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आगरा: जमीन बेचने का झांसा देकर ठगी करता था गैंग, तीन गिरफ्तार, व्यापारी से ठगे दस लाख रुपये
Tue, 23 Nov 2021 12:17 AM IST
Abhishek Saxena
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Tue, 23 Nov 2021 12:17 AM IST
सार
रुनकता के व्यापारी से 96.60 लाख में सौदा कर एडवांस में लिए थे दस लाख रुपये, तैयार करते थे फर्जी दस्तावेज
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जानकारी देते एसपी सिटी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आगरा में सिकंदरा पुलिस ने दूसरे की जमीन अपनी बताकर लाखों रुपये की धोखाधड़ी करने वाले गैंग का पर्दाफाश कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी अपने नाम बदलकर जमीन का सौदा करते थे। एडवांस में रकम लेकर फरार हो जाते थे। आरोपियों में दो मुरादाबाद और एक दिल्ली का रहने वाला है।
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स्वाट टीम को लगाया
एसपी सिटी विकास कुमार ने बताया कि किसी और की जमीन अपनी बताकर लोगों को बेचने के नाम पर लाखों रुपये ऐंठने वाले गैंग की धरपकड़ के लिए एएसपी लखन कुमार के नेतृत्व में स्वाट टीम को लगाया गया था। सोमवार को मुखबिर की सूचना पर सब्जी मंडी स्थित पुल के नीचे से तीन आरोपियों को पकड़ लिया। इनमें मुरादाबाद निवासी किशोर कुमार, नाजिम हुसैन और पश्चिम दिल्ली निवासी अजय कुमार हैं।
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फर्जी कागज कराते थे तैयार
किशोर कुमार ठगी करने के दौरान अपना नाम राजपाल, अजय अभिषेक और नाजिम राकेश कुमार बताता था। उनके पास से फर्जी आधार कार्ड, फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस और कूटरचित जमीन के कागजात बरामद हुए। पुलिस अब यह पता कर रही है कि आरोपियों ने कितने जिलों में इसी तरह वारदात की हैं। गिरफ्तार आरोपियों ने बिजनौर में भी धोखाधड़ी की थी। कासगंज में भी एक व्यक्ति से ठगी करने वाले थे। मगर, उससे पहले ही पकड़ लिए गए।
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बंद कर लिए थे मोबाइल नंबर
गैंग ने रुनकता में गायत्री फर्नीचर एंड इलेक्ट्रिक के नाम से शोरूम चलाने वाले डालचंद दीक्षित से धोखाधड़ी की थी। उनके शोरूम पर राजपाल सिंह आता था। 16 सितंबर को वो तीन साथियों के साथ आया। तीनों ने अपने नाम राकेश कुमार, अभिषेक और नवीन बताए। चारों ने मथुरा के छाता में 27 बीघा परगना जमीन 96.60 लाख में बेचने की बात कही। राजपाल सिंह ने अपनी आईडी और आधार कार्ड दिखाया। आनलाइन भी जमीन का विवरण दिखा दिया।
जमीन पसंद आने पर डालचंद ने दो दिन बाद उन्हें दस लाख रुपये एडवांस में देकर इकरारनामा करा लिया। आठ नवंबर तक जमीन का बैनामा करने की बात कही। 10 दिन बाद उनके पास नवीन ने फोन किया। कहा कि आठ लाख रुपये और चाहिए। इस पर उन्हें शक हो गया। वह जमीन देखने खेड़ी कलां, फरीदाबाद, हरियाणा गए। क्षेत्र के लोगों ने बताया कि जमीन राजपाल की है। मगर, जिस राजपाल ने सौदा किया है वह फर्जी तरीकेसे अपनी जमीन बताकर धोखाधड़ी करता है। पहले भी इसी तरह रकम ले चुका है। पीड़ितों को झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देकर चुप करा देते हैं। बाद में आरोपियों ने अपने मोबाइल नंबर भी बंद कर लिए।
यह है तरीका
एसपी सिटी ने बताया कि आरोपी ऑनलाइन किसी जमीन के दस्तावेज निकालते हैं। जमीन जिसके नाम पर होती है, उसी नाम से आईडी प्रूफ भी तैयार कर लेते हैं। जिस व्यापारी को शिकार बनाना होता है, उसे एकांत स्थान पर बुलाया जाता है। फर्जी आईडी प्रूफ जिस नाम से होते हैं, उसी नाम से एक व्यक्ति किसान बनकर अपना परिचय देता है। ऐसे जाहिर करते हैं, जैसे की वो बहुत पैसे वाले हैं। जमीन की कीमत भी कम बताते हैं, जिससे लोग झांसे में आ जाते हैं। एडवांस के रूप में रकम लेने के बाद मोबाइल नंबर बंद कर लेते हैं। आरोपी पुलिस के पास जाने की कहता है तो झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देकर चुप कर देते हैं।
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गैंग ने रुनकता में गायत्री फर्नीचर एंड इलेक्ट्रिक के नाम से शोरूम चलाने वाले डालचंद दीक्षित से धोखाधड़ी की थी। उनके शोरूम पर राजपाल सिंह आता था। 16 सितंबर को वो तीन साथियों के साथ आया। तीनों ने अपने नाम राकेश कुमार, अभिषेक और नवीन बताए। चारों ने मथुरा के छाता में 27 बीघा परगना जमीन 96.60 लाख में बेचने की बात कही। राजपाल सिंह ने अपनी आईडी और आधार कार्ड दिखाया। आनलाइन भी जमीन का विवरण दिखा दिया।
जमीन पसंद आने पर डालचंद ने दो दिन बाद उन्हें दस लाख रुपये एडवांस में देकर इकरारनामा करा लिया। आठ नवंबर तक जमीन का बैनामा करने की बात कही। 10 दिन बाद उनके पास नवीन ने फोन किया। कहा कि आठ लाख रुपये और चाहिए। इस पर उन्हें शक हो गया। वह जमीन देखने खेड़ी कलां, फरीदाबाद, हरियाणा गए। क्षेत्र के लोगों ने बताया कि जमीन राजपाल की है। मगर, जिस राजपाल ने सौदा किया है वह फर्जी तरीकेसे अपनी जमीन बताकर धोखाधड़ी करता है। पहले भी इसी तरह रकम ले चुका है। पीड़ितों को झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देकर चुप करा देते हैं। बाद में आरोपियों ने अपने मोबाइल नंबर भी बंद कर लिए।
यह है तरीका
एसपी सिटी ने बताया कि आरोपी ऑनलाइन किसी जमीन के दस्तावेज निकालते हैं। जमीन जिसके नाम पर होती है, उसी नाम से आईडी प्रूफ भी तैयार कर लेते हैं। जिस व्यापारी को शिकार बनाना होता है, उसे एकांत स्थान पर बुलाया जाता है। फर्जी आईडी प्रूफ जिस नाम से होते हैं, उसी नाम से एक व्यक्ति किसान बनकर अपना परिचय देता है। ऐसे जाहिर करते हैं, जैसे की वो बहुत पैसे वाले हैं। जमीन की कीमत भी कम बताते हैं, जिससे लोग झांसे में आ जाते हैं। एडवांस के रूप में रकम लेने के बाद मोबाइल नंबर बंद कर लेते हैं। आरोपी पुलिस के पास जाने की कहता है तो झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देकर चुप कर देते हैं।
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