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कोरोना उपचार का 17 दिन में 7.15 लाख का बिल, पीपीई किट के वसूले डेढ़ लाख रुपये
Sat, 10 Oct 2020 01:46 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sat, 10 Oct 2020 01:46 PM IST
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आगरा में कोरोना वायरस
- फोटो : अमर उजाला
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आगरा में निजी अस्पताल में कोरोना उपचार का मनमाना शुल्क वसूलने का एक और मामला सामने आया है। इस बार कोरोना संक्रमित मरीज के परिजनों ने नयति हॉस्पिटल पर मनमाना बिल बनाने का आरोप लगाया है। मरीज की रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद भी तीन दिन अस्पताल में रखने, बिल में पीपीई किट के डेढ़ लाख से अधिक रुपये वसूलने का भी आरोप लगाया है।
शहर के मदिया कटरा निवासी चरनजीत सिंह का कहना है कि उनके 60 साल के पिता को 23 सितंबर को नयति हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। जांच में कोरोना की पुष्टि हुई। तब उन्हें रोजाना 35 हजार रुपये का खर्च बताया। छह अक्तूबर को पिताजी की रिपोर्ट निगेटिव आई, लेकिन उनको डिस्चार्ज नहीं किया गया।
यह भी पढ़ें- अमर उजाला असर: डीएम की चेतावनी- कोरोना उपचार की तय दरों से ज्यादा शुल्क लिया तो होगी कार्रवाई
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परिजनों ने विरोध किया तो अस्पताल स्टाफ शुक्रवार को डिस्चार्ज करने को तैयार हो गया और 7.15 लाख रुपये का बिल बना दिया। बिल में एक पीपीई किट के 2600 रुपये कीमत दर्शाई है। स्वास्थ्य विभाग में फोन करने पर जवाब नहीं मिला। बमुश्किल कुल बिल में से 65 हजार रुपये कम किए गए।
यह भी पढ़ें- ऑडियो वायरल : निजी अस्पताल में कोरोना इलाज के रोज 60 हजार रुपये, कहा- यहां सरकारी नियम नहीं चलते
उधर, नयति अस्पताल की निदेशक शिवानी शर्मा ने बताया कि कोरोना जांच रिपोर्ट भले ही निगेटिव आई है, लेकिन मरीज की हालत ठीक नहीं है, अभी वह ऑक्सीजन पर हैं। परिजन अपने रिस्क पर मरीज को डिस्चार्ज कराके ले गए हैं। बिल मनमाना नहीं वसूला, चिकित्सकीय सुविधाओं के आधार पर लिया गया है।
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शहर के मदिया कटरा निवासी चरनजीत सिंह का कहना है कि उनके 60 साल के पिता को 23 सितंबर को नयति हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। जांच में कोरोना की पुष्टि हुई। तब उन्हें रोजाना 35 हजार रुपये का खर्च बताया। छह अक्तूबर को पिताजी की रिपोर्ट निगेटिव आई, लेकिन उनको डिस्चार्ज नहीं किया गया।
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परिजनों ने विरोध किया तो अस्पताल स्टाफ शुक्रवार को डिस्चार्ज करने को तैयार हो गया और 7.15 लाख रुपये का बिल बना दिया। बिल में एक पीपीई किट के 2600 रुपये कीमत दर्शाई है। स्वास्थ्य विभाग में फोन करने पर जवाब नहीं मिला। बमुश्किल कुल बिल में से 65 हजार रुपये कम किए गए।
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उधर, नयति अस्पताल की निदेशक शिवानी शर्मा ने बताया कि कोरोना जांच रिपोर्ट भले ही निगेटिव आई है, लेकिन मरीज की हालत ठीक नहीं है, अभी वह ऑक्सीजन पर हैं। परिजन अपने रिस्क पर मरीज को डिस्चार्ज कराके ले गए हैं। बिल मनमाना नहीं वसूला, चिकित्सकीय सुविधाओं के आधार पर लिया गया है।
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