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अमर उजाला स्थापना दिवस विशेष: 1857 के गदर ने बिगाड़ दिया था अंग्रेज अफसरों का मानसिक संतुलन, तब हुई मानसिक स्वास्थ्य संस्थान की स्थापना

Mon, 18 Apr 2022 03:25 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Mon, 18 Apr 2022 03:25 PM IST
सार

1857 के गदर के दौरान अंग्रेजों के खिलाफ शुरू हुए विद्रोह ने अंग्रेज अफसरों की नींद उड़ा दी थी। इससे अंग्रेज अफसर तनाव में आ गए। उनका मानसिक संतुलन बिगड़ा तो इंग्लैंड की रानी विक्टोरिया के निर्देश पर आगरा में 1859 में मानसिक स्वास्थ्य संस्थान खोला गया।

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gadar of 1857 disturbed mental balance of British officers then establishment of Mental Health Institute in Agra
मानसिक स्वास्थ्य संस्थान, आगरा

विस्तार

देश की आजादी के लिए शुरू हुए 1857 के गदर से आगरा का भी नाता है। जब 1857 की क्रांति की चिंगारी पूरे देश में फैल गई तो इससे अंग्रेजों की नींद उड़ गई। लंबे समय तक तनाव से अंग्रेज अफसर और सैनिकों का मानसिक संतुलन बिगड़ गया था। मामले अधिक आने पर इंग्लैंड की रानी विक्टोरिया के निर्देश पर आगरा में दो साल बाद मानसिक स्वास्थ्य संस्थान खोला गया। शुरूआत में अंग्रेजों का ही इलाज होता था।

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संस्थान के प्रमुख अधीक्षक डॉ. दिनेश राठौर ने बताया कि 1857 में झांसी में रानी लक्ष्मीबाई और मेरठ में मंगल पांडे ने अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह कर दिया। इससे बचने के लिए अंग्रेज अफसर अपने परिवारों के साथ आगरा में सुरक्षित स्थानों पर ठहरे। सबसे ज्यादा प्रभाव उस वक्त यूनाइटेड प्रोविंस के लेफ्टिनेंट गवर्नर केल्विन के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ा और वह मानसिक संतुलन खो बैठे। स्वतंत्रता के पहली क्रांति ठंडी पड़ने के बाद इंग्लैंड की रानी विक्टोरिया ने ईस्ट इंडिया कंपनी से भारत की सत्ता अपने हाथ में ली और क्रांति की समीक्षा भी की। इसमें राज्य के गवर्नर समेत तमाम अंग्रेज अफसर-सैनिकों के मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ने की जानकारी उनके सामने आई। इनके इलाज के लिए नौ अक्तूबर 1859 को आगरा में मानसिक स्वास्थ्य संस्थान खोला गया।

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वर्ष 1938 में पहली बार भारतीय डॉक्टर बने निदेशक 

मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के पहले प्रथम भारतीय चिकित्सक डॉ. केसी दुबे चिकित्सा अधीक्षक बनाए गए। इन्होंने इंग्लैंड में शिक्षा प्राप्त की थी और रॉयल आर्मी में अपनी सेवाएं दे रहे थे। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 1965 से 1972 तक संस्थान को मनोचिकित्सा के विषय में शोध संस्थान के तौर पर विकसित किया। उस वक्त दुनिया में नौ केंद्र थे, जिसमें इकलौता भारतीय संस्थान था। डॉ. दुबे के कार्यकाल में ही एमडी साइकेट्री का प्रशिक्षण शुरू कराया। 

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वर्ष 1942 में विद्युत तरंगों से होता था इलाज 

मानसिक रोगियों के इलाज के लिए विद्युत तरंगों का उपयोग किया जाता था। इस पद्धति का आविष्कार 1938 में फ्रांस में हुआ था। आगरा के मानसिक अस्पताल में पहली बार 1942 में विद्युत तरंगों से मरीज का उपचार किया जाता था। मानसिक रोगियों के लिए पहली बार औषधि 1950 में आई। बीते 20 साल से विद्युत तरंगों से इलाज में तकनीकी बदलाव हुए, अब पुरानी पद्धति से विद्युत तरंगों से इलाज नहीं दिया जाता।

172 एकड़ जमीन पर बना है संस्थान

5000मरीज हर माह ओपीडी में इलाज पाते
838 बेड की क्षमता है अस्पताल में
400 मरीज औसतन रहते हैं भर्ती

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