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दांव पर जीवन: चंद पैसों के लिए मेडिकल वेस्ट से एल्युमिनियम-कांच निकाल रहीं महिलाएं, सालों से चल रहा अवैध धंधा

Thu, 14 Sep 2023 09:58 AM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला, आगरा
अमर उजाला, आगरा Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Thu, 14 Sep 2023 09:58 AM IST
सार

आगरा में चंद पैसों के लिए महिलाएं जीवन को दांव पर लगाकर मेडिकल वेस्ट से एल्युमिनियम और कांच निकाल रहीं हैं। सालों से यह अवैध धंधा चल रहा है। 

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business of illegal disposal of biomedical waste has been going on on large scale in Agra for years
मेडिकल वेस्ट। - फोटो : amar ujala

विस्तार

उत्तर प्रदेश के आगरा में दक्षिण भारत का बायोमेडिकल वेस्ट नियम विरुद्ध तरीके से खपाने का धंधा बड़े स्तर पर यमुनापार स्थित प्रकाश नगर, शाहदरा, सीता नगर में चल रहा है। जरूरतमंद महिलाओं को रोजगार के नाम पर उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। ठेकेदार दस्ताने व मास्क के बिना महिलाओं से इस वेस्ट से एल्युमिनियम और कांच निकलवाते हैं। इसके लिए प्रतिकिलो से भुगतान किया जाता है।

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उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड( यूपीपीसीबी) ने मंगलवार को नुनिहाई में बायोमेडिकल वेस्ट से भरा कंटेनर पकड़ा था। यहां पर कई सालों से प्रकाश नगर, सीतानगर, हनुमान नगर, शाहदरा में पहले गोदामों में वेस्ट से एल्युमिनियम और कांच के साथ प्लास्टिक वेस्ट निकालने का काम होता है। महिलाएं कांच की शीशी के ढक्कन में से बिना दस्ताने व मास्क पहने एल्युमिनियम अलग करती हैं। 
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इनको किलो के हिसाब से 60, 70, 80 रुपये मिलते हैं। जो महिलाएं शीशी की धुलाई करती हैं, उन्हें ड्रम के हिसाब से 50, 60, 70 रुपये मिलते हैं। इस काम को करने से कई महिलाओं की तबीयत भी खराब हो चुकी है तो कई महिलाएं मजबूरी में अभी भी काम कर रहीं हैं। सभी महिलाओं का एक ही कहना है कि बच्चों को पालने के लिए अपनी जान भी दांव पर लगानी पड़ती है।

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प्रकाश नगर निवासी महिला ने बताया केमिकल की दुर्गंध से शुरूआत में बीमार पड़ जाते हैं। चक्कर आने लगता था पर, मजबूरी थी। इसलिए रुपये के लिए काम करते थे। कांच की शीशी के ढक्कन से एल्युमिनियम निकालने के लिए सिर्फ कटर मिलता था। इसके अलावा हमें कुछ नहीं मिलता था। किलो के हिसाब पैसे मिलते हैं। पूरा दिन काम करने पर महीने के 3000 से 4000 रुपये मिलते हैं।

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