जगनेर कांड: तीन दिन में नहीं हुई गिरफ्तारी, आईपीएल सट्टे के शक में पुलिस ने उठाया था पति, पत्नी सदमे से मर गई
आगरा पुलिस ने आईपीएल सट्टे के शक में युवक को उठाया था। उसके घर में फोन किया। पत्नी ने फोन उठाया तो बताया कि पति मर गया। पत्नी ने यह सुना तो वह सदमे में आ गई। उसे कुछ नहीं सूझा और उसने जहर खाकर जीवनलीला समाप्त कर ली। इसके बाद भी सभी पुलिसकर्मियों को आसानी से बचा लिया गया।
विस्तार
आगरा के जगनेर के गांव नौनी में महिला की आत्महत्या के मामले में तीन दिन बाद भी मुकदमे में पुलिसकर्मियों के नाम बढ़े न नामजदों की गिरफ्तारी हुई है। इससे ग्रामीणों में आक्रोश है। उनका कहना है कि चौकी के दरोगा के कहने पर पुलिसकर्मियों ने गुर्गे से फोन करा रकम मांगी थी। मनोज के एनकाउंटर में मारे जाने के बारे में बताया था। लेकिन, मुकदमे में तहरीर बदलवा कर सिर्फ गुर्गों के नाम लिखवाए गए।
जगनेर के नौनी गांव निवासी मनोज शर्मा को आईपीएल का सट्टा खेलने के शक में पुलिस ने उठाया था। आरोप है कि सरेंधी चौकी में ले जाकर थर्ड डिग्री दी थी। मनोज को पकड़वाने में पुलिस का गुर्गा रवि पचौरी भी शामिल था। उसने मनोज की पत्नी अनीता को फोन किया था। एनकाउंटर में मनोज के मरने की बात कही थी। इससे सदमे में आई अनीता ने घर में खुदकुशी कर ली थी। मामले की जानकारी के बाद मनोज को पुलिस ने छोड़ दिया था। मामले में अपहरण, आत्महत्या के लिए प्रेरित करने सहित अन्य धारा में काकी परमार और रवि पचौरी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था।
पुलिसकर्मियों और चौकी तक का नाम नहीं था। परिवार का आरोप है कि पुलिस ने चार बार तहरीर बदलवा दी, जिससे पुलिसकर्मियों के नाम नहीं लिखे गए। मामले में जांच के बाद दरोगा इजहार अहमद, आरक्षी कुलदीप कुमार, सागर चौधरी और नीरज कुमार को निलंबित किया गया।
परिवार के लोगों में आक्रोश है। उनका कहना है कि पहले तहरीर बदलवाकर पुलिसकर्मियों के नाम हटवा दिए गए। अब नामजद आरोपियों को भी नहीं पकड़ा गया है। मनोज ने आरोप लगाया कि चौकी के दरोगा को मामले की जानकारी थी। उनसे बातचीत के बाद ही सिपाहियों ने दो लाख रुपये मांगे थे। तीन साल के लिए जेल भेजने की धमकी दी थी। पुलिसकर्मी गुर्गों की बात मानते रहे। वह सट्टा नहीं खेलता है। इसके बावजूद किसी ने सुनी नहीं। बाद में दरोगा आए। उन्हें न्याय चाहिए। आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाए। एसीपी खेरागढ़ महेश कुमार ने बताया कि तीन टीम नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगी हैं। विवेचना जारी है।
ये भी पढ़ें - UP: रिजवान-शानू को फंसाने के लिए साजिश, हिंदू महासभा के पदाधिकारियों ने कराई गौकशी और पहुंचे थाने; हुआ खुलासा
दो बच्चों की जिम्मेदारी
मनोज का परिवार काफी गरीब है। वह मलपुरा स्थित एक कोल्ड स्टोर में काम करते हैं। माता-पिता की मौत हो चुकी है। चाचा के साथ रहते हैं। पत्नी की मौत हो गई। दो बच्चे हैं, जिनकी जिम्मेदारी मनोज पर हैं। उधर, बृहस्पतिवार को भी मनोज के घर पर लोगों का आना जाना लगा रहा। लोग पुलिस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं।
सवाल : क्यों हो रही लापरवाही
- चौकी में थर्ड डिग्री दी गई थी। चौकी के तीन सिपाही और दरोगा निलंबित हुए। फिर नाम क्यों नहीं बढ़ाए जा रहे?
- पीड़ित कह रहा है कि चौकी में दो लाख रुपये की मांग के लिए सिपाहियों ने फोन कराया? फिर आरोपी क्यों नहीं?
- मनोज का पहले से कोई आपराधिक इतिहास नहीं है तो फिर पुलिस ने क्यों उठाया? उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ क्या?
नहीं आए संगठन के पदाधिकारी
बुधवार को एक संगठन के पदाधिकारियों का मैसेज सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। उन्होंने कहा था कि पीड़ित परिवार से मिलकर प्रदर्शन करेंगे। इसकी जानकारी पुलिस को हो गई थी। बृहस्पतिवार को संगठन के पदाधिकारी नहीं पहुंचे। चर्चा रही कि पुलिस ने संगठन के पदाधिकारियों पर दबाव बनाया। इसके बाद कोई नहीं आया।