{"_id":"65fd43116a20153cac066ce9","slug":"india-first-women-pm-how-did-gungi-gudiya-indira-gandhi-become-iron-lady-2024-03-22","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"पुराने पन्नों से: 'गूंगी गुड़िया' इंदिरा गांधी कैसे बनीं आयरन लेडी? नेहरू ने इस तरह तैयार की थी सियासी पिच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पुराने पन्नों से: 'गूंगी गुड़िया' इंदिरा गांधी कैसे बनीं आयरन लेडी? नेहरू ने इस तरह तैयार की थी सियासी पिच
Fri, 22 Mar 2024 02:07 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
संजीव सिंह, आगरा
संजीव सिंह, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Fri, 22 Mar 2024 02:07 PM IST
सार
भारत की 'आयरन लेडी' कहने जानी वाली सियासत की माहिर इंदिरा गांधी का राजनीतिक सफर बेहद दिलचस्प रहा है। राजनीति में इंदिरा के विरोधी भी कम नहीं थे। उनका उपहास भी उड़ाया जाता था। समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया ने उन्हें गूंगी गुड़िया तक
विज्ञापन
इंदिरा गांधी
- फोटो : SOCIAL MEDIA
विस्तार
प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने 1961 में ही बेटी इंदिरा गांधी को राजनीतिक उत्तराधिकारी बनाने का मन बना लिया था। उन्होंने 1962 के तीसरे आम चुनाव के प्रचार में अपनी सक्रियता कम कर ली और पार्टी के बड़े नेताओं के साथ यह जिम्मेदारी इंदिरा गांधी को सौंप दी। नेहरू के निधन के बाद 1964 में इंदिरा पहली बार राज्यसभा के लिए चुनी गईं।
अमर उजाला के 3 फरवरी, 1961 के अंक में प्रकाशित समाचार के अनुसार, नेहरू ने अपनी भूमिकर सीमित कर इंदिरा गांधी को आगे किया था। उन्होंने पार्टी से कहा था कि वह ज्यादा चुनाव प्रचार नहीं करेंगे। उन्हें केवल कुछ चुनाव क्षेत्रों तक सीमित रखा जाए। इसकी वजह यह थी कि वह ज्यादा से ज्यादा अवसर इंदिरा को देना चाहते थे, जिससे कि भविष्य में नेहरू परिवार की विरासत को आगे बढ़ा सकें।
विज्ञापन
अमर उजाला के 3 फरवरी, 1961 के अंक में प्रकाशित समाचार के अनुसार, नेहरू ने अपनी भूमिकर सीमित कर इंदिरा गांधी को आगे किया था। उन्होंने पार्टी से कहा था कि वह ज्यादा चुनाव प्रचार नहीं करेंगे। उन्हें केवल कुछ चुनाव क्षेत्रों तक सीमित रखा जाए। इसकी वजह यह थी कि वह ज्यादा से ज्यादा अवसर इंदिरा को देना चाहते थे, जिससे कि भविष्य में नेहरू परिवार की विरासत को आगे बढ़ा सकें।
विज्ञापन
सौंपी गई थी ये बड़ी जिम्मेदारी
इंदिरा गांधी को लाल बहादुर शास्त्री और जगजीवन राम जैसे नेताओं के साथ चुनाव में प्रचार की जिम्मेदारी सौंपी गई। उस समय 23 करोड़ मतदाता थे। इस चुनाव में कांग्रेस ने शानदार जीत हासिल की। उसने 494 सीटों में से 361 सीटें जीतीं। हालांकि इंदिरा गांधी की राजनीति में दिलचस्पी शुरू से थी। 1959 और 1960 के दौरान वह कांग्रेस की अध्यक्ष भी रहीं।
ये भी पढ़ें - पुराने पन्नों से: इंदिरा पर लगा था सरकारी धन के दुरुपयोग और तानाशाही तरीके से काम करने का आरोप
इंदिरा गांधी को लाल बहादुर शास्त्री और जगजीवन राम जैसे नेताओं के साथ चुनाव में प्रचार की जिम्मेदारी सौंपी गई। उस समय 23 करोड़ मतदाता थे। इस चुनाव में कांग्रेस ने शानदार जीत हासिल की। उसने 494 सीटों में से 361 सीटें जीतीं। हालांकि इंदिरा गांधी की राजनीति में दिलचस्पी शुरू से थी। 1959 और 1960 के दौरान वह कांग्रेस की अध्यक्ष भी रहीं।
ये भी पढ़ें - पुराने पन्नों से: इंदिरा पर लगा था सरकारी धन के दुरुपयोग और तानाशाही तरीके से काम करने का आरोप
विज्ञापन
गूंगी गुड़िया से आयरन लेडी तक का सफर
राजनीति में इंदिरा के विरोधी भी कम नहीं थे। उनका उपहास भी उड़ाया जाता था। समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया ने उन्हें गूंगी गुड़िया तक कहा। लाल बहादुर शास्त्री के निधन के बाद यही इंदिरा गांधी 1966 में देश की प्रधानमंत्री बनीं। पाकिस्तान के दो टुकड़े कर बांग्लादेश बनाने में अहम भूमिक निभाई। भारत रत्न इंदिरा गांधी को बाद में आयरन लेडी का खिताब भी िमला। यह टाइटल नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अमेरिकी राजनयिक हेनरी किसिंजर ने उन्हें दिया था।
राजनीति में इंदिरा के विरोधी भी कम नहीं थे। उनका उपहास भी उड़ाया जाता था। समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया ने उन्हें गूंगी गुड़िया तक कहा। लाल बहादुर शास्त्री के निधन के बाद यही इंदिरा गांधी 1966 में देश की प्रधानमंत्री बनीं। पाकिस्तान के दो टुकड़े कर बांग्लादेश बनाने में अहम भूमिक निभाई। भारत रत्न इंदिरा गांधी को बाद में आयरन लेडी का खिताब भी िमला। यह टाइटल नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अमेरिकी राजनयिक हेनरी किसिंजर ने उन्हें दिया था।