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Agra: सड़कों पर मांगती थी भीख, दर्दनाक अतीत को भूलकर हथिनी कल्पना ने पूरे किए आजादी के पांच साल
Thu, 02 May 2024 12:59 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Thu, 02 May 2024 12:59 PM IST
सार
हथिनी कल्पना कभी सड़कों पर भीख मांगती थी। अब उसने अपनी आजादी के पांच साल पूरे किए हैं। वो उपचार के बाद अब हौली के साथ घुलमिल कर मस्ती करती है।
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हथिनी कल्पना
- फोटो : wildlife sos
विस्तार
पेट में कीड़े, संक्रमित आंत, 400 किलो वजनी लोहे का सामान पीठ पर लेकर सड़कों पर भीख मांगती हथिनी कल्पना को जब चुरमुरा के हाथी अस्पताल लाया गया तो हालत बेहद गंभीर थी। ऐसे दर्दनाक अतीत को भूलकर अब कल्पना ने आजादी के पांच साल पूरे कर लिए हैं। कल्पना उपचार के बाद अब हौली के साथ घुलमिल कर मस्ती करती है।
वाइल्ड लाइफ एसओएस ने पांच साल पहले हथिनी कल्पना को रेस्क्यू कर चुरमुरा में उपचार शुरू किया था। वह भीख मांगने वाली हथिनी के रूप में शोषण और दुर्व्यवहार का शिकार रही। उस पर शारीरिक और भावनात्मक घाव थे। पशु चिकित्सकों ने लेजर थेरेपी और फुटबाथ की मदद से उपचार किया।
एसओएस के सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने बताया कि कल्पना अब अपना दिन अपने पसंदीदा शकरकंद और तरबूज खाकर बिताती है। उसे अस्पताल परिसर में एक नेत्रहीन हथिनी हौली के रूप में मिली है। दोनों अपनी दैनिक सैर के दौरान और पूल में अपने हाइड्रोथेरेपी सत्र के दौरान भी साथ ही रहती हैं।
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वाइल्ड लाइफ एसओएस ने पांच साल पहले हथिनी कल्पना को रेस्क्यू कर चुरमुरा में उपचार शुरू किया था। वह भीख मांगने वाली हथिनी के रूप में शोषण और दुर्व्यवहार का शिकार रही। उस पर शारीरिक और भावनात्मक घाव थे। पशु चिकित्सकों ने लेजर थेरेपी और फुटबाथ की मदद से उपचार किया।
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एसओएस के सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने बताया कि कल्पना अब अपना दिन अपने पसंदीदा शकरकंद और तरबूज खाकर बिताती है। उसे अस्पताल परिसर में एक नेत्रहीन हथिनी हौली के रूप में मिली है। दोनों अपनी दैनिक सैर के दौरान और पूल में अपने हाइड्रोथेरेपी सत्र के दौरान भी साथ ही रहती हैं।
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