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आर्यावर्त बैंक मैनेजर सहित पांच पर धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज
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10एमएनपी-39-बैंक से फर्जी नाम पर ऋण लेने के संबंध शिकायत करनें जातीं गांव तरौलिया की महिलाएं फाइल फो?
- फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। विकास खंड करहल के गांव तरौलिया में स्वयं सहायता समूह के नाम पर करीब छह लाख रुपये के लोन के फर्जीबाड़े के मामले में सोमवार को आर्यावर्त बैंक कुर्रा शाखा के तत्कालीन प्रबंधक सहित पांच पर रिपोर्ट दर्ज करवाई है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है।
कुर्रा थाने में तारौलिया गांव निवासी रिंकी, आत्मकिरन, बृजलता, नीलम, गिरिजा ने दर्ज करवाई रिपोर्ट में बताया कि वर्ष 2013 में उनकी बिना जानकारी के फर्जीबाड़ा करके स्वयं सहायता समूह का गठन किया गया। इसके बाद बैंक ऑफ आर्यावर्त कुर्रा के शाखा प्रबंधक से मिलीभगत करके 10 महिलाओं के नाम से छह लाख रुपये का ऋण ले लिया। सात साल तक किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी। 31 जनवरी 2020 को जब उनके पास ऋण वसूली का नोटिस पहुंचा, तब उन्हें मामले की जानकारी हुई। पुलिस ने ग्रामीण बैंक ऑफ आर्यावर्त कुर्रा के तत्कालीन शाखा प्रबंधक, स्वयं सहायता समूह के अध्यक्ष महेंद्र प्रताप, साधना देवी निवासी तारौलिया और कोषाध्यक्ष गीता देवी एवं राजेश कुमार निवासी गांव बोझा पर धोखाधड़ी, फर्जी कागजात तैयार करने की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की है। तहरीर में बैंक मैनेजर का नाम नहीं है, इसीलिए अज्ञात में रिपोर्ट दर्ज की गई है।
अफसरों से भी की गई शिकायत
फर्जी तरीके से लोन लिए जाने की जानकारी होने के बाद पीड़ितों ने अफसरों सेे भी शिकायत की थी। छह फरवरी को पीड़ितों ने मामले की शिकायत जिलाधिकारी महेंद्र बहादुर से की। इसके साथ ही आर्यावर्त बैंक के रीजनल मैनेजर से भी शिकायत की गई।
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ये है स्वयं सहायता समूह
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गांवों में दस महिलाओं का एक समूह बनाया जाता है। समूह बैंक में अपना खाता खुलवाकर उसमें बचत जमा करता है। इसे किसी व्यापार के लिए किसी सदस्य को ऋण के रूप में दिया जाता है। मिशन समय-समय पर आर्थिक मदद के साथ ही कोई बड़ा कार्य करने के लिए बैंक से भी ऋण लेता है। इसमें प्रशासन भी मदद करता है।
पीड़ितों की शिकायत पर थाना पुलिस ने मामले में रिपोर्ट दर्ज की है। पुलिस जांच कर रही है। जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
ओमप्रकाश सिंह, एएसपी।
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कुर्रा थाने में तारौलिया गांव निवासी रिंकी, आत्मकिरन, बृजलता, नीलम, गिरिजा ने दर्ज करवाई रिपोर्ट में बताया कि वर्ष 2013 में उनकी बिना जानकारी के फर्जीबाड़ा करके स्वयं सहायता समूह का गठन किया गया। इसके बाद बैंक ऑफ आर्यावर्त कुर्रा के शाखा प्रबंधक से मिलीभगत करके 10 महिलाओं के नाम से छह लाख रुपये का ऋण ले लिया। सात साल तक किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी। 31 जनवरी 2020 को जब उनके पास ऋण वसूली का नोटिस पहुंचा, तब उन्हें मामले की जानकारी हुई। पुलिस ने ग्रामीण बैंक ऑफ आर्यावर्त कुर्रा के तत्कालीन शाखा प्रबंधक, स्वयं सहायता समूह के अध्यक्ष महेंद्र प्रताप, साधना देवी निवासी तारौलिया और कोषाध्यक्ष गीता देवी एवं राजेश कुमार निवासी गांव बोझा पर धोखाधड़ी, फर्जी कागजात तैयार करने की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की है। तहरीर में बैंक मैनेजर का नाम नहीं है, इसीलिए अज्ञात में रिपोर्ट दर्ज की गई है।
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अफसरों से भी की गई शिकायत
फर्जी तरीके से लोन लिए जाने की जानकारी होने के बाद पीड़ितों ने अफसरों सेे भी शिकायत की थी। छह फरवरी को पीड़ितों ने मामले की शिकायत जिलाधिकारी महेंद्र बहादुर से की। इसके साथ ही आर्यावर्त बैंक के रीजनल मैनेजर से भी शिकायत की गई।
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ये है स्वयं सहायता समूह
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गांवों में दस महिलाओं का एक समूह बनाया जाता है। समूह बैंक में अपना खाता खुलवाकर उसमें बचत जमा करता है। इसे किसी व्यापार के लिए किसी सदस्य को ऋण के रूप में दिया जाता है। मिशन समय-समय पर आर्थिक मदद के साथ ही कोई बड़ा कार्य करने के लिए बैंक से भी ऋण लेता है। इसमें प्रशासन भी मदद करता है।
पीड़ितों की शिकायत पर थाना पुलिस ने मामले में रिपोर्ट दर्ज की है। पुलिस जांच कर रही है। जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
ओमप्रकाश सिंह, एएसपी।