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दिल्ली दिखाती दरियादिली तो यूं न भटकते मजदूर...
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18एमएनपी-35-किशनी में ट्रक से उतरते मजदूर
- फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। हम सबने सुना है कि दिल्ली तो दिल वालों की है, लेकिन दिल्ली से लौटने वाले प्रवासी मजदूरों की आपबीती सुनकर शायद आप ये दोबारा सुनना पसंद नहीं करेंगे। दिल्ली ने ही अगर दरियादिली दिखाई होती तो भूखे प्यासे मजदूर चिलचिलाती धूप में भटकने को मजबूर न होते।
दिल्ली से पैदल ही बिहार के सफर पर निकले देशराज ने जब अपनी आपबीती सुनाई तो उसकी आंखें छलक उठीं। वह परिवार के साथ दिल्ली की एक लैदर फैक्टरी में काम करते थे। लॉकडाउन के बाद मालिक ने निकाल दिया और एक धेला तक नहीं दिया। जो बचा कर रखा था तो उससे किसी तरह अपना और परिवार का उसने पेट भरा, लेकिन जब जेब खाली हो गई तो सब्र जवाब दे गया और तीन दिन पहले परिवार समेत वह पैदल ही निकल पड़े। सोमवार को वह मैनपुरी से पैदल ही गुजरे, अभी बिहार तक उसे लंबा सफर तय करना था। ईशन नदी पुल पर कुछ देर आराम करने के बाद देशराज ने फिर अपने घर की राह पकड़ ली।
ऐसा ही कुछ आपबीती बस स्टैंड पहुंचे तीन भाइयों ने भी सुनाई।
बिहार के निवासी खुर्शीद आलम और आजाद तीनों दिल्ली में मजदूरी करते थे। वह कहते हैं कि लॉकडाउन के बाद उन्हें एक दिन का खाना तक नि:शुल्क नहीं मिला। बात करते करते उनका दर्द आवाज को रोकने लगा। बस इतना ही बोले कि साहब दिल्ली ने तो दिल निकाल लिया।
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मजदूरों ने डायल 112 की गाड़ी घेरी
सोमवार को सुबह सात बजे बड़ी संख्या में मजदूर शहर की सड़कों से गुजर रहे थे। इस दौरान बलिया जा रहे एक दर्जन से अधिक मजदूरों ने पुलिस की डायल 112 की एक गाड़ी को घेर लिया। उन्होंने कहा कि उनके जाने के लिए वाहन का इंतजाम कराया जाए। लेकिन पुलिस की गाड़ी उनकी कोई बिना मदद किए ही आगे बढ़ गई।
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दिल्ली से पैदल ही बिहार के सफर पर निकले देशराज ने जब अपनी आपबीती सुनाई तो उसकी आंखें छलक उठीं। वह परिवार के साथ दिल्ली की एक लैदर फैक्टरी में काम करते थे। लॉकडाउन के बाद मालिक ने निकाल दिया और एक धेला तक नहीं दिया। जो बचा कर रखा था तो उससे किसी तरह अपना और परिवार का उसने पेट भरा, लेकिन जब जेब खाली हो गई तो सब्र जवाब दे गया और तीन दिन पहले परिवार समेत वह पैदल ही निकल पड़े। सोमवार को वह मैनपुरी से पैदल ही गुजरे, अभी बिहार तक उसे लंबा सफर तय करना था। ईशन नदी पुल पर कुछ देर आराम करने के बाद देशराज ने फिर अपने घर की राह पकड़ ली।
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ऐसा ही कुछ आपबीती बस स्टैंड पहुंचे तीन भाइयों ने भी सुनाई।
बिहार के निवासी खुर्शीद आलम और आजाद तीनों दिल्ली में मजदूरी करते थे। वह कहते हैं कि लॉकडाउन के बाद उन्हें एक दिन का खाना तक नि:शुल्क नहीं मिला। बात करते करते उनका दर्द आवाज को रोकने लगा। बस इतना ही बोले कि साहब दिल्ली ने तो दिल निकाल लिया।
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मजदूरों ने डायल 112 की गाड़ी घेरी
सोमवार को सुबह सात बजे बड़ी संख्या में मजदूर शहर की सड़कों से गुजर रहे थे। इस दौरान बलिया जा रहे एक दर्जन से अधिक मजदूरों ने पुलिस की डायल 112 की एक गाड़ी को घेर लिया। उन्होंने कहा कि उनके जाने के लिए वाहन का इंतजाम कराया जाए। लेकिन पुलिस की गाड़ी उनकी कोई बिना मदद किए ही आगे बढ़ गई।