UP: डेढ़ लाख रुपये में एमबीबीएस और बीएएमएस की कॉपी बदलने का सौदा, हुआ बड़ा खुलासा
एमबीबीएस की 26 और बीएएमएस की 14 काॅपियां बदले जाने के बारे में आरोपी ने कबूला था। एसटीएफ और पुलिस ने 10 आरोपी पकड़े थे। ये खेल लंबे समय से चल रहा था।
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मेडिकल की काॅपियां बदलने के रैकेट में डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, निजी मेडिकल कॉलेज के कर्मचारी, छात्र नेता और डॉक्टर शामिल थे। ये एक विषय की कापी बदलने के लिए 70 हजार रुपये से 1.5 लाख रुपये तक लेते थे। गिरफ्तार किए आरोपियों ने 40 काॅपियां बदले जाना कबूला था।
बीते साल अगस्त में बीएएमएस और एमबीबीएस की काॅपियां बदलने का खेल पकड़ने के बाद पुलिस 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। मास्टर माइंड छात्र नेता राहुल पाराशर, ऑटो चालक देवेंद्र और विश्वविद्यालय कर्मचारी शिव कुमार ने पुलिस को बताया था कि बीएएमएस की एक विषय की काॅपी बदलने के लिए 70 हजार रुपये और एमबीबीएस की एक विषय की काॅपी बदलने के लिए 1.5 लाख रुपये लेते थे। उन्होंने एमबीबीएस की 26 और बीएमएस की 14 काॅपियां बदले जाने की बात स्वीकारी थी। काॅपियां बदलने वाले खेल में निजी मेडिकल कॉलेज के संचालक भी शामिल थे। काॅपियां बदलने के लिए छात्रों से सौदा करने में इनकी भी भूमिका मिली थी।
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मुख्य परीक्षा में फेल, री-में पूरा पेपर था हल
निजी मेडिकल कॉलेज की काॅपियां जांचने के लिए एसएन मेडिकल कॉलेज आईं। यहां मुख्य परीक्षा में छात्र फेल थे और इक्का-दुक्का प्रश्नों का ही जवाब लिखा था। जब इनकी री-एग्जाम की काॅपियां जांचने के लिए एसएन कॉलेज आईं तो उनमें सभी प्रश्नों के जवाब हल थे। लेखनी भी अलग-अलग थीं। यह देख शिक्षकों का शक गहराया और प्राचार्य से शिकायत की। इस पर उन्होंने कॉपियां वापस करते हुए मूल्यांकन से मना कर दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए काॅपियां बदले जाने की आशंका जताते हुए जांच की मांग भी की, लेकिन तत्कालीन विश्वविद्यालय अधिकारियों ने मामले को दबा दिया।
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परीक्षा केेंद्र के बीच से बदल देते थे काॅपी
आरोपियों ने पुलिस को बताया था कि परीक्षा केंद्र से विश्वविद्यालय कर्मचारी ऑटो में उत्तर पुस्तिकाएं लेकर आते थे। जिन छात्रों से काॅपियां बदलने के लिए सौदेबाजी होती थी, उनके रोल नंबर की काॅपियां बीच रास्ते में ऑटो रोककर बदल देते थे। मूल्यांकन के लिए स्ट्रांग रूम से काॅपियां लेकर जाते वक्त भी बदल दिया जाता था। इनके स्थान पर पूर्व में हॉस्टल, घर में सॉल्वर से लिखवाकर संबंधित का रोल नंबर समेत अन्य जानकारी दर्ज कर शामिल कर दिया जाता था। बार कोड भी बदल देते थे, ये विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग से काॅपियां चोरी करते थे।
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डेविड ने पूर्व कुलपति विनय पाठक पर कराई थी एफआईआर
बीते साल 31 अक्तूबर को डिजिटेक्स टेक्नोलॉजीज एजेंसी के मालिक डेविड मारियो डेनिस ने ही परीक्षा संबंधी कार्याें के लिए 15 फीसदी कमीशन मांगने का आरोप लगाते हुए डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति प्रो. विनय पाठक पर एफआईआर दर्ज कराई थी। प्रो. पाठक जनवरी 2022 से सितंबर तक यहां प्रभारी कुलपति रहे थे।