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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Amount to elicit chit fund companies were bogus

रकम बटोर रहीं फर्जी चिटफंड कंपनियां

Mon, 29 Jun 2015 02:30 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला
ब्यूरो, अमर उजाला Updated Mon, 29 Jun 2015 02:30 AM IST
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आगरा। रिजर्व बैंक के लाइसेंस के बगैर चार कंपनियां लोगों की जमा पूंजी को जमा योजनाओं के रूप में बटोर रही हैं। आरटीआई एक्टिविस्ट रिजर्व बैंक और आर्थिक अपराध शाखा में शिकायत दर्ज कराएंगे।
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नगला पदी के आरटीआई एक्टिविस्ट शिव कुमार कुशवाह ने रिजर्व बैंक इंडिया से आगरा से संचालित चिटफंड कंपनियों रेस्फील्ड बिजनेस इंटरप्राइजेज, फिनिक्स निधि, एसएमएल निधि, यूटेक निधि के लाइसेंस के बारे में पूछा था। रिजर्व बैंक के लोक सूचना अधिकारी डा. सत्येन डेविड के मुताबिक, इन कंपनियों को रिजर्व बैंक अधिनियम 1934 की धारा 45 के तहत गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी का रजिस्ट्रेशन नहीं दिया गया है। इनके खिलाफ रिजर्व बैंक अधिनियम के अध्याय पांच के प्रावधानों में कार्रवाई की जा सकती है। शिव कुमार कुशवाह के मुताबिक, वह लालच देकर जनता की गाढ़ी कमाई को लूटने वाली चिट फं ड कंपनियों के खिलाफ आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) में शिकायत दर्ज कराएंगे।
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वेबसाइट पर यूपी सरकार का पत्र
यू टेक निधि ने जमा योजनाओं का ब्योरा अपनी वेबसाइट पर दर्ज किया हुआ है, इसमें वह बचत खातों पर 6 फीसदी ब्याज और एक लाख से ज्यादा रकम जमा करने पर राष्ट्रीय बैंकों से दो फीसदी ज्यादा ब्याज का लालच दे रहे हैं। लीगल कॉलम में कंपनी ने रिजर्व बैंक की जगह पैन कार्ड और उत्तर प्रदेश सरकार के रजिस्ट्रार का कारोबार का प्रमाण पत्र दिखाया है। एसएमआई निधि कंपनी ने अपनी वेबसाइट पर किसी तरह का कोई ब्योरा ही नहीं दिया है। वेबसाइट बनी है, लेकिन इसमें न तो संपर्क नंबर है और न ही पता। कंपनी की योजनाओं, उद्देश्य पर भी क्लिक नहीं किया जा सकता। इसी तरह यूएनआईएल की वेबसाइट का हाल है।
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