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अंधविश्वास की चोटी: भीड़ से बचकर भागती बुजुर्ग महिला तालाब में जा गिरी
Updated Mon, 07 Aug 2017 11:11 PM IST
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बाह (आगरा) जैसे चुड़ैल-चुड़ैल का हल्ला मचाकर डौकी के मुटनई गांव में दलित महिला मानदेवी की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई, वैसी ही घटना रविवार की रात बाह के भाऊपुरा में दोहराए जाने से बाल-बाल बची। यहां भी बुजुर्ग महिला को मैले कपड़ों में देख लोगों ने चोटी काटने वाली समझ लिया और चुड़ैल-चुड़ैल का हल्ला मचाते हुए उसके पीछे भागने लगे।
वह जान बचाकर दौड़ी, तो तालाब में जा गिरी। गनीमत रही कि भीड़ में कुछ समझदार लोग मौजूद थे जिन्होंने महिला की जान बचा ली। उन्होंने बताया कि महिला मानसिक रूप से अस्वस्थ है। इसके बाद महिला को तालाब से निकाला गया। सुबह उसे वहां से रवाना किया गया।
लगभग 60 साल उम्र की यह महिला रात करीब दस बजे गांव की गलियों में घूमती नजर आई थी। कुछ लोगों की नजर उस पर पड़ी। उन्होंने हल्ला मचा दिया कि चोटी काटने वाली आ गई। बस फिर क्या था अफवाहों की आंधी तेजी से चली। लोग जमा हुए और चुड़ैल-चुड़ैल का हल्चा मचाते बुजुर्ग महिला को मारने के लिए दौड़ लिए।
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वह जान बचाकर भागी। थोड़ी दूरी पर तालाब था। अंधेरे के चलते वह इस में गिर गई। इस पर भीड़ बाहर रुक गई। कुछ समझदार लोगों ने कहा कि पहले यह मालूम तो कर लो कि वह महिला कौन है? उसके कपड़े फटे थे, मैले थे, वह डरी सहमी थी। कुछ लोगों ने कहा कि वह मानसिक रूप से अस्वस्थ है, गलती से यहां आ गई है। इसके बाद गांव के लोगों की संवेदनाएं जागीं। महिला को एक घर में रखा गया। पुलिस ने बताया कि महिला को सुबह नए कपड़े पहनाकर गांव से रवाना कर दिया गया। वह अपना नाम-पता भी नहीं पता पा रही थी।
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वह जान बचाकर दौड़ी, तो तालाब में जा गिरी। गनीमत रही कि भीड़ में कुछ समझदार लोग मौजूद थे जिन्होंने महिला की जान बचा ली। उन्होंने बताया कि महिला मानसिक रूप से अस्वस्थ है। इसके बाद महिला को तालाब से निकाला गया। सुबह उसे वहां से रवाना किया गया।
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लगभग 60 साल उम्र की यह महिला रात करीब दस बजे गांव की गलियों में घूमती नजर आई थी। कुछ लोगों की नजर उस पर पड़ी। उन्होंने हल्ला मचा दिया कि चोटी काटने वाली आ गई। बस फिर क्या था अफवाहों की आंधी तेजी से चली। लोग जमा हुए और चुड़ैल-चुड़ैल का हल्चा मचाते बुजुर्ग महिला को मारने के लिए दौड़ लिए।
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वह जान बचाकर भागी। थोड़ी दूरी पर तालाब था। अंधेरे के चलते वह इस में गिर गई। इस पर भीड़ बाहर रुक गई। कुछ समझदार लोगों ने कहा कि पहले यह मालूम तो कर लो कि वह महिला कौन है? उसके कपड़े फटे थे, मैले थे, वह डरी सहमी थी। कुछ लोगों ने कहा कि वह मानसिक रूप से अस्वस्थ है, गलती से यहां आ गई है। इसके बाद गांव के लोगों की संवेदनाएं जागीं। महिला को एक घर में रखा गया। पुलिस ने बताया कि महिला को सुबह नए कपड़े पहनाकर गांव से रवाना कर दिया गया। वह अपना नाम-पता भी नहीं पता पा रही थी।