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गांधी शिल्प मेला: नारियल के खोल से सजावट, कबाड़ से पेंटिंग; मधुबनी के प्राकृतिक रंगों ने मोह लिया मन

Tue, 22 Sep 2026 10:40 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Tue, 22 Sep 2026 10:40 AM IST
सार

आगरा के सदर स्थित गांधी शिल्प मेले में देशभर के शिल्पकारों ने अनूठी कला और हस्तशिल्प का प्रदर्शन किया है। कबाड़ से बनी पेंटिंग, नारियल के खोल से सजावटी सामान और फूलों से तैयार प्राकृतिक रंगों वाली मधुबनी पेंटिंग दर्शकों को आकर्षित कर रही हैं।
 

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Agra Gandhi Craft Fair Showcases Unique Handicrafts from Across India
नारियल के खोल से अनूठी सजावट - फोटो : अमर उजाला
आगरा के सदर स्थित गांधी शिल्प मेले में देशभर के शिल्पकार हुनर और परंपरागत कला लेकर पहुंचे हैं। यहां नारियल खोल से बने सजावटी सामान से लेकर वेस्ट मैटेरियल से तैयार पेंटिंग, टेराकोटा और कंक्रीट से बनी मूर्तियां और मधुबनी पेंटिंग लोगों का ध्यान खींच रही हैं। शिल्पकार अपने हुनर में अनूठे प्रयोगों से उत्पादों को आकर्षक बना रहे हैं।

 
Agra Gandhi Craft Fair Showcases Unique Handicrafts from Across India
पेटिंग - फोटो : अमर उजाला
ललित कला संस्थान के बीएफए थर्ड ईयर के छात्र विशाल वेस्ट मटेरियल को कला का रूप दे रहे हैं। बेकार सामग्री से पेंटिंग और स्ट्रक्चर तैयार किए गए हैं। टेराकोटा, कंक्रीट और मिट्टी से भी मूर्तियां और स्ट्रक्चर बनाए हैं। उनकी कलाकृतियां 200 रुपये से शुरू हैं। दरभंगा से आए शिल्पकारों की बारीक कारीगरी वाली कलाकृतियां भी मेले में आकर्षण का केंद्र हैं। इनकी कीमत 50 हजार रुपये तक है।

 
Agra Gandhi Craft Fair Showcases Unique Handicrafts from Across India
गांधी मेला - फोटो : अमर उजाला
नारियल के खोल से अनूठी सजावट
केरल की रहने वाली सिनोज नारियल के खोल से अलग-अलग उपयोगी व सजावटी सामान तैयार कर रही हैं। अगरबत्ती स्टैंड, चम्मच, ज्वेलरी और डेकोरेशन आइटम बनाए जा रहे हैं। नारियल के खोल को बेकार नहीं जाने दिया जाता। उसे तराशकर सजावटी और उपयोगी वस्तुओं का रूप दिया जाता है। उनका कहना है कि नारियल से जुड़ी सामग्री को नए तरीके से इस्तेमाल करने का शौक उन्हें लंबे समय से है और अब वह इसी कला के जरिए नए उत्पाद तैयार कर रही हैं।

 
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फूलों से तैयार होते हैं मधुबनी के रंग - फोटो : अमर उजाला
फूलों से तैयार होते हैं मधुबनी के रंग
बिहार के संजीव कुमार अपने परिवार की पीढ़ियों से चली आ रही मधुबनी पेंटिंग की कला को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनका पूरा परिवार इस कला से जुड़ा है। पेंटिंग में प्रयोग होने वाले रंग प्राकृतिक तरीके से फूलों से तैयार किए जाते हैं।
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गांधी मेला - फोटो : अमर उजाला
उनके पिता उत्तर प्रसाद पासवान को 2014 में राष्ट्रीय स्तर का पुरस्कार मिल चुका है, जबकि उनकी मां को राज्य स्तर का पुरस्कार मिला है।
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