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यूपी: हर 3 माह में गुम हो जाते 500 ड्राइविंग लाइसेंस, आपने किया है आवेदन, तो पढ़ ले ये खबर
Fri, 29 Sep 2023 10:12 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला, आगरा
अमर उजाला, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Fri, 29 Sep 2023 10:12 AM IST
सार
गलत पता या अन्य कारण की वजह से हर 3 माह में 500 लाइसेंस आवेदकों तक नहीं पहुंचते हैं। इस वजह से ये लाइसेंस वापस लखनऊ भेज दिए जाते हैं। ऐसे में यदि लाइसेंस दोबारा प्राप्त करना है तो इसके लिए आरटीओ से संपर्क किया जा सकता है।
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ड्राइविंग लाइसेंस।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
आगरा संभागीय परिवहन विभाग से हर 3 माह में करीब 500 स्थाई ड्राइविंग लाइसेंस गुम हो जाते हैं। इस वजह से आवेदक परेशान रहते हैं। आवेदन की सारी प्रक्रिया पूरी करने के बाद डाक के माध्यम से लाइसेंस आवेदक के घर भेजा जाता है। गलत पता या अन्य कारण की वजह से हर 3 माह में 500 लाइसेंस आवेदकों तक नहीं पहुंचते हैं।
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स्थाई ड्राइविंग लाइसेंस पाना कई लोगों के लिए मुश्किल भरा साबित हो रहा है। आवेदक और लाइसेंस के बीच में दीवार गलत पते बन रहे है। वर्ष 2019 से आरटीओ में ड्राइविंग लाइसेंस की व्यवस्था में बदलाव किया गया। आगरा कार्यालय के स्थान से लखनऊ से लाइसेंस बनकर आवेदक के निवास पर डाक के माध्यम से भेजे जाने लगे। तभी से यह समस्या खड़ी हो गई। हर तीन माह में लखनऊ से करीब 500 लाइसेंस आरटीओ कार्यालय वापस आ रहे है क्योंकि पता नहीं मिलता है। यहां पर कर्मचारी आवेदक के फोन से संपर्क करने का प्रयास करते है, जिसमें से कम लोग लाइसेंस लेने आते है। इसकी वजह अधिक समय के बाद जानकारी मिलना होता है। जब तक आवेदक डुप्लीकेट लाइसेंस का आवेदन कर देते हैं।
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कार्यालय से नहीं मिलती कोई जानकारी
स्थाई लाइसेंस को लेकर आरटीओ कार्यालय से आवेदकों को कोई जानकारी नहीं दी जाती है। कई लोग लाइसेंस की जानकारी करने कार्यालय आते हैं, तो कर्मचारी लखनऊ से संपर्क करने की बात कहते है। जबकि लखनऊ का कोई हेल्प लाइन नंबर भी नहीं होता है।
स्थाई लाइसेंस को लेकर आरटीओ कार्यालय से आवेदकों को कोई जानकारी नहीं दी जाती है। कई लोग लाइसेंस की जानकारी करने कार्यालय आते हैं, तो कर्मचारी लखनऊ से संपर्क करने की बात कहते है। जबकि लखनऊ का कोई हेल्प लाइन नंबर भी नहीं होता है।
दोबारा नहीं बन सकता है लाइसेंस
एक बार ऑनलाइन ड्राइविंग लाइसेंस बनने के बाद दोबारा उस व्यक्ति का लाइसेंस नहीं बन सकता है। एक से दो माह में लाइसेंस न मिलने पर आवेदक कार्यालय से संपर्क करते है। उनको कोई जानकारी नहीं मिलती है, तो वह दलाल के माध्यम से डुप्लीकेट लाइसेंस का आवेदन कर देते हैं क्योंकि नए लाइसेंस का आवेदन कंप्यूटर नहीं लेता है।
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कार्यालय से ले जातें हैं लाइसेंस
आरआई (प्रशासन) उमेश कटियार ने बताया कि ड्राइविंग लाइसेंस पर आवेदक की तरफ से ऑनलाइन पता दर्ज कराया जाता है। पता न मिलने की वजह से काफी संख्या में लाइसेंस लखनऊ वापस लौट जाते हैं। जब आगरा कार्यालय से कोई कर्मचारी तीन या चार माह में लखनऊ जाता है, तो वहां से लाइसेंस ले आता है। कार्यालय से भी लोग अपने लाइसेंस ले जाते हैं।
एक बार ऑनलाइन ड्राइविंग लाइसेंस बनने के बाद दोबारा उस व्यक्ति का लाइसेंस नहीं बन सकता है। एक से दो माह में लाइसेंस न मिलने पर आवेदक कार्यालय से संपर्क करते है। उनको कोई जानकारी नहीं मिलती है, तो वह दलाल के माध्यम से डुप्लीकेट लाइसेंस का आवेदन कर देते हैं क्योंकि नए लाइसेंस का आवेदन कंप्यूटर नहीं लेता है।
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कार्यालय से ले जातें हैं लाइसेंस
आरआई (प्रशासन) उमेश कटियार ने बताया कि ड्राइविंग लाइसेंस पर आवेदक की तरफ से ऑनलाइन पता दर्ज कराया जाता है। पता न मिलने की वजह से काफी संख्या में लाइसेंस लखनऊ वापस लौट जाते हैं। जब आगरा कार्यालय से कोई कर्मचारी तीन या चार माह में लखनऊ जाता है, तो वहां से लाइसेंस ले आता है। कार्यालय से भी लोग अपने लाइसेंस ले जाते हैं।