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मास्टर प्लान: 800 पेज की आपत्तियां, 7.50 किलो वजन

Fri, 18 Feb 2022 01:11 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Fri, 18 Feb 2022 01:11 AM IST
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Master Plan: 800 pages of objections, 7.50 kg weight
आगरा। एडीए के मास्टर प्लान-2031 के ड्रॉफ्ट पर आपत्तियां दर्ज कराई गई है। बृहस्पतिवार को एनजीटी मामलों के याचिकाकर्ता डॉ. शरद गुप्ता ने आगरा विकास प्राधिकरण में मास्टर प्लान के ड्रॉफ्ट में 800 पेज की आपत्तियां दर्ज कराई, जिसके कागजों का वजन ही 7.50 किलो निकला। डॉ. गुप्ता ने एडीए के आधे अधूरे मास्टर प्लान ड्रॉफ्ट को सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के आदेशों के एकदम उलट करार दिया और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के तहत आपत्तियों के निस्तारण की मांग एडीए से की है।
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अमृत योजना के तहत आगरा विकास प्राधिकरण ने डेढ़ साल की देरी के बाद रूद्राभिषेक कंपनी से आगरा मास्टर प्लान का ड्रॉफ्ट तैयार कराया। इसके लिए 19 फरवरी तक आपत्तियों और सुझाव मांगे गए हैं। बृहस्पतिवार को पर्यावरणविद् डॉ. शरद गुप्ता ने भी कई आपत्तियां दर्ज कराई हैं। प्राधिकरण के नियोजन विभाग में आपत्तियां देने गए डॉ. शरद गुप्ता ने 800 पेज की आपत्तियां दी हैं, जिनका वजन 7.50 किलो है। डॉ. गुप्ता के मुताबिक मास्टर प्लान 2031 के ड्राफ्ट में कई चूक हुई हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को ताक पर रखा गया है। उद्योगों को शिफ्ट करने की योजना है लेकिन इस पर भी होमवर्क नहीं किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर से अगले 100 साल के लिए विजन डाक्यूमेंट तैयार कराया है लेकिन मास्टर प्लान में विजन डाक्यूमेंट के प्रावधान नजर नहीं आए। उन्होंने अपनी आपत्तियों में सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के आदेशों की प्रतियां भी लगाई हैं।
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ये हैं प्रमुख खामियां
- कीठम के ईको सेंसिटिव जोन में औद्योगिक क्षेत्र का प्रस्ताव।
- विजन डाक्यूमेंट की दिशा के उलट मास्टर प्लान बनाया गया।
- सुप्रीम कोर्ट के हेरिटेज सिटी के आदेश का कोई प्रावधान नहीं।
- विकास क्षेत्र में वृद्धि, लेकिन नहरों के नेटवर्क को किया गायब।
- ग्वालियर रोड पर प्रस्तावित बस अड्डे, ट्रांसपोर्ट नगर निरस्त किए।
- बैराज के आगे प्रस्तावित नाले पर एसटीपी का प्रावधान नहीं।
बृहस्पतिवार को नेशनल चैंबर ने भी मास्टर प्लान-2031 के ड्रॉफ्ट पर वेबिनार किया, जिसमें लोगों ने सबसे पहले समय आपत्तियों की सीमा बढ़ाने की मांग की। चैंबर अध्यक्ष मनीष अग्रवाल ने बताया कि अयोध्या, वाराणसी, प्रयागराज समेत समेत सभी जिलों ने आपत्तियों के लिए समय सीमा बढ़ाकर 31 मार्च कर दी है, पर आगरा में कमिश्नर और एडीए उपाध्यक्ष को पत्र भेजने के बाद भी ऐसा नहीं किया गया। अधिवक्ता केसी जैन ने कहा कि कंसलटेंट ने इन्फ्रास्ट्रक्चर और वित्तीय संसाधनों का उल्लेख नहीं किया। आगरा टूरिस्ट वेलफेयर चैंबर अध्यक्ष प्रहलाद अग्रवाल ने बताया कि मेट्रो रेल के प्रस्तावित कॉरीडोर पर कार पार्किंग नहीं दिखाई गई। वेबिनार का संचालन सुशील गुप्ता ने किया। इसमें राजीव तिवारी, गोपाल खंडेलवाल, अरुण डंग, वेद मित्तल, हेमंत जैन, मुरारी लाल गोयल, सुनील सिंघल, अनिल अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
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