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माैत के बाद अंतिम संस्कार बना चुनाैती: बारिश में किया घंटों इंतजार, तिरपाल लगाकर जलानी पड़ी चिता
Sun, 06 Sep 2026 06:06 PM IST
Arun Parashar
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: Arun Parashar
Updated Sun, 06 Sep 2026 06:06 PM IST
सार
ग्रामीणों का कहना है कि डाबर गांव की आबादी करीब सात-आठ हजार है। गांव में दो श्मशान घाट होने के बावजूद किसी भी स्थान पर बारिश से बचाव के लिए शेड की व्यवस्था नहीं है।
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तिरपाल लगाकर किया अंतिम संस्कार।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
आगरा के फतेहपुर सीकरी के ग्राम डाबर में श्मशान घाट पर शेड की व्यवस्था नहीं होने के कारण रविवार को बारिश के बीच तिरपाल लगाकर साहब सिंह पुत्र रामशरन का अंतिम संस्कार किया गया। लगातार हो रही बारिश के चलते परिजनों और ग्रामीणों को अंतिम संस्कार की तैयारियों में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
गांव निवासी साहब सिंह का शनिवार शाम निधन हो गया था। रविवार दोपहर 12 बजे तक बारिश के कारण अंतिम संस्कार नहीं हो सका। इसके बाद ग्रामीणों ने श्मशान घाट में तिरपाल लगाकर चिता तैयार की और बारिश से बचाव के बीच अंतिम संस्कार कराया। ग्रामीणों का कहना है कि डाबर गांव की आबादी करीब सात-आठ हजार है। गांव में दो श्मशान घाट होने के बावजूद किसी भी स्थान पर बारिश से बचाव के लिए शेड की व्यवस्था नहीं है।
बरसात के मौसम में अंतिम संस्कार के दौरान लोगों को खुले आसमान के नीचे परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीण धर्म सिंह, प्रधान देवेंद्र सिंह, प्रधान रिंकू सिंह, शिवबन, कलुआ, हरिभान, जोगिंदर सिंह, बहादुर सिंह, भूरी सिंह, हाकिम सिंह, शक्ति सिंह और कुमार पाल आदि ने प्रशासन से दोनों श्मशान घाटों में जल्द शेड का निर्माण कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि शेड बनने से बरसात के साथ-साथ गर्मी और अन्य मौसम में भी अंतिम संस्कार के दौरान लोगों को राहत मिलेगी।
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गांव निवासी साहब सिंह का शनिवार शाम निधन हो गया था। रविवार दोपहर 12 बजे तक बारिश के कारण अंतिम संस्कार नहीं हो सका। इसके बाद ग्रामीणों ने श्मशान घाट में तिरपाल लगाकर चिता तैयार की और बारिश से बचाव के बीच अंतिम संस्कार कराया। ग्रामीणों का कहना है कि डाबर गांव की आबादी करीब सात-आठ हजार है। गांव में दो श्मशान घाट होने के बावजूद किसी भी स्थान पर बारिश से बचाव के लिए शेड की व्यवस्था नहीं है।
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बरसात के मौसम में अंतिम संस्कार के दौरान लोगों को खुले आसमान के नीचे परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीण धर्म सिंह, प्रधान देवेंद्र सिंह, प्रधान रिंकू सिंह, शिवबन, कलुआ, हरिभान, जोगिंदर सिंह, बहादुर सिंह, भूरी सिंह, हाकिम सिंह, शक्ति सिंह और कुमार पाल आदि ने प्रशासन से दोनों श्मशान घाटों में जल्द शेड का निर्माण कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि शेड बनने से बरसात के साथ-साथ गर्मी और अन्य मौसम में भी अंतिम संस्कार के दौरान लोगों को राहत मिलेगी।
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