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UP: मोबाइल की लत कर रही आंखों को खराब, लंबे स्क्रीन टाइम से कलर ब्लाइंडनेस का खतरा
Wed, 30 Jul 2025 01:25 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Wed, 30 Jul 2025 01:25 PM IST
सार
मोबाइल, लैपटॉप का स्क्रीनिंग टाइम आंखों की कोशिकाओं पर बुरा असर डाल रहा है। इसका असर बच्चों की रंगों को पहचानने की क्षमता पर पड़ रहा है। वे कलर ब्लाइंडनेस जैसी समस्या की चपेट में आ रहे हैं।
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आंखें
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मोबाइल और लैपटॉप के अत्यधिक इस्तेमाल से आंखों की सेहत पर गंभीर संकट मंडरा रहा है। मेडिकल कॉलेज की नेत्र ओपीडी में रोजाना 80 से अधिक मरीज आंखों की समस्याओं के साथ पहुंच रहे हैं, जिनमें कलर ब्लाइंडनेस (रंगों को पहचानने में दिक्कत) के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। मंगलवार को भी 32 मरीजों में इसके लक्षण पाए गए।
नेत्र विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक स्क्रीन देखने से रेटिना प्रभावित हो रहा है और आंखों की कोशिकाएं सूख रही हैं। जिससे मायोपिया (निकट दृष्टि दोष) और हाइपरमेट्रोपिया (दूर दृष्टि दोष) के साथ-साथ कलर ब्लाइंडनेस के मामले भी बढ़े हैं।
यह समस्या खासकर युवाओं और बच्चों में देखी जा रही है, जो घंटों मोबाइल या लैपटॉप की स्क्रीन पर व्यस्त रहते हैं। अधिकांश मरीज 20 से 45 वर्ष की आयु के हैं, हालांकि 20 वर्ष से कम उम्र के बच्चे भी प्रभावित हो रहे हैं।
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हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करें नेत्र विशेषज्ञ डॉ. प्रेरणा उपाध्याय ने लोगों को स्क्रीन टाइम कम करने और अपने आहार में दूध, गाजर, अंडे, देसी घी, मक्खन और हरी पत्तेदार सब्जियां शामिल करने की सलाह दी है।
सीएमएस डॉ. नवीन जैन ने बताया कि नेत्र विभाग की ओपीडी में रोजाना आंखों की जांच के दौरान रंगों की पहचान में गड़बड़ी यानी कलर ब्लाइंडनेस के कई मामले सामने आ रहे हैं। मरीजों को समय पर परामर्श और जरूरी दवाएं दी जा रही हैं।
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नेत्र विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक स्क्रीन देखने से रेटिना प्रभावित हो रहा है और आंखों की कोशिकाएं सूख रही हैं। जिससे मायोपिया (निकट दृष्टि दोष) और हाइपरमेट्रोपिया (दूर दृष्टि दोष) के साथ-साथ कलर ब्लाइंडनेस के मामले भी बढ़े हैं।
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यह समस्या खासकर युवाओं और बच्चों में देखी जा रही है, जो घंटों मोबाइल या लैपटॉप की स्क्रीन पर व्यस्त रहते हैं। अधिकांश मरीज 20 से 45 वर्ष की आयु के हैं, हालांकि 20 वर्ष से कम उम्र के बच्चे भी प्रभावित हो रहे हैं।
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हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करें नेत्र विशेषज्ञ डॉ. प्रेरणा उपाध्याय ने लोगों को स्क्रीन टाइम कम करने और अपने आहार में दूध, गाजर, अंडे, देसी घी, मक्खन और हरी पत्तेदार सब्जियां शामिल करने की सलाह दी है।
सीएमएस डॉ. नवीन जैन ने बताया कि नेत्र विभाग की ओपीडी में रोजाना आंखों की जांच के दौरान रंगों की पहचान में गड़बड़ी यानी कलर ब्लाइंडनेस के कई मामले सामने आ रहे हैं। मरीजों को समय पर परामर्श और जरूरी दवाएं दी जा रही हैं।