आगरा: फूफा और जीजा बनकर ठगने वाला नेत्रहीन ठग और उसका साथी गिरफ्तार
- रेंज साइबर थाना पुलिस ने सरगना और उसके भाई को किया गिरफ्तार
- तीन लोग फरार, ऑनलाइन सामान बेचने और नौकरी का झांसा भी देते थे
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पुलिस ने बताया कि तौफीक को बचपन से ही आंखों से दिखाई नहीं देता है। वह साइबर ठगी गैंग का सरगना है। गैंग ऑनलाइन सामान बेचने, नौकरी लगवाने और घर पर काम का झांसा देकर भी ठगता था। तीन आरोपी अभी फरार हैं।
रेंज साइबर थाना आगरा के प्रभारी निरीक्षक राजेश कुमार शर्मा ने बताया कि रामपुर के घेर मीर खां जेल रोड निवासी शिवराज सिंह सेंगर की शिकायत पर कार्रवाई में गैंग का खुलासा हुआ। अखिल भारतीय अनुसूचित जाति व शोषित वर्ग उत्थान समिति के पदाधिकारी शिवराज को सितंबर, 2020 में एक कॉल आया।
रोजगार के नाम प जमा कराए 10 हजार रुपये
राजेश कुमार शर्मा ने बताया कि सर्विलांस की मदद से आरोपियों के बारे में जानकारी जुटाई गई। जिस खाते में रकम जमा हुई थी, उनके बारे में पता किया। कॉल डिटेल निकाली गई। मथुरा के थाना शेरगढ़ के गांव बाबूगढ़ निवासी तौफीक और उसके भाई शहजाद का नाम आने पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
गांव बाबूगढ़ के ही रहने वाले शाहरूख, मौसम और पप्पी भी गैंग के लिए काम करते हैं। तीनों फरार हैं। आरोपियों के पास से चार मोबाइल, आठ एटीएम, दो आधार, दो पेन कार्ड, एक हेल्थ कार्ड बरामद किए हैं।
रेंज साइबर थाना के एसआई चेतन भारद्वाज के अनुसार, पुलिस की पूछताछ में आरोपी तौफीक ने बताया कि उसे जन्म से ही आंखों से दिखाई नहीं देता। लोगों से बात करने के लिए वह कीपैड वाला मोबाइल प्रयोग करता है। उसके साथी नंबर बताते थे, जिनको वह याद कर लेता। लोगों से वह इस तरह से बात करता है कि उनको लगता है कि कोई परिचित या रिश्तेदार बोल रहा है।
उनको भावनात्मक रूप से ब्लैकमेल करता कि वह फंस गया है। मदद की जरूरत है। रुपये लौटा देगा। वह दिन में सौ लोगों को कॉल करता था। जो फंस जाता था, उससे रकम जमा करा लेते थे। शाहरुख गांव में आकर ही मशीन से कार्ड स्वैप करके रकम दे जाता था।
सिम रिचार्ज कराने पर पकड़ा गया
गैंग के बारे में सुराग पुलिस को सिम रिचार्ज कराने पर मिला। तौफीक ने एक ही दुकान से असली आईडी और फर्जी आईडी पर लिए सिम कार्डों को रिचार्ज कराया। जिससे पुलिस को सुराग मिला। फर्जी आईडी के सिम के आधार पर पुलिस दुकान तक पहुंची और यहां से पता चला कि संबंधित आईडी के रिचार्ज वाले व्यक्ति ने एक और आईडी से रिचार्ज कराया है। नेत्रहीन होने की वजह से पुलिस को शुरू में उस पर शक नहीं हो रहा था।
दो साल से कर रहा साइबर ठगी
तौफीक दो साल से इस काम में लगा है। अब तक 50 से अधिक लोगों से खाते में रकम जमा करा चुके हैं। उनके मोबाइल की कॉल डिटेल में हजारों नंबर मिले हैं। हालांकि आरोपियों ने 15 लोगों से ही ठगी की बात स्वीकार की है। पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि आरोपी मौसम और शहजाद इंटरनेट से लोगों की जानकारी लेते थे। उनके गैंग का ठिकाना यमुना किनारे पर एकांत में है।
यहां से लोगों को कॉल करते। किसी को रिश्तेदार और परिचित बताते थे। इसके अलावा नौकरी, वर्क फ्रॉम होम का लालच भी देते थे। खातों में जमा होने वाली रकम को शाहरूख निकालकर देता था। इसके बदले में वह 20 प्रतिशत रकम लेता था। बाकी धनराशि को तौफीक, मौसम और शहजाद आपस में बांट लेते।