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UP: बिना अनुमति के यमुना नदी पर बना डाला पुल, सुप्रीम कोर्ट ने लगाया सेतु निगम पर पांच लाख का जुर्माना
Wed, 19 Mar 2025 10:04 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Wed, 19 Mar 2025 10:04 AM IST
सार
यमुना नदी पर बिना अनुमति निर्माण करने पर सेतु निगम पर पांच लाख का सुप्रीम कोर्ट ने जुर्माना लगाया है। सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी ने इसके लिए जुर्माने की सिफारिश की थी। अमर उजाला से सेतु निगम अधिकारियों के इस कारनामे की खबर 25 दिसंबर को प्रकाशित की थी।
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- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने बिना अनुमति लिए यमुना नदी पर पुल बनाने के लिए सेतु निगम पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। जस्टिस अभय एस ओका व जस्टिस उज्जवल भुइयां की पीठ ने राज्य सरकार के सेतु निगम के रवैये पर आश्चर्य जताया और उसके फैसले पर सवाल उठाया। सेतु निगम ने ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) में शामिल रुनकता से बलदेव के बीच पुल का निर्माण पहले शुरू कर दिया और पेड़ काटने की अनुमति के लिए सुप्रीम कोर्ट से बाद में गुहार लगाई। सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी ने इसके लिए जुर्माने की सिफारिश की थी। अमर उजाला से सेतु निगम अधिकारियों के इस कारनामे की खबर 25 दिसंबर को प्रकाशित की थी।
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सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने मंगलवार को ताजमहल और टीटीजेड में वनस्पतियों और जीवों के संरक्षण को लेकर पर्यावरणविद् एमसी मेहता की लंबित जनहित याचिका में कई अंतरिम याचिकाओं पर सुनवाई की। 10,400 वर्ग किलोमीटर में फैले टीटीजेड में आगरा, फिरोजाबाद, मथुरा, हाथरस और एटा और राजस्थान के भरतपुर जिले का हिस्सा है। सीईसी की रिपोर्ट नंबर 31 पर सुनवाई में जस्टिस ओका ने कहा, आप सरकारी संस्था हैं। आप इस अदालत से पारित आदेशों से अवगत हैं। आप हमारी पूर्व सहमति के बिना परियोजना और पेड़ों की कटाई को कैसे आगे बढ़ा सकते हैं?
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पीठ ने उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम को निर्देश दिया कि वह राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान (नीरी) के खाते में 5 लाख रुपये जमा करे। इससे पहले कि वह क्षेत्र में अपने पुल के निर्माण के लिए लगभग 198 पेड़ों को गिराने की निगम की याचिका पर विचार कर सके। पीठ ने कहा, यह राज्य निगम की ओर से उचित आचरण नहीं है।
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आधा पुल बनाया, फिर पेड़ काटने की याद आई
सेतु निगम ने 5 साल पहले वर्ष 2020 में 35 करोड़ रुपये की लागत से रेणुका धाम रुनकता से बलदेव मार्ग पर यमुना नदी पर पुल का निर्माण शुरू किया। नदी में कई पिलर खड़े करने के बाद काम बंद कर दिया गया। दरअसल पुल निर्माण के लिए 249 पेड़ काटने थे। आधा पुल बनने के बाद सुप्रीम कोर्ट से पेड़ काटने की अनुमति मांगी गई। कोर्ट ने सीईसी को भेजा, जिसमें यह खुलासा हुआ कि आधा पुल अनुमति लेने से पहले ही बना दिया गया। सीईसी ने जुर्माने की सिफारिश के साथ अपनी रिपोर्ट नंबर 31 सुप्रीम कोर्ट को सौंपी, जिस पर नाराजगी जताते हुए कोर्ट ने सेतु निगम पर 5 लाख रुपए का जुर्माना लगाया।
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सेतु निगम ने 5 साल पहले वर्ष 2020 में 35 करोड़ रुपये की लागत से रेणुका धाम रुनकता से बलदेव मार्ग पर यमुना नदी पर पुल का निर्माण शुरू किया। नदी में कई पिलर खड़े करने के बाद काम बंद कर दिया गया। दरअसल पुल निर्माण के लिए 249 पेड़ काटने थे। आधा पुल बनने के बाद सुप्रीम कोर्ट से पेड़ काटने की अनुमति मांगी गई। कोर्ट ने सीईसी को भेजा, जिसमें यह खुलासा हुआ कि आधा पुल अनुमति लेने से पहले ही बना दिया गया। सीईसी ने जुर्माने की सिफारिश के साथ अपनी रिपोर्ट नंबर 31 सुप्रीम कोर्ट को सौंपी, जिस पर नाराजगी जताते हुए कोर्ट ने सेतु निगम पर 5 लाख रुपए का जुर्माना लगाया।
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निगम को पहले 1980 पेड़ लगाने होंगे
सीईसी की टीम ने अपनी रिपोर्ट में सेतु निगम के 249 पेड़ काटने की याचिका की जगह 198 पेड़ काटने की जरूरत बताई। 198 पेड़ की जगह दस गुना पेड़ यानी 1,980 पेड़ लगाने होंगे और 10 साल तक उनका संरक्षण करना होगा। सेतु निगम ने फतेहाबाद के बिचौला में 9 हेक्टेयर जमीन खरीदकर वन विभाग को दी है, जहां पेड़ लगाने के बाद इसे संरक्षित वन घोषित करना होगा। सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी ने सेतु निगम के बिना अनुमति के काम शुरू करने पर सवाल खड़े किए थे और इस मामले में कार्रवाई की सिफारिश की थी।
सीईसी की टीम ने अपनी रिपोर्ट में सेतु निगम के 249 पेड़ काटने की याचिका की जगह 198 पेड़ काटने की जरूरत बताई। 198 पेड़ की जगह दस गुना पेड़ यानी 1,980 पेड़ लगाने होंगे और 10 साल तक उनका संरक्षण करना होगा। सेतु निगम ने फतेहाबाद के बिचौला में 9 हेक्टेयर जमीन खरीदकर वन विभाग को दी है, जहां पेड़ लगाने के बाद इसे संरक्षित वन घोषित करना होगा। सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी ने सेतु निगम के बिना अनुमति के काम शुरू करने पर सवाल खड़े किए थे और इस मामले में कार्रवाई की सिफारिश की थी।