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UP: नन्हीं जान ने कितना संघर्ष किया होगा...बच्ची के कातिलों को फांसी की सजा, कोर्ट ने लिखीं ये पंक्तियां

Fri, 17 Oct 2025 01:30 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Fri, 17 Oct 2025 01:30 PM IST
सार

कोर्ट ने कहा कि विश्वास को तार-तार किया, नन्हीं जान ने कितना संघर्ष किया होगा। ये अपराध बेहद गंभीर है। जिस बच्ची को उसके माता पिता ने कभी सुई नहीं चुभने दी, उसने खुद का जीवन बचाने के लिए कितना  संघर्ष किया होगा। 

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Little Soul Fought to Survive POCSO Judge Sentences Two to Death
फांसी की सजा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

आगरा में साढ़े पांच साल की बालिका के साथ सामूहिक दुष्कर्म और फिर बेरहमी से हत्या के दो दोषियों को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है। कोर्ट ने कहा दोषियों ने नन्ही अबोध बालिका के विरुद्ध सह अभियुक्त के साथ हवस पूर्ति करते हुए जघन्य घटना को अंजाम दिया है।
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विशेष न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा कि प्रकरण में अत्यंत गंभीर और संवेदनशील तथ्य यह है कि अभियुक्त अमित वादी का रिश्तेदार था। पीड़िता अभियुक्त की पुत्री के रूप में थी। वह विश्वास के कारण ही अभियुक्त अमित के साथ गई होगी। परंतु अभियुक्त ने संबंधों की मर्यादा को लांघते हुए पीड़िता के विश्वास को तार-तार किया। नन्ही अबोध बालिका के विरुद्ध सह अभियुक्त के साथ हवस पूर्ति करते हुए जघन्य घटना को अंजाम दिया। इस नन्ही जान को उसके माता-पिता ने कभी कोई सुई भी न चुभने दी होगी, उसने स्वयं का जीवन बचाने के लिए कितना संघर्ष किया होगा। अदालत ने पंक्तियां भी लिखीं।

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यह पंक्तियां
एक बलात्कारी दिन आया, आके बीत गया।
रोया खबरें सुन-सुन कर, मन मानों रीत गया।
बच्चियों तक को नहीं बख्शा इन असुरों ने।
खुदा शायद हार गया, शैतान जीत गया।
छीन ली कुछ मासूमों की मुस्कान सदा के लिए।
ख़िलखिलाहटें थमीं और जीवन संगीत गया।


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साइकिल के साथ जुड़ी हैं मासूम की यादें, जब भी बच्चे उठाते, रो पड़ते थे परिजन
घर में बेटी की साइकिल पड़ी हुई है। घर के बच्चे जब भी साइकिल उठाते, देख कर दादा, दादी, मां रो पड़ती थीं। उन्होंने बताया कि जब बच्चे ज्यादा जिद पकड़ने लगे तो साइकिल की गद्दी निकाल कर रख दी थी। बेटी के साथ जुड़ी साइकिल की यादें परिवार के जेहन में आज भी हैं। उसकी जिद पर ही साइकिल ली गई थी। कैसे उसे साइकिल चलाना सिखाया, अपनी दादी को साइकिल पर बैठने के लिए जिद करने की बात हो या फिर कहानी सुनाने की, 6 साल के जीवन का सफर इंसाफ के साथ परिजनों को याद आ गया।

 
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