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भीषण गर्मी का असर: धूप में बाइक से या फिर पैदल निकल रहे हैं...तो हो सकती है ये गंभीर बीमारी; बरतें सावधानी
Wed, 23 Apr 2025 10:48 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Wed, 23 Apr 2025 10:48 AM IST
सार
भीषण गर्मी में भी यदि काम के लिए बाइक से या पैदल निकल रहे हैं, तो सावधानी बरतने की जरूरत है। ये तपिश दिमाग को बीमार कर रही है।
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तेज धूप और गर्मी से कुछ इस तरह किया गया बचाव।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
गर्मी बढ़ने के साथ एसएन मेडिकल कॉलेज में दिमागी बीमारी से पीड़ित मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। गर्मी लोगों के मस्तिष्क को भी नुकसान पहुंचा रही है। लोग चिड़चिड़े हो रहे हैं। सिर दर्द और अवसाद के शिकार हो रहे हैं। इसमें अधिकतर पीड़ित 20 से 40 की उम्र के हैं।
एसएन मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. आशुतोष कुमार गुप्ता ने बताया कि गर्मी की वजह से मनोरोगियों की संख्या बढ़ रही है। ये लोग बायोपुलर मूड डिसऑर्डर से पीड़ित हैं। इस बीमारी में लोगों को अवसाद या सिरदर्द की समस्या हो रही है। ऐसे मरीज ज्यादा बोलने लगते हैं, अचानक गुस्सा हो जाते हैं या फिर अचानक से चुप हो जाते हैं। ऐसा गर्मी में ज्यादा समय तक रहने के कारण हो सकता है। मनोरोग की ओपीडी में रोजाना 100 से 150 मरीज आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि जो मरीज दिमागी बीमारी की दवा ले रहे हैं, वे पर्याप्त पानी पीते रहें। उल्टी होने पर तत्काल ओआरएस घोल का सेवन करें। धूप से बचने के लिए कपड़े या चश्मे का प्रयोग करें। दिक्कत ज्यादा होने पर चिकित्सक से मिलें।
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एसएन मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. आशुतोष कुमार गुप्ता ने बताया कि गर्मी की वजह से मनोरोगियों की संख्या बढ़ रही है। ये लोग बायोपुलर मूड डिसऑर्डर से पीड़ित हैं। इस बीमारी में लोगों को अवसाद या सिरदर्द की समस्या हो रही है। ऐसे मरीज ज्यादा बोलने लगते हैं, अचानक गुस्सा हो जाते हैं या फिर अचानक से चुप हो जाते हैं। ऐसा गर्मी में ज्यादा समय तक रहने के कारण हो सकता है। मनोरोग की ओपीडी में रोजाना 100 से 150 मरीज आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि जो मरीज दिमागी बीमारी की दवा ले रहे हैं, वे पर्याप्त पानी पीते रहें। उल्टी होने पर तत्काल ओआरएस घोल का सेवन करें। धूप से बचने के लिए कपड़े या चश्मे का प्रयोग करें। दिक्कत ज्यादा होने पर चिकित्सक से मिलें।
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जिला महिला अस्पताल में लिफ्ट बंद
लेडी लॉयल में रोजाना सैकड़ों गर्भवती महिलाएं उपचार के लिए आती हैं। गर्भवती महिलाओं को सीढ़ियों से ही पहले व दूसरे तल पर जाना पड़ रहा है। 100 शैया अस्पताल की इमारत में दोनों ओर लिफ्ट लगी हैं, लेकिन दोनों ही लिफ्ट बंद हैं। गर्भवती महिलाएं जान जोखिम में डालकर सीढ़ियों पर चढ़ने को मजबूर हैं।
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लेडी लॉयल में रोजाना सैकड़ों गर्भवती महिलाएं उपचार के लिए आती हैं। गर्भवती महिलाओं को सीढ़ियों से ही पहले व दूसरे तल पर जाना पड़ रहा है। 100 शैया अस्पताल की इमारत में दोनों ओर लिफ्ट लगी हैं, लेकिन दोनों ही लिफ्ट बंद हैं। गर्भवती महिलाएं जान जोखिम में डालकर सीढ़ियों पर चढ़ने को मजबूर हैं।
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कबाड़ हो रहा वाटर कूलर
लेडी लॉयल में सैकड़ों महिलाओं के बीच दो ही वाटर कूलर लगे हैं। जहां हमेशा भीड़ लगी रहती है। वहीं दूसरा बड़ा वॉटर कूलर लिनेक ब्लॉक के पास लगा है। जिसके ऊपर बंदर धमा चौकड़ी करते रहते हैं। जबकि यह वाटर कूलर बिल्कुल सही है। अगर इसे सौ शैया अस्पताल की इमारत में लगा दिया जाए तो मरीजों को पानी के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा।
लेडी लॉयल में सैकड़ों महिलाओं के बीच दो ही वाटर कूलर लगे हैं। जहां हमेशा भीड़ लगी रहती है। वहीं दूसरा बड़ा वॉटर कूलर लिनेक ब्लॉक के पास लगा है। जिसके ऊपर बंदर धमा चौकड़ी करते रहते हैं। जबकि यह वाटर कूलर बिल्कुल सही है। अगर इसे सौ शैया अस्पताल की इमारत में लगा दिया जाए तो मरीजों को पानी के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा।
शिफ्ट करवा रहे हैं आरओ
जिला महिला अस्पताल की अधीक्षक रचना गुप्ता ने बताया कि इमारत में दो लिफ्ट लगी हुई हैं। मरीज ज्यादा होने की वजह से कर्मचारी लिफ्ट को चालू नहीं कर पाए होंगे। मरीजों और तीमारदारों के लिए अस्पताल में दो आरओ लगे हैं। वहीं ठेकेदार को बोलकर पुरानी इमारत के पास लगे आरओ को शिफ्ट करवाया जा रहा है।
जिला महिला अस्पताल की अधीक्षक रचना गुप्ता ने बताया कि इमारत में दो लिफ्ट लगी हुई हैं। मरीज ज्यादा होने की वजह से कर्मचारी लिफ्ट को चालू नहीं कर पाए होंगे। मरीजों और तीमारदारों के लिए अस्पताल में दो आरओ लगे हैं। वहीं ठेकेदार को बोलकर पुरानी इमारत के पास लगे आरओ को शिफ्ट करवाया जा रहा है।