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कागजों पर हो गईं पंचायतों में खुली बैठकें
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एटा। एक ओर सरकार ग्राम पंचायतों में विकास कार्य कराने के लिए लगातार निर्देश दे रही है, लेकिन जिम्मेदार सरकार के निर्देशों को धता बताते हुए गलत रिपोर्ट देकर गुमराह कर रहे हैं। हाल ही जिला पंचायतराज विभाग में नया मामला सामने आया है। विभाग ने शासन को 573 ग्राम पंचायतों में बैठक हो जाने की सूचना दी है लेकिन जिले की तमाम ग्राम पंचायतों में अब तक खुली बैठक नहीं हुई है। आलम यह है कि ग्राम पंचायतों में कागजों पर बैठक की कार्रवाई दिखाकर कोरम पूरा कर दिया गया। यहां न तो प्रधानमंत्री का पत्र पढ़कर सुनाया गया और न ही गांव के विकास पर चर्चा की गई। ऐसे में विभाग की रिपोर्ट सवालों के घेरे में आ गई है। पढ़िए रिपोर्ट...
केस नंबर एक
असरौली में प्रधान को नहीं पता कब हुई बैठक
ग्राम पंचायत असरौली में अब तक खुली बैठक का आयोजन नहीं हुआ है। गांव के लोग समस्याओं से जूझ रहे हैं। विभाग ने रिपोर्ट में गांव में खुली बैठक होने की पुष्टि की है। जबकि प्रधान छोटेलाल को पता ही नहीं है कि बैठक कब हुई? गांव के लोग भी बैठक होने की बात से इनकार कर रहे हैं।
केस नंबर दो
घिलौआ में अप्रैल में हुई बैठक
शीतलपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत घिलौआ में अप्रैल में खुली बैठक हो गई है। शासन को दी गई रिपोर्ट में जिक्र किया गया है कि यहां प्रधानमंत्री का पत्र पढ़कर सुनाया गया है, लेकिन पत्र जून में आया है और बैठक अप्रैल मे हो चुकी है। प्रधान स्वदेश का कहना है कि खुली बैठक हो गई है, लेकिन पत्र नहीं मिला है।
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केस नंबर तीन
बैठक हुई, लेकिन समस्या समाधान नहीं
निधौलीकलां की ग्राम पंचायत शाहपुर में तीन दिन पहले बैठक हुई है, लेकिन यहां भी प्रधानमंत्री का पत्र पढ़कर नहीं सुनाया गया है। गांव के राजकुमार ने गांव में सफाई कर्मी द्वारा पैसे मांगने की शिकायत की, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। गांव में गंदगी का आलम है।
केस नंबर चार
अब तक नहीं हुई बैठक
शीतलपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत चोंचा वनगांव में भी बैठक नहीं हुई है। गांव के उदयवीर सिंह कहते हैं कि नल खराब पड़े हैं, कोई सुनने वाला नहीं है। खुली बैठक होती ही नहीं है।
यह थे शासन के निर्देश
देश में लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा सरकार बनने पर प्रधानमंत्री ने सबसे पहला पत्र प्रधानों के नाम लिखकर जल संरक्षण के लिए अपील की थी। इसे हर ग्राम पंचायत को पढ़कर सुनाया जाना था, लेकिन जिले में तमाम ग्राम पंचायतों में कोई बैठक नहीं हुई।
इनकी सुनिए
जिले की हर ग्राम पंचायत में खुली बैठक हो चुकी है। सभी जगह पर प्रधानमंत्री जी का पत्र पढ़कर सुनाया गया है।
रतन कुमार, डीपीआरओ एटा
न्याय पंचायत स्तर पर बैठक हो चुकी है। ग्राम पंचायतों के बारे में जानकारी नहीं है। इसे दिखवा लेता हूं। शासन को गलत रिपोर्ट नहीं भेजी जाएगी।
मदन वर्मा, सीडीओ, एटा
कहते हैं आंकड़े
576 ग्राम पंचायतें हैं जिले में
573 ग्राम पंचायतों में बैठक होने का दावा
05 जून को मिला था प्रधानमंत्री का पत्र
01 महीने बाद भी नहीं हो सकीं बैठकें
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केस नंबर एक
असरौली में प्रधान को नहीं पता कब हुई बैठक
ग्राम पंचायत असरौली में अब तक खुली बैठक का आयोजन नहीं हुआ है। गांव के लोग समस्याओं से जूझ रहे हैं। विभाग ने रिपोर्ट में गांव में खुली बैठक होने की पुष्टि की है। जबकि प्रधान छोटेलाल को पता ही नहीं है कि बैठक कब हुई? गांव के लोग भी बैठक होने की बात से इनकार कर रहे हैं।
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केस नंबर दो
घिलौआ में अप्रैल में हुई बैठक
शीतलपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत घिलौआ में अप्रैल में खुली बैठक हो गई है। शासन को दी गई रिपोर्ट में जिक्र किया गया है कि यहां प्रधानमंत्री का पत्र पढ़कर सुनाया गया है, लेकिन पत्र जून में आया है और बैठक अप्रैल मे हो चुकी है। प्रधान स्वदेश का कहना है कि खुली बैठक हो गई है, लेकिन पत्र नहीं मिला है।
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केस नंबर तीन
बैठक हुई, लेकिन समस्या समाधान नहीं
निधौलीकलां की ग्राम पंचायत शाहपुर में तीन दिन पहले बैठक हुई है, लेकिन यहां भी प्रधानमंत्री का पत्र पढ़कर नहीं सुनाया गया है। गांव के राजकुमार ने गांव में सफाई कर्मी द्वारा पैसे मांगने की शिकायत की, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। गांव में गंदगी का आलम है।
केस नंबर चार
अब तक नहीं हुई बैठक
शीतलपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत चोंचा वनगांव में भी बैठक नहीं हुई है। गांव के उदयवीर सिंह कहते हैं कि नल खराब पड़े हैं, कोई सुनने वाला नहीं है। खुली बैठक होती ही नहीं है।
यह थे शासन के निर्देश
देश में लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा सरकार बनने पर प्रधानमंत्री ने सबसे पहला पत्र प्रधानों के नाम लिखकर जल संरक्षण के लिए अपील की थी। इसे हर ग्राम पंचायत को पढ़कर सुनाया जाना था, लेकिन जिले में तमाम ग्राम पंचायतों में कोई बैठक नहीं हुई।
इनकी सुनिए
जिले की हर ग्राम पंचायत में खुली बैठक हो चुकी है। सभी जगह पर प्रधानमंत्री जी का पत्र पढ़कर सुनाया गया है।
रतन कुमार, डीपीआरओ एटा
न्याय पंचायत स्तर पर बैठक हो चुकी है। ग्राम पंचायतों के बारे में जानकारी नहीं है। इसे दिखवा लेता हूं। शासन को गलत रिपोर्ट नहीं भेजी जाएगी।
मदन वर्मा, सीडीओ, एटा
कहते हैं आंकड़े
576 ग्राम पंचायतें हैं जिले में
573 ग्राम पंचायतों में बैठक होने का दावा
05 जून को मिला था प्रधानमंत्री का पत्र
01 महीने बाद भी नहीं हो सकीं बैठकें