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बाढ़: उफनाई गंगा ने हाईफ्लड लेवल को किया पार, दो कच्चे बांध कटे
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गंगा में जलस्तर बढ़ जाने के बाद सोरोंजी के लहरा में आबादी के समीप भरा बाढ़ का पानी ।
- फोटो : संवाद
कासगंज। गंगा में कई दिनों से उफान बना हुआ है। पहाड़ों और मैदानी इलाकों में हो रही बारिश के कारण गंगा में उफान आ गया। यह हाईफ्लड लेवल 162.94 मीटर के निशान को पार कर चुका है। चार दिन पहले से हरिद्वार और बिजनौर के बांधों से हाईफ्लड लेवल का पानी छोड़ा गया। यह पानी जिले की सीमा में गंगा में आ गया है। इससे उफनाई गंगा ने कछला ब्रिज के हाईफ्लड लेवल के निशान को पार कर दिया है।
उफनाई गंगा की धारा ने दतलाना व कादरगंज पर दो कच्चे बांधों को काट दिया। इससे पानी का फैलाव लगातार हो रहा है। पटियाली के 15 गांव सर्वाधिक प्रभावित हैं तो जिले के अन्य 20 से अधिक गांव बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं। गंगा की बाढ़ से गंगा के तटीय इलाकों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। ग्रामीण फसलों की बर्बादी पर चिंतित हैं। सोरोंजी के लहरा की ओर से फैलता हुआ पानी लगातार दायरा बढ़ा रहा है। कई गांव बाढ़ की जद में आ गए हैं। यहां दतलाना पर एक कच्चा बांध कट गया है। दूसरे बांध पर पानी का दबाव बढ़ गया है। उढ़ेर बांध पर भी पानी लगातार बढ़ रहा है। पाठकपुर तक भी पानी की दस्तक हो गई है। वहीं, कादरगंज पर मनरेगा से बना कच्चा बांध भी दो स्थानों पर कट गया है। इससे बांध का पानी दूसरी ओर बहने लगा है। बांध की मरम्मत की कोशिशें लगातार की जा रही हैं। श्रमिक मिट्टी और रेत की बोरियां भरकर बांध की मरम्मत में जुटे हैं। उफनाती गंगा की धारा के दबाव के चलते यह कितना कारगर होगा कुछ कहा नहीं जा सकता। वहीं, पटियाली इलाके के 15 गांव की आबादी में पानी पहुंच चुका है। इन गांव में मूंजखेड़ा, नगला हंसी, नगला जयकिशन, राजेपुर कुर्रा, नगला तरसी, नगला खंदारी, नेथरा, इंद्राजसनपुर, मेहोला, नवाबगंज नगरिया, टिकुरी गठौरा, कुसौल, जिझोल, पनसोती सहित आस पास के गांव है। इन गांव में घरों में पानी भर गया है। लोगों ने गांव में ही सरक्षित स्थानों पर डेरा जमा लिया है। लोग अपने पशुओं को लेकर ऊंचाई के स्थानों पर चले गए हैं। बाढ़ का सर्वाधिक दबाव पटियाली के इलाकों में है। बाढ़ की शुरूआत के समय से ही यहां खादर में पानी भर गया था और लोग नाव व मोटर वोट के सहारे आवागमन कर रहे थे। इन ग्रामीणों की दुश्वारियां और अधिक बढ़ती जा रही हैं। जानकार बताते हैं कि अभी हाईफ्लड बाढ़ का असर दो दिन तक रहने की आशंका है। इसके बाद पानी आगे की ओर निकल जाएगा। खेतों खड़ी मक्का, बाजरा, अरबी और धान की फसलें डूबी हुई हैं। सहावर के अजीतनगर, उलाई, रफातपुर, सहवाजपुर, बमनपुरा, चकरा, नगला ढाव, नगला चोखे की आबादी भी पानी से घिरी हुई है। वहीं सहवाजपुर की सड़क तक भी बाढ़ का पानी आ गया है। रामपुर डूंगर गांव के खेतों और खादर में पानी भरा हुआ है। नगला के सोते व ताल बाढ़ के पानी से फुल हो चुके हैं। कई इलाकों में सड़कों पर पानी बह रहा है।
21 जून 2013 को रिकॉर्ड जलस्तर रहा
कासगंज। जिले में 21 जून 2013 को बाढ़ का जबरदस्त कहर आया। इसमें प्रभावित इलाके के लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। जिले में 77.81 किलोमीटर गंगा की धारा है। 21 जून 2013 को कछला ब्रिज पर अधिकत जलस्तर 164.30 के निशान पर पहुंचा था। उस समय गंगा में 5 लाख क्यूसेक से अधिक पानी बैराजों से छोड़ा गया था।
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दस वर्षों में तीसरी बार हाईफ्लड स्तर गंगा ने किया पार
कासगंज। जिले के दस वर्षों के बाढ़ के आंकड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं कि दस वर्षों में तीसरी बार गंगा का जलस्तर हाईफ्लड लेविल के स्तर 162.91 को पार कर चुका है। वर्ष 2018 में 4 अगस्त को गंगा का जलस्तर 163.20 पर पहुंचा था। वहीं 2022 में 21 अगस्त को यह जलस्तर 163 मीटर के निशान पर पहुंच गया था। इस बार फिर से गंगा का जलस्तर रविवार सुबह हाईफ्लड लेविल के 162.91 मीटर के निशान को पार कर गया।
उफनाई गंगा के निशाने पर हैं कई बांध
कासगंज। जिले में बाढ़ का प्रभाव कम करने के लिए अलग अलग बांध बनाए गए हैं। यह बांध उफनाई गंगा के निशाने पर हैं। जिसमें दतलाना बांध, उढ़ेर बांध, न्यौली तटबंध के अलावा कादरगंज, सहवाजपुर, बरीबगवास आदि के कटानरोधी कार्य हैं। वहीं समसपुर-नरदौली बांध, असदगढ़ किला-नरदौली बांध भी उफानाई गंगा के निशाने पर हैं।
जिले में बनाई गईं हैं कुल 17 बाढ़ चौकियां
कासगंज। बाढ़ आपदा के चलते जिला प्रशासन ने पूरे जिले में प्रभावित इलाके लोगों को राहत देने के उद्देश्य से 17 बाढ़ चौकियां बनाई हैं। इसमें सर्वाधिक 9 बाढ़ चौकियां पटियाली तहसील में बनाई गई हैं। कासगंज तहसील में 6 बाढ़ चौकियां बनाई गई हैं। जबकि दो बाढ़ चौकियां सहावर तहसील में बनाई गई हैं।
कांवड़ियों को हो रहीं दिक्कतें
कासगंज। लहरा गंगाघाट पर गंगा का उफान कांवड़ियों को परेशान कर रहा है। गंगाघाट पर कांवड़ भरने पहुंच रहे कांवड़िये लहरा की सड़क तक तलहटी में पहुंचे गंगा के जल में ही कांवड़ भर रहे हैं। लहरा में पानी के बीच में ही कांवड़ की दुकानें सजी हुई हैं। गंगा के उफान से कांवड़ दुकानदारों व कांवड़ियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सोरोंजी कोतवाली पुलिस भी सतर्क है। वह लगातार लहरा पर निगरानी बनाए हुए है।
कादरगंज श्मशान तक बाढ़ के पानी की दस्तक
गंजडुंडवारा। कादरगंज इलाके में लगातार बाढ़ के पानी की प्रभाव है। कादरगंज के श्मशान स्थल तक गंगा की बाढ़ का पानी पहुंच गया है। इससे लोगों को श्मशान स्थल तक जाने में दिक्कतें होंगी। श्मशान तक जाने के दो रास्ते हैं दोनों ही बंद हो गए हैं।
खेतों में पानी भरने पर किसानों ने तोड़े भुट्टे
कासगंज। सहावर इलाके के नगला चोखे में कई किसानों के खेतों में बाढ़ का पानी काफी भर गया। इससे खेतों में फसल पर लगे भुट्टे किसानों ने तोड़ लिए और बैलगाड़ी के माध्यम से बाहर निकालकर लाए। नगला चोखे में बाढ़ के पानी के बीच किसान बैलगाड़ी में लादकर फसल ले जाता नजर आया।
बैराजों से पानी का प्रवाह-
हरिद्वार बैराज से- 95557 क्यूसेक
बिजनौर बैराज से- 129731 क्यूसेक
नरौरा बैराज से- 305041 क्यूसेक
कछला ब्रिज- 162.94 मीटर के निशान पर
बाढ़ का लेवल-
डेंजर लेवल- 162.40 मीटर के निशान पर
हाईफ्लड लेवल- 162.91 मीटर के निशान पर
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उफनाई गंगा की धारा ने दतलाना व कादरगंज पर दो कच्चे बांधों को काट दिया। इससे पानी का फैलाव लगातार हो रहा है। पटियाली के 15 गांव सर्वाधिक प्रभावित हैं तो जिले के अन्य 20 से अधिक गांव बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं। गंगा की बाढ़ से गंगा के तटीय इलाकों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। ग्रामीण फसलों की बर्बादी पर चिंतित हैं। सोरोंजी के लहरा की ओर से फैलता हुआ पानी लगातार दायरा बढ़ा रहा है। कई गांव बाढ़ की जद में आ गए हैं। यहां दतलाना पर एक कच्चा बांध कट गया है। दूसरे बांध पर पानी का दबाव बढ़ गया है। उढ़ेर बांध पर भी पानी लगातार बढ़ रहा है। पाठकपुर तक भी पानी की दस्तक हो गई है। वहीं, कादरगंज पर मनरेगा से बना कच्चा बांध भी दो स्थानों पर कट गया है। इससे बांध का पानी दूसरी ओर बहने लगा है। बांध की मरम्मत की कोशिशें लगातार की जा रही हैं। श्रमिक मिट्टी और रेत की बोरियां भरकर बांध की मरम्मत में जुटे हैं। उफनाती गंगा की धारा के दबाव के चलते यह कितना कारगर होगा कुछ कहा नहीं जा सकता। वहीं, पटियाली इलाके के 15 गांव की आबादी में पानी पहुंच चुका है। इन गांव में मूंजखेड़ा, नगला हंसी, नगला जयकिशन, राजेपुर कुर्रा, नगला तरसी, नगला खंदारी, नेथरा, इंद्राजसनपुर, मेहोला, नवाबगंज नगरिया, टिकुरी गठौरा, कुसौल, जिझोल, पनसोती सहित आस पास के गांव है। इन गांव में घरों में पानी भर गया है। लोगों ने गांव में ही सरक्षित स्थानों पर डेरा जमा लिया है। लोग अपने पशुओं को लेकर ऊंचाई के स्थानों पर चले गए हैं। बाढ़ का सर्वाधिक दबाव पटियाली के इलाकों में है। बाढ़ की शुरूआत के समय से ही यहां खादर में पानी भर गया था और लोग नाव व मोटर वोट के सहारे आवागमन कर रहे थे। इन ग्रामीणों की दुश्वारियां और अधिक बढ़ती जा रही हैं। जानकार बताते हैं कि अभी हाईफ्लड बाढ़ का असर दो दिन तक रहने की आशंका है। इसके बाद पानी आगे की ओर निकल जाएगा। खेतों खड़ी मक्का, बाजरा, अरबी और धान की फसलें डूबी हुई हैं। सहावर के अजीतनगर, उलाई, रफातपुर, सहवाजपुर, बमनपुरा, चकरा, नगला ढाव, नगला चोखे की आबादी भी पानी से घिरी हुई है। वहीं सहवाजपुर की सड़क तक भी बाढ़ का पानी आ गया है। रामपुर डूंगर गांव के खेतों और खादर में पानी भरा हुआ है। नगला के सोते व ताल बाढ़ के पानी से फुल हो चुके हैं। कई इलाकों में सड़कों पर पानी बह रहा है।
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21 जून 2013 को रिकॉर्ड जलस्तर रहा
कासगंज। जिले में 21 जून 2013 को बाढ़ का जबरदस्त कहर आया। इसमें प्रभावित इलाके के लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। जिले में 77.81 किलोमीटर गंगा की धारा है। 21 जून 2013 को कछला ब्रिज पर अधिकत जलस्तर 164.30 के निशान पर पहुंचा था। उस समय गंगा में 5 लाख क्यूसेक से अधिक पानी बैराजों से छोड़ा गया था।
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दस वर्षों में तीसरी बार हाईफ्लड स्तर गंगा ने किया पार
कासगंज। जिले के दस वर्षों के बाढ़ के आंकड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं कि दस वर्षों में तीसरी बार गंगा का जलस्तर हाईफ्लड लेविल के स्तर 162.91 को पार कर चुका है। वर्ष 2018 में 4 अगस्त को गंगा का जलस्तर 163.20 पर पहुंचा था। वहीं 2022 में 21 अगस्त को यह जलस्तर 163 मीटर के निशान पर पहुंच गया था। इस बार फिर से गंगा का जलस्तर रविवार सुबह हाईफ्लड लेविल के 162.91 मीटर के निशान को पार कर गया।
उफनाई गंगा के निशाने पर हैं कई बांध
कासगंज। जिले में बाढ़ का प्रभाव कम करने के लिए अलग अलग बांध बनाए गए हैं। यह बांध उफनाई गंगा के निशाने पर हैं। जिसमें दतलाना बांध, उढ़ेर बांध, न्यौली तटबंध के अलावा कादरगंज, सहवाजपुर, बरीबगवास आदि के कटानरोधी कार्य हैं। वहीं समसपुर-नरदौली बांध, असदगढ़ किला-नरदौली बांध भी उफानाई गंगा के निशाने पर हैं।
जिले में बनाई गईं हैं कुल 17 बाढ़ चौकियां
कासगंज। बाढ़ आपदा के चलते जिला प्रशासन ने पूरे जिले में प्रभावित इलाके लोगों को राहत देने के उद्देश्य से 17 बाढ़ चौकियां बनाई हैं। इसमें सर्वाधिक 9 बाढ़ चौकियां पटियाली तहसील में बनाई गई हैं। कासगंज तहसील में 6 बाढ़ चौकियां बनाई गई हैं। जबकि दो बाढ़ चौकियां सहावर तहसील में बनाई गई हैं।
कांवड़ियों को हो रहीं दिक्कतें
कासगंज। लहरा गंगाघाट पर गंगा का उफान कांवड़ियों को परेशान कर रहा है। गंगाघाट पर कांवड़ भरने पहुंच रहे कांवड़िये लहरा की सड़क तक तलहटी में पहुंचे गंगा के जल में ही कांवड़ भर रहे हैं। लहरा में पानी के बीच में ही कांवड़ की दुकानें सजी हुई हैं। गंगा के उफान से कांवड़ दुकानदारों व कांवड़ियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सोरोंजी कोतवाली पुलिस भी सतर्क है। वह लगातार लहरा पर निगरानी बनाए हुए है।
कादरगंज श्मशान तक बाढ़ के पानी की दस्तक
गंजडुंडवारा। कादरगंज इलाके में लगातार बाढ़ के पानी की प्रभाव है। कादरगंज के श्मशान स्थल तक गंगा की बाढ़ का पानी पहुंच गया है। इससे लोगों को श्मशान स्थल तक जाने में दिक्कतें होंगी। श्मशान तक जाने के दो रास्ते हैं दोनों ही बंद हो गए हैं।
खेतों में पानी भरने पर किसानों ने तोड़े भुट्टे
कासगंज। सहावर इलाके के नगला चोखे में कई किसानों के खेतों में बाढ़ का पानी काफी भर गया। इससे खेतों में फसल पर लगे भुट्टे किसानों ने तोड़ लिए और बैलगाड़ी के माध्यम से बाहर निकालकर लाए। नगला चोखे में बाढ़ के पानी के बीच किसान बैलगाड़ी में लादकर फसल ले जाता नजर आया।
बैराजों से पानी का प्रवाह-
हरिद्वार बैराज से- 95557 क्यूसेक
बिजनौर बैराज से- 129731 क्यूसेक
नरौरा बैराज से- 305041 क्यूसेक
कछला ब्रिज- 162.94 मीटर के निशान पर
बाढ़ का लेवल-
डेंजर लेवल- 162.40 मीटर के निशान पर
हाईफ्लड लेवल- 162.91 मीटर के निशान पर