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UP: डीम्ड विश्वविद्यालय बना केंद्रीय हिंदी संस्थान, क्या होगा फायदा; यहां विस्तार से समझें
Fri, 09 May 2025 12:07 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Fri, 09 May 2025 12:07 PM IST
सार
केंद्रीय हिंदी संस्थान के डीम्मड विश्वविद्यालय बनने से यहां की डिग्री की मान्यता विश्वव्यापी हो जाएगी। हिंदी और भाषाविज्ञान के साथ अन्य विषयों पर नए स्नातक व परास्नातक अकादमिक पाठ्यक्रम, रिसर्च वर्क शुरू किए जा सकेंगे।
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केंद्रीय हिंदी संस्थान
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की सिफारिश पर केंद्रीय हिंदी संस्थान (केएचएस) को डीम्ड विश्वविद्यालय का दर्जा देने की घोषणा की गई है। अब उच्च शिक्षा के क्षेत्र में हिंदी का मान और बढ़ने की उम्मीद संस्थान कर रहा है। संस्थान के निदेशक सुनील बाबुराव कुलकर्णी ने बताया कि डीम्ड विश्वविद्यालय बनने के बाद अब यहां की डिग्री को विश्वव्यापी मान्यता मिलेगी।
तीन साल के भीतर संस्थान को विश्वविद्यालय के रूप में कोर्स, शैक्षिक स्टाफ, इंफ्रास्ट्रक्चर, आर्डिनेंस, शैक्षिक से परीक्षा और कार्यपरिषद तक का गठन करना होगा। हिंदी और भाषाविज्ञान के साथ अन्य विषयों पर नए स्नातक व परास्नातक अकादमिक पाठ्यक्रम, रिसर्च वर्क शुरू किए जा सकेंगे। संस्थान से पढ़े विद्यार्थियों की डिग्री को फिलहाल किसी अन्य राज्य या देश के विश्वविद्यालय में मान्यता नहीं थी। वर्तमान में संस्थान में करीब 100 विदेशी और लगभग 275 सीटें स्वदेशी विद्यार्थियों के लिए है। नए विषयों में नए पाठ्यक्रम शुरू होने पर सीटें भी बढ़ेगी।
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तीन साल के भीतर संस्थान को विश्वविद्यालय के रूप में कोर्स, शैक्षिक स्टाफ, इंफ्रास्ट्रक्चर, आर्डिनेंस, शैक्षिक से परीक्षा और कार्यपरिषद तक का गठन करना होगा। हिंदी और भाषाविज्ञान के साथ अन्य विषयों पर नए स्नातक व परास्नातक अकादमिक पाठ्यक्रम, रिसर्च वर्क शुरू किए जा सकेंगे। संस्थान से पढ़े विद्यार्थियों की डिग्री को फिलहाल किसी अन्य राज्य या देश के विश्वविद्यालय में मान्यता नहीं थी। वर्तमान में संस्थान में करीब 100 विदेशी और लगभग 275 सीटें स्वदेशी विद्यार्थियों के लिए है। नए विषयों में नए पाठ्यक्रम शुरू होने पर सीटें भी बढ़ेगी।
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ये लाभ मिलेंगे
संस्थान ने अगले 5, 10 और 15 सालों की कार्ययोजना तैयार कर ली है। डीम्ड विवि बनने के बाद आगामी तीन सालों में संस्थान नए संकाय, केंद्र और पीठ की स्थापना करेगा। जिसमें हिंदी के साथ अन्य कोर्सों का संचालन भी किया जा सकेगा। विभाग की योजना नए संकाय, केंद्र और पीठ खोलने की है। जिससे ज्यादा से ज्यादा लाभ गैर हिंदी भाषी के साथ हिंदी भाषी छात्र-छात्राओं को मिल सके। अंतरविद्या संकाय, मानविकी संकाय के साथ 6 नए केंद्र और आगरा में दो व अन्य केंद्रों पर एक-एक नई पीठ की स्थापना की भी योजना है।
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संस्थान ने अगले 5, 10 और 15 सालों की कार्ययोजना तैयार कर ली है। डीम्ड विवि बनने के बाद आगामी तीन सालों में संस्थान नए संकाय, केंद्र और पीठ की स्थापना करेगा। जिसमें हिंदी के साथ अन्य कोर्सों का संचालन भी किया जा सकेगा। विभाग की योजना नए संकाय, केंद्र और पीठ खोलने की है। जिससे ज्यादा से ज्यादा लाभ गैर हिंदी भाषी के साथ हिंदी भाषी छात्र-छात्राओं को मिल सके। अंतरविद्या संकाय, मानविकी संकाय के साथ 6 नए केंद्र और आगरा में दो व अन्य केंद्रों पर एक-एक नई पीठ की स्थापना की भी योजना है।
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विशेष है केंद्रीय हिंदी संस्थान
हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार और विकास के लिए कार्यरत केंद्रीय हिंदी संस्थान की स्थापना 1960 में मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधीन की गई थी। इसका मुख्यालय आगरा में स्थित है। वहीं इसके आठ केंद्रों दिल्ली, हैदराबाद, गुवाहाटी, शिलांग, मैसूर, दीमापुर, भुवनेश्वर और अहमदाबाद में पाठ्यक्रमों का संचालन होता है। जिनमें हिंदी शिक्षण निष्णात, हिंदी शिक्षण प्रवीण पारंगत है। हिंदी शिक्षण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए कार्यरत है।
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हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार और विकास के लिए कार्यरत केंद्रीय हिंदी संस्थान की स्थापना 1960 में मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधीन की गई थी। इसका मुख्यालय आगरा में स्थित है। वहीं इसके आठ केंद्रों दिल्ली, हैदराबाद, गुवाहाटी, शिलांग, मैसूर, दीमापुर, भुवनेश्वर और अहमदाबाद में पाठ्यक्रमों का संचालन होता है। जिनमें हिंदी शिक्षण निष्णात, हिंदी शिक्षण प्रवीण पारंगत है। हिंदी शिक्षण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए कार्यरत है।
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संस्थान का इतिहास
हिंदी भाषा के शिक्षण को सबल आधार देने के उद्देश्य से 19 मार्च, 1960 को तत्कालीन शिक्षा एवं समाज कल्याण मंत्रालय ने केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल का गठन किया। एक नवंबर 1960 को इस संस्थान का लखनऊ में पंजीकरण कराया गया। भारत सरकार ने केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल को अखिल भारतीय हिंदी प्रशिक्षण महाविद्यालय संचालित करने का पूर्ण दायित्व दिया। एक जनवरी, 1963 को अखिल भारतीय हिंदी प्रशिक्षण महाविद्यालय का नाम बदल कर केंद्रीय हिंदी शिक्षण महाविद्यालय किया गया। 29 अक्तूबर, 1963 को संपन्न परिषद की गोष्ठी में केंद्रीय हिंदी शिक्षण महाविद्यालय नाम बदलकर केंद्रीय हिंदी संस्थान कर दिया गया।
हिंदी भाषा के शिक्षण को सबल आधार देने के उद्देश्य से 19 मार्च, 1960 को तत्कालीन शिक्षा एवं समाज कल्याण मंत्रालय ने केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल का गठन किया। एक नवंबर 1960 को इस संस्थान का लखनऊ में पंजीकरण कराया गया। भारत सरकार ने केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल को अखिल भारतीय हिंदी प्रशिक्षण महाविद्यालय संचालित करने का पूर्ण दायित्व दिया। एक जनवरी, 1963 को अखिल भारतीय हिंदी प्रशिक्षण महाविद्यालय का नाम बदल कर केंद्रीय हिंदी शिक्षण महाविद्यालय किया गया। 29 अक्तूबर, 1963 को संपन्न परिषद की गोष्ठी में केंद्रीय हिंदी शिक्षण महाविद्यालय नाम बदलकर केंद्रीय हिंदी संस्थान कर दिया गया।