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दौड़ लगाने आए दो और मुन्नाभाई गिरफ्तार
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 01 May 2016 02:04 AM IST
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विधायक राकेश कालिया का कहना है कि इस तरह की घटना की सूचना मिलने पर वह मौके पर गए थे। उनकी किसी के साथ कोई बहस नहीं हुई। आरोप निराधार हैं।
- फोटो : Demo pic
पुलिस-पीएसी में सिपाही भर्ती के लिए पुलिस लाइन में चल रही शारीरिक दक्षता परीक्षा (दौड़) में 40 से 50 हजार रुपये में दौड़ लगाने के लिए फर्जी तरीके से धावक भेजे जा रहे हैं। शनिवार को दो और मुन्नाभाई पकड़ लिए गए। एक ने 40 हजार रुपये में दौड़ लगाना तय किया तो दूसरा अपने भाई की जगह पर दौड़ने आया। पुलिस ने दोनों को नाई की मंडी थाना पुलिस के हवाले कर दिया। सिपाही भर्ती में अब तक 13 फर्जी अभ्यर्थी पकड़े जा चुके हैं, जिनके खिलाफ थाना नाई की मंडी में मुकदमा भी दर्ज कराया गया है।
शनिवार सुबह 5:30 बजे अलीगढ़ के गोंडा स्थित तारापुरा उर्फ रुदायन निवासी अभ्यर्थी प्रवीन कुमार के स्थान पर इसी थाना क्षेत्र के चिंता की नगरिया निवासी नीरू दौड़ लगाने आया। प्रवेशपत्र और आईडी की जांच में कंप्यूटर में उपलब्ध डाटा से भिन्नता पाई गई तो उसे पकड़ लिया। पूछताछ मेें उसने बताया कि उसने दौड़ लगाने के लिए 40 हजार रुपये लिए हैं। वहीं इटावा के बकेवर स्थित गांव चंदपुरा निवासी रोहित कुमार ने अपने भाई प्रदीप कुमार को दौड़ लगाने के लिए भेजा।
एक और गैंग है सक्रिय
सिपाही भर्ती में दलालों के गैंग ने सेंध लगा दी है। पुलिस ने 28 अप्रैल को बर्खास्त सिपाही का गैंग पकड़ा था। मास्टर माइंड सतीश, बर्खास्त सिपाही प्रदीप और रामू को गिरफ्तार किया था। वह 50 से 60 हजार रुपये मेें धावकों को भेजता था। मगर, शुक्रवार को एक और शनिवार को दो फर्जी अभ्यर्थियों के पकड़े जाने से आशंका जाहिर की जा रही है कि एक और गैंग सक्रिय है।
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शनिवार सुबह 5:30 बजे अलीगढ़ के गोंडा स्थित तारापुरा उर्फ रुदायन निवासी अभ्यर्थी प्रवीन कुमार के स्थान पर इसी थाना क्षेत्र के चिंता की नगरिया निवासी नीरू दौड़ लगाने आया। प्रवेशपत्र और आईडी की जांच में कंप्यूटर में उपलब्ध डाटा से भिन्नता पाई गई तो उसे पकड़ लिया। पूछताछ मेें उसने बताया कि उसने दौड़ लगाने के लिए 40 हजार रुपये लिए हैं। वहीं इटावा के बकेवर स्थित गांव चंदपुरा निवासी रोहित कुमार ने अपने भाई प्रदीप कुमार को दौड़ लगाने के लिए भेजा।
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एक और गैंग है सक्रिय
सिपाही भर्ती में दलालों के गैंग ने सेंध लगा दी है। पुलिस ने 28 अप्रैल को बर्खास्त सिपाही का गैंग पकड़ा था। मास्टर माइंड सतीश, बर्खास्त सिपाही प्रदीप और रामू को गिरफ्तार किया था। वह 50 से 60 हजार रुपये मेें धावकों को भेजता था। मगर, शुक्रवार को एक और शनिवार को दो फर्जी अभ्यर्थियों के पकड़े जाने से आशंका जाहिर की जा रही है कि एक और गैंग सक्रिय है।
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