य शिवशरण पाराशर ने बताया कि बृहस्पतिवार आधी रात के बाद 12.36 बजे से शुक्रवार आधी रात के बाद 3.14 बजे तक पंचमी तिथि रहेगी।
विज्ञापन
नाग पंचमी पर शुक्र और बुध मिलकर लक्ष्मी नारायण योग, शनि के अपनी राशि कुंभ में विचरण से शश योग, चंद्रमा के कन्या राशि में होने और राहु के साथ समसप्तक योग बन रहा है। शुभ और सिद्धि योग भी बनेगा। 5 राजयोग 500 साल बाद बन रहे हैं। शिव के पूजन से भक्तों के बिगड़े काम बनेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
आचार्य सूर्यकांत गोस्वामी ने बताया कि नाग पंचमी पर बटेश्वर में काल सर्प दोष से मुक्ति के लिए अनुष्ठान हाेंगे। दुर्लभ योग होने की बजह से स्नान अनुष्ठान के लिए भक्त पहुंचने लगे हैं।
लालपुरा में पृथ्वीराज चौहान के जमाने से लग रहा नाग पंचमी का मेला
जैतपुर के लालपुरा गांव में सुखभान और पहलवान के थान पर पृथ्वीराज चौहान के जमाने से मेला लगता आ रहा है। बुजुर्ग बताते हैं कि पृथ्वीराज चौहान दिल्ली से संयोगिता को लेने के लिए बाह के रास्ते कन्नौज को निकले थे। नाग पंचमी के दिन जयचंद ने उन पर चढ़ाई कर दी थी। लड़ाई में लालपुरा के सुखभान और पहलवान की जान चली गई थी। कमल सिंह नरवरिया ने बताया कि तब से उनकी स्मृति में बने सुखभान और पहलवान के थान पर नाग पंचमी का मेला लगता है। दूध की धार चढ़ाई जाती है। प्राचीन मेले में विषबेल के इलाज के लिए पीपल के पेड़ के नीचे ढाक बजती है। लालपुरा में लगने वाले मेले में एक दिन पहले से ही पूजा पाठ शुरू हो गया है। नौगवां हार के मंदिर पर भी मेले का आयोजन होगा। भक्तों ने मंदिर परिसर में डेरा डाल लिया है।
जैतपुर के लालपुरा गांव में सुखभान और पहलवान के थान पर पृथ्वीराज चौहान के जमाने से मेला लगता आ रहा है। बुजुर्ग बताते हैं कि पृथ्वीराज चौहान दिल्ली से संयोगिता को लेने के लिए बाह के रास्ते कन्नौज को निकले थे। नाग पंचमी के दिन जयचंद ने उन पर चढ़ाई कर दी थी। लड़ाई में लालपुरा के सुखभान और पहलवान की जान चली गई थी। कमल सिंह नरवरिया ने बताया कि तब से उनकी स्मृति में बने सुखभान और पहलवान के थान पर नाग पंचमी का मेला लगता है। दूध की धार चढ़ाई जाती है। प्राचीन मेले में विषबेल के इलाज के लिए पीपल के पेड़ के नीचे ढाक बजती है। लालपुरा में लगने वाले मेले में एक दिन पहले से ही पूजा पाठ शुरू हो गया है। नौगवां हार के मंदिर पर भी मेले का आयोजन होगा। भक्तों ने मंदिर परिसर में डेरा डाल लिया है।