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2027 चुनाव से पहले भाजपा का बड़ा प्लान: हर घर दस्तक अभियान से पीडीए फॉर्मूले की काट, ये रणनीति की गई तैयार
Thu, 04 Jun 2026 09:40 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Thu, 04 Jun 2026 09:40 AM IST
सार
भाजपा 2027 चुनावों को देखते हुए 'हर घर दस्तक' अभियान के जरिए केंद्र सरकार के 12 साल के कार्यों को जनता तक पहुंचाने की तैयारी में है। साथ ही पार्टी पीडीए फॉर्मूले के प्रभाव को देखते हुए बूथ स्तर पर जनसंपर्क और फीडबैक अभियान को तेज करने जा रही है।
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बीजेपी।
विस्तार
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) वर्ष 2027 के के लिए चुनावी मोड में आ गई है। पार्टी 5 जून से हर घर दस्तक देकर लोगों को मोदी सरकार के 12 साल के कामकाज और उपलब्धियों की जानकारी देगी। जनसंपर्क अभियान का मुख्य उद्देश्य न सिर्फ जनता के बीच अपनी पैठ को मजबूत करना है, बल्कि लोगों के बीच सरकार या संगठन के प्रति किसी भी तरह की नाराजगी की थाह लेना भी है, ताकि समय रहते फीडबैक के आधार पर आगे की अचूक चुनावी रणनीति तैयार की जा सके।
दरअसल, कहने के लिए मौजूदा समय में पार्टी और सरकार के कुछ नेता सब कुछ ठीक मानकर चल रहे हैं, लेकिन अंदरखाने समाजवादी पार्टी के पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक (पीडीए) फॉर्मूले ने भाजपा की चिंताएं बढ़ा रखी हैं। भाजपा पारंपरिक रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के मजबूत हिन्दुत्ववादी एजेंडे को प्रमुखता देती आई है, लेकिन अखिलेश यादव के इस पीडीए दांव ने पार्टी को अपनी रणनीति बदलने और केवल वैचारिक स्तर पर रहने की बजाय धरातल पर जातीय समीकरणों को भी गहराई से साधने पर मजबूर कर दिया है।
यही कारण है कि अब संगठन के भीतर भी जिम्मेदारियां और पद जातीय संतुलन के आधार पर ही तय किए जा रहे हैं। हालांकि, हाल ही में महिला विधेयक को लेकर विपक्ष के नकारात्मक रुख से मिली संजीवनी के बूते पार्टी महिलाओं को अपने पाले में करने के लिए प्रयास में जुटी हुई है। यही वजह है कि 12 साल के कार्यों के साथ-साथ महिला विधेयक के मुद्दे को भी प्रमुखता से जनता के सामने रखने की तैयारी है।
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भाजपा के महानगर अध्यक्ष राजकुमार गुप्ता ने बताया कि केंद्र सरकार के 12 साल के ऐतिहासिक कामकाज को जनता तक पहुंचाने और उनसे सीधा संवाद स्थापित करने के लिए संगठन स्तर पर तैयारियां पूरी की जा रही हैं। आने वाले हफ्ते में विभिन्न वार्डों और बूथों पर कई कार्यक्रम आयोजित कर जनता तक पहुंचा जाएगा और उनका सीधा फीडबैक लिया जाएगा।
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दरअसल, कहने के लिए मौजूदा समय में पार्टी और सरकार के कुछ नेता सब कुछ ठीक मानकर चल रहे हैं, लेकिन अंदरखाने समाजवादी पार्टी के पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक (पीडीए) फॉर्मूले ने भाजपा की चिंताएं बढ़ा रखी हैं। भाजपा पारंपरिक रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के मजबूत हिन्दुत्ववादी एजेंडे को प्रमुखता देती आई है, लेकिन अखिलेश यादव के इस पीडीए दांव ने पार्टी को अपनी रणनीति बदलने और केवल वैचारिक स्तर पर रहने की बजाय धरातल पर जातीय समीकरणों को भी गहराई से साधने पर मजबूर कर दिया है।
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यही कारण है कि अब संगठन के भीतर भी जिम्मेदारियां और पद जातीय संतुलन के आधार पर ही तय किए जा रहे हैं। हालांकि, हाल ही में महिला विधेयक को लेकर विपक्ष के नकारात्मक रुख से मिली संजीवनी के बूते पार्टी महिलाओं को अपने पाले में करने के लिए प्रयास में जुटी हुई है। यही वजह है कि 12 साल के कार्यों के साथ-साथ महिला विधेयक के मुद्दे को भी प्रमुखता से जनता के सामने रखने की तैयारी है।
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भाजपा के महानगर अध्यक्ष राजकुमार गुप्ता ने बताया कि केंद्र सरकार के 12 साल के ऐतिहासिक कामकाज को जनता तक पहुंचाने और उनसे सीधा संवाद स्थापित करने के लिए संगठन स्तर पर तैयारियां पूरी की जा रही हैं। आने वाले हफ्ते में विभिन्न वार्डों और बूथों पर कई कार्यक्रम आयोजित कर जनता तक पहुंचा जाएगा और उनका सीधा फीडबैक लिया जाएगा।