Mudiya Purnima Mela: गिरिराजजी का झाड़ी वाले हनुमान जी से है गहरा नाता, जानिए क्या है पौराणिक कथा
ब्रजचौरासी कोस परिक्रमा मार्ग पर स्थित झाड़ियों में हनुमान जी वास करते हैं। ब्रज के लोग बताते हैं कि आज भी श्रीझाड़ी वाले हनुमान जी का सीधा संबंध गिरिराजजी से रहता है।
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मथुरा के गोवर्धन में इन दिनों राजकीय मुड़िया पूर्णिमा मेला चल रहा है। कस्बा नौहझील स्थित सिद्ध स्थली श्रीझाड़ी वाले हनुमान जी का गिरिराज जी से गहरा नाता है। किवंदती है कि श्रीराम द्वारा समुद्र पर पुल का निर्माण कराया जा रहा था। पुल का निर्माण पूरा होने पर मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने वानर सैनिकों को आदेश दिया था कि जिसके हाथ में जो पत्थर है, वह उसे वहीं छोड़ कर वापस लौट आए। पुल का निर्माण कार्य जब पूरा हुआ, उस समय हनुमान जी गिरिराज पर्वत को लेकर ब्रजक्षेत्र से होकर गुजर रहे थे। अपने आराध्य का आदेश सुनते ही हनुमान जी ने गिरिराज पर्वत को ब्रज में ही उतार दिया। इस तरह गिरिराज जी ब्रज क्षेत्र में ही वास करने लगे।
यह है पौराणिक कथा
महंत रामरतनदास महाराज ने बताया कि जब हनुमानजी गिरिराज पर्वत को छोड़ कर वापस लौटने लगे तो गिरिराज जी ने हनुमान जी से कहा कि हनुमान आप मुझे छोड़ कर जा रहे हैं। मैं अब भगवान श्रीराम के दर्शन और उनकी सेवा से वंछित रह जाऊंगा। मुझे मेरे आराध्य के दर्शन कैसे होंगे? मैं उनके दर्शनों का अभिलाषी हूं। हनुमानजी ने गिरिराज जी का यह संदेश प्रभु श्रीराम तक पहुंचाया। इसके बाद द्वापर युग में इंद्रदेव के कहर से ब्रजवासियों को बचाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने गिरिराज जी को अपनी अंगुली पर उठाया।
इस तरह गिरिराज जी को अपने आराध्य के दर्शन हुए। अपने आराध्य के दर्शन कर गिरिराज जी बहुत प्रसन्न हुए। हनुमान जी से आग्रह किया कि हनुमान आप मेरे बहुत प्रिय हो, इसलिए आप भी मेरे निकट ही निवास करो। तब हनुमान जी ने कहा कि गिरिराज तुम मेरे स्वामी द्वारा पूजित हो, इसलिए मैं आपके चरणों के अंतिम छोर में ब्रज के एक कोने में निवास करूंगा। तभी से ब्रजचौरासी कोस परिक्रमा के कोने में स्थित झाड़ियों में हनुमान जी वास कर रहे हैं। ब्रज के लोग बताते हैं कि आज भी श्रीझाड़ी वाले हनुमान जी का सीधा संबंध गिरिराजजी से रहता है।