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एटा: कोतवाली से 1361 कारतूस 'गायब', एसएसपी ने हेड मोहर्रिर के खिलाफ दर्ज कराया मुकदमा
Fri, 18 Jun 2021 09:44 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, एटा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, एटा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Fri, 18 Jun 2021 09:44 AM IST
सार
वर्तमान हैड मुहर्रिर विजय सिंह ने तत्कालीन हैड मुहर्रिर के पदनाम पर दर्ज कराया है। विजय सिंह के अनुसार जब उन्होंने मालखाने का चार्ज लिया तो कारतूस कम पाए गए।
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थाना कोतवाली देहात, एटा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
एटा कोतवाली नगर के मालखाने से 1361 कारतूस गुम हो गए। एसएसपी के आदेश पर हेड मोहर्रिर के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। हालांकि कारतूसों को खपाने वाले की अभी तक पहचान नहीं हो सकी है।
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मालखाने के रखरखाव की जिम्मेदारी निभाने वाले हेड मोहर्रिर ने 303 बोर के 853, इंसास राइफल के 420 और 38 बोर के 88 कारतूस गुम कर दिए। इसका मुकदमा वर्तमान हेड मोहर्रिर विजय सिंह ने तत्कालीन हेड मोहर्रिर के पदनाम पर दर्ज कराया है। विजय सिंह के अनुसार जब उन्होंने मालखाने का चार्ज लिया तो कारतूस कम पाए गए।
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इसकी शिकायत करने पर 17 जुलाई 2017 को मामले की जांच शुरू की गई। तत्कालीन सीओ सिटी देवआनंद की जांच में सामने आया कि वर्ष 2011 से कारतूस गुम हैं। सीओ की जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंप दी गई, लेकिन उस समय मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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एसएसपी उदय शंकर सिंह ने पिछले दिनों सभी थानों का रिकॉर्ड तलब किया। लंबित विवेचनाओं व अन्य मामलों का संज्ञान लिया तो कारतूस गुम होने का प्रकरण भी सामने आया। इस पर एसएसपी ने 24 मई को मुकदमा दर्ज करने के आदेश जारी कर दिए। बुधवार की देर शाम मुकदमा दर्ज करा दिया गया है। जिसकी जांच इंस्पेक्टर क्राइम रामअवतार सिंह को सौंपी गई है।
पुलिस ने ही विभाग को कर दिया कमजोर
कारतूस प्रकरण काफी गंभीर है और हेड मोहर्रिर ने कारतूस गुम करके विभाग को ही कमजोर करने का प्रयास किया है। इतनी बड़ी संख्या में कारतूस कम होने से पुलिस कमजोर हुई है।
विभाग पर उठ रहे हैं सवाल
कारतूस गुम होने की जानकारी वर्ष 2017 में हुई तो तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं की गई। यह सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है। इससे पहले कई एसएसपी एटा में रहे, लेकिन मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया या फिर तत्कालीन हेड मोहर्रिर को बचाने का प्रयास किया गया। ऐसे तमाम सवाल भी खड़े हुए हैं।
मामला संज्ञान में आने के बाद मुकदमा दर्ज कराया गया है। कारतूस गुम होने का प्रकरण वर्ष 2011 का है। इसको गंभीरता से लेकर जांच कराई जा रही है, जो भी दोषी मिलेगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। - उदय शंकर सिंह, एसएसपी
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कारतूस प्रकरण काफी गंभीर है और हेड मोहर्रिर ने कारतूस गुम करके विभाग को ही कमजोर करने का प्रयास किया है। इतनी बड़ी संख्या में कारतूस कम होने से पुलिस कमजोर हुई है।
विभाग पर उठ रहे हैं सवाल
कारतूस गुम होने की जानकारी वर्ष 2017 में हुई तो तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं की गई। यह सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है। इससे पहले कई एसएसपी एटा में रहे, लेकिन मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया या फिर तत्कालीन हेड मोहर्रिर को बचाने का प्रयास किया गया। ऐसे तमाम सवाल भी खड़े हुए हैं।
मामला संज्ञान में आने के बाद मुकदमा दर्ज कराया गया है। कारतूस गुम होने का प्रकरण वर्ष 2011 का है। इसको गंभीरता से लेकर जांच कराई जा रही है, जो भी दोषी मिलेगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। - उदय शंकर सिंह, एसएसपी
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