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उमस और गर्मी: बंद कमरों में बैठना पड़ सकता है भारी, स्किन की इन बीमारियों का खतरा; चिकित्सकों ने दी ये सलाह
Mon, 20 Jul 2026 08:57 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Mon, 20 Jul 2026 08:57 AM IST
सार
उमस और गर्मी से बचने के लिए लगातार बंद कमरों में कूलर और एसी चलाना स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। डॉक्टरों के अनुसार, इससे फंगस और बैक्टीरिया पनप रहे हैं, जिससे त्वचा और सांस संबंधी बीमारियां बढ़ रही हैं।
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एसएन मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में मरीजों की लगी भीड़। अमर उजाला
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विस्तार
उमस और गर्मी से बचने के लिए यदि आप भी दिन-रात कमरा बंद कर कूलर या एसी में बैठ रहे हैं तो सावधान हो जाइए। इस मौसम में घरों के अंदर का बढ़ा तापमान और हवा की अत्यधिक नमी बैक्टीरिया और फंगस पनपने का बड़ा जरिया बन रही है। इससे सांस और त्वचा के मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है।
एसएन मेडिकल कॉलेज के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. यतेंद्र चाहर ने बताया कि बंद कमरों में लगातार कूलर चलाने से हवा में नमी का स्तर 80 फीसदी से ऊपर चला जाता है। ऐसे में कूलर की घास और उसके गंदे पानी में फंगस और बैक्टीरिया फैलते हैं। कमरे में हवा की आवाजाही न होने के कारण यह दूषित हवा बाहर नहीं निकल पाती और लोग इसी कारण डर्माटोफाइट त्वचा संक्रमण का शिकार हो रहे हैं।
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चिकित्सक ने कहा कि यह दूषित और भारी हवा छोटे बच्चों और अस्थमा के मरीजों के लिए खतरनाक साबित हो रही है। इससे बच्चों में सूखी खांसी, सांस फूलना और बड़ों में फंगस व त्वचा संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
- कूलर चलाते समय कमरे की एक खिड़की या दरवाजा हमेशा खुला रखें ताकि दूषित हवा बाहर निकल सके।
- हफ्ते में कम से कम एक बार कूलर का पानी जरूर बदलें और उसकी जाली (घास) को अच्छी तरह साफ करें।
- कमरे में सीलन न होने दें। दिन में कुछ देर के लिए खिड़कियां खोलें ताकि धूप और प्राकृतिक हवा अंदर आ सके।
- पसीने से भीगे या हल्के गीले कपड़े बिल्कुल न पहनें। उमस भरे मौसम में ऐसे कपड़ों में फंगस बहुत तेजी से पनपता है।
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एसएन मेडिकल कॉलेज के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. यतेंद्र चाहर ने बताया कि बंद कमरों में लगातार कूलर चलाने से हवा में नमी का स्तर 80 फीसदी से ऊपर चला जाता है। ऐसे में कूलर की घास और उसके गंदे पानी में फंगस और बैक्टीरिया फैलते हैं। कमरे में हवा की आवाजाही न होने के कारण यह दूषित हवा बाहर नहीं निकल पाती और लोग इसी कारण डर्माटोफाइट त्वचा संक्रमण का शिकार हो रहे हैं।
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चिकित्सक ने कहा कि यह दूषित और भारी हवा छोटे बच्चों और अस्थमा के मरीजों के लिए खतरनाक साबित हो रही है। इससे बच्चों में सूखी खांसी, सांस फूलना और बड़ों में फंगस व त्वचा संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
- कूलर चलाते समय कमरे की एक खिड़की या दरवाजा हमेशा खुला रखें ताकि दूषित हवा बाहर निकल सके।
- हफ्ते में कम से कम एक बार कूलर का पानी जरूर बदलें और उसकी जाली (घास) को अच्छी तरह साफ करें।
- कमरे में सीलन न होने दें। दिन में कुछ देर के लिए खिड़कियां खोलें ताकि धूप और प्राकृतिक हवा अंदर आ सके।
- पसीने से भीगे या हल्के गीले कपड़े बिल्कुल न पहनें। उमस भरे मौसम में ऐसे कपड़ों में फंगस बहुत तेजी से पनपता है।
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