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डिजिटल अरेस्ट: पुलिस की वर्दी और गिरफ्तारी वारंट, फिर साइबर ठग ने कमरे में कैद किए शिक्षक; हड़प लिए 25 लाख
Mon, 30 Mar 2026 09:43 AM IST
Arun Parashar
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: Arun Parashar
Updated Mon, 30 Mar 2026 09:43 AM IST
सार
गिरफ्तारी से बचने के झांसे में आकर शिक्षक ने ठग के कहने पर खुद को कमरे में बंद कर लिया। अगले दिन सुबह ही बैंक जाकर ठग के बताए बैंक खाते में आरटीजीएस के माध्यम से 25 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। रकम ट्रांसफर होने के अगले दिन जब साइबर अपराधियों ने संपर्क बंद कर दिया तो उन्होंने मामले की जानकारी परिजन को दी।
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cyber crime cyber fraud
- फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
अज्ञात नंबर से कॉल कर साइबर अपराधी ने रिटायर्ड शिक्षक को आतंकवादियों से संबंध होने का आरोप लगाकर डराया। पुलिस की वर्दी पहनकर वीडियो कॉल किया और सुप्रीम कोर्ट का फर्जी गिरफ्तारी वारंट दिखाकर जेल भेजने की धमकी देते हुए डिजिटल अरेस्ट कर लिया। फिर कई बार में 25 लाख रुपये अपने खाते में स्थानांतरित करवा लिए। ठगे जाने के बाद जब पीड़ित ने बच्चों को इसकी जानकारी दी तो उन्हें ठगी का अहसास हुआ। पीड़ित की शिकायत पर थाना साइबर क्राइम पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
शमसाबाद के गांव बांगुरी निवासी रिटायर शिक्षक तुकमान सिंह ने पुलिस को बताया कि 3 मार्च को उनके पास अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने अपना परिचय इंस्पेक्टर रंजीत के रूप में देते हुए बताया कि उनके मोबाइल नंबर से आतंकियों से संपर्क किया गया है। फिर वीडियो कॉल कर जेल जाने का डर दिखाते हुए गोपनीय जांच में साक्ष्य मिलने और सुप्रीम कोर्ट के नाम से फर्जी गिरफ्तारी वारंट निकलने की दबाव बनाते हुए डिजिटल अरेस्ट कर लिया। कहा कि अगर किसी को जानकारी दी तो तत्काल गिरफ्तारी और पूरे परिवार की हत्या भी हो सकती है।
जब शिक्षक ने डरकर ठग के सामने पूरी तरह समर्पण कर दिया तो आरोपी ने पीड़ित के बैंक खाते से आतंकी फंडिंग की जांच की बात कही और मदद का आश्वासन देकर जांच में सहयोग करने को कहा। बचने के झांसे में आकर शिक्षक ने ठग के कहने पर खुद को कमरे में बंद कर लिया। अगले दिन सुबह ही बैंक जाकर ठग के बताए बैंक खाते में आरटीजीएस के माध्यम से 25 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। रकम ट्रांसफर होने के अगले दिन जब साइबर अपराधियों ने संपर्क बंद कर दिया तो उन्होंने मामले की जानकारी परिजन को दी। बच्चों के साइबर ठगी होने की बात कहने पर उन्होंने साइबर हेल्पलाइन 1930 पर जानकारी दी और थाना साइबर क्राइम को शिकायत दर्ज कराई। डीसीपी साइबर क्राइम आदित्य सिंह ने बताया कि जिस खाते में रकम ट्रांसफर हुई है, उसे फ्रीज कराया गया है। संबंधित नंबरों के आईपी एड्रेस और अन्य माध्यमों से आरोपियों की तलाश की जा रही है।
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सावधानी बरतें
डीसीपी ने कहा कि अगर आपको कोई अज्ञात व्यक्ति ऑडियो या वीडियो कॉल पर पुलिस या जांच एजेंसी का अधिकारी बनकर डराता है तो तुरंत कॉल काट दें। कानूनी तौर पर डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई प्रावधान नहीं है। अपनी कोई भी निजी जानकारी या बैंक विवरण किसी से साझा न करें। तत्काल 1930 साइबर हेल्पलाइन नंबर या नजदीकी साइबर क्राइम या पुलिस थाने पर शिकायत करें।
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शमसाबाद के गांव बांगुरी निवासी रिटायर शिक्षक तुकमान सिंह ने पुलिस को बताया कि 3 मार्च को उनके पास अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने अपना परिचय इंस्पेक्टर रंजीत के रूप में देते हुए बताया कि उनके मोबाइल नंबर से आतंकियों से संपर्क किया गया है। फिर वीडियो कॉल कर जेल जाने का डर दिखाते हुए गोपनीय जांच में साक्ष्य मिलने और सुप्रीम कोर्ट के नाम से फर्जी गिरफ्तारी वारंट निकलने की दबाव बनाते हुए डिजिटल अरेस्ट कर लिया। कहा कि अगर किसी को जानकारी दी तो तत्काल गिरफ्तारी और पूरे परिवार की हत्या भी हो सकती है।
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जब शिक्षक ने डरकर ठग के सामने पूरी तरह समर्पण कर दिया तो आरोपी ने पीड़ित के बैंक खाते से आतंकी फंडिंग की जांच की बात कही और मदद का आश्वासन देकर जांच में सहयोग करने को कहा। बचने के झांसे में आकर शिक्षक ने ठग के कहने पर खुद को कमरे में बंद कर लिया। अगले दिन सुबह ही बैंक जाकर ठग के बताए बैंक खाते में आरटीजीएस के माध्यम से 25 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। रकम ट्रांसफर होने के अगले दिन जब साइबर अपराधियों ने संपर्क बंद कर दिया तो उन्होंने मामले की जानकारी परिजन को दी। बच्चों के साइबर ठगी होने की बात कहने पर उन्होंने साइबर हेल्पलाइन 1930 पर जानकारी दी और थाना साइबर क्राइम को शिकायत दर्ज कराई। डीसीपी साइबर क्राइम आदित्य सिंह ने बताया कि जिस खाते में रकम ट्रांसफर हुई है, उसे फ्रीज कराया गया है। संबंधित नंबरों के आईपी एड्रेस और अन्य माध्यमों से आरोपियों की तलाश की जा रही है।
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सावधानी बरतें
डीसीपी ने कहा कि अगर आपको कोई अज्ञात व्यक्ति ऑडियो या वीडियो कॉल पर पुलिस या जांच एजेंसी का अधिकारी बनकर डराता है तो तुरंत कॉल काट दें। कानूनी तौर पर डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई प्रावधान नहीं है। अपनी कोई भी निजी जानकारी या बैंक विवरण किसी से साझा न करें। तत्काल 1930 साइबर हेल्पलाइन नंबर या नजदीकी साइबर क्राइम या पुलिस थाने पर शिकायत करें।