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सपा सांसद के घर हमला: दो FIR लेकिन मामूली धाराएं...करणी सेना का जिक्र तक नहीं, पुलिस ने इसलिए कर दी लीपापोती
Fri, 28 Mar 2025 08:10 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Fri, 28 Mar 2025 08:10 AM IST
सार
Rana Sanga Controversy: सपा सांसद रामजीलाल सुमन के घर हमला कर कानून व्यवस्था को खुलेआम चुनौती देने वालों को पुलिस ने अभयदान दिया है। पुलिस द्वारा दो एफआईआर तो दर्ज की गईं, लेकिन करणी सेना का जिक्र तक नहीं किया गया है।
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Karni Sena
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
आगरा में सपा सांसद के आवास पर धावा बोलने वाले क्षत्रिय करणी सेना के कार्यकर्ताओं का दो एफआईआर में जिक्र तक नहीं किया गया है। सांसद के पुत्र की ओर दर्ज कराई एफआईआर में भी करणी सेना का नाम नहीं है, जबकि दरोगा की ओर से लिखाए गए केस में करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओकेंद्र राणा को ही नामजद किया गया है। एक भी कार्यकर्ता का नाम नहीं लिखा गया है, जबकि पुलिस ने खुद ही चार हमलावरों को सांसद की कॉलोनी से पकड़ा था।
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भीड़ ने जमकर किया था उपद्रव
सपा के सांसद के आवास पर बुधवार को 50-60 कार्यकर्ताओं की भीड़ पहुंची थीं। इसके लिए पहले से ही सोशल मीडिया पर ऐलान किया गया था। क्षत्रिय करणी सेना के ओकेंद्र राणा ने कुबेरपुर इंटरचेंज पर पहुंचने की अपील की थी। बवाल के बाद पुलिसकर्मियों ने चार कार्यकर्ताओं को मौके से ही पकड़ लिया था।
ये भी पढ़ें - UP: करणी सेना का सांसद के घर उपद्रव, दरोगा-इंस्पेक्टर को भी पीट दिया...सीएम योगी एक किमी दूरी ही दे रहे थे भाषण
सपा के सांसद के आवास पर बुधवार को 50-60 कार्यकर्ताओं की भीड़ पहुंची थीं। इसके लिए पहले से ही सोशल मीडिया पर ऐलान किया गया था। क्षत्रिय करणी सेना के ओकेंद्र राणा ने कुबेरपुर इंटरचेंज पर पहुंचने की अपील की थी। बवाल के बाद पुलिसकर्मियों ने चार कार्यकर्ताओं को मौके से ही पकड़ लिया था।
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ये उठ रहा सवाल
सवाल है कि पुलिस की ओर से लिखाए गए केस में पुलिस ने क्षत्रिय करणी सेना के प्रदर्शन का उल्लेख तक नहीं किया है। जबकि थाने लाए गए कार्यकर्ताओं से नाम, पते लिखे गए होंगे। उनसे यह भी पूछा गया होगा कि वह किस मकसद से सांसद के आवास पर आए थे। पूरी एफआईआर में एमजी रोड पर हुई घटना का जिक्र भी दरोगा ने नहीं किया है, जिसमें पुलिसकर्मियों ने कार्यकर्ताओं की गाड़ी को रोकने की कोशिश की थी, लेकिन वह पुलिसकर्मियों को धकियाकर आगे बढ़ गए थे।
ये भी पढ़ें - सपा सांसद के घर हमला: पुलिस ने पकड़े जो युवा छुड़वा लिए...कोई और हो तो बता दें; करणी सेना ने किया 'एक्स'
सवाल है कि पुलिस की ओर से लिखाए गए केस में पुलिस ने क्षत्रिय करणी सेना के प्रदर्शन का उल्लेख तक नहीं किया है। जबकि थाने लाए गए कार्यकर्ताओं से नाम, पते लिखे गए होंगे। उनसे यह भी पूछा गया होगा कि वह किस मकसद से सांसद के आवास पर आए थे। पूरी एफआईआर में एमजी रोड पर हुई घटना का जिक्र भी दरोगा ने नहीं किया है, जिसमें पुलिसकर्मियों ने कार्यकर्ताओं की गाड़ी को रोकने की कोशिश की थी, लेकिन वह पुलिसकर्मियों को धकियाकर आगे बढ़ गए थे।
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सपा नेता ने भी नहीं दर्ज कराया नाम
इसी तरह सपा नेता की ओर से दर्ज कराए मुकदमे में एक भी कार्यकर्ता का नाम नहीं लिखा गया है। न ही क्षत्रिय करणी सेना का उल्लेख है। उन्होंने भी अज्ञात लोगों की भीड़ पर जानलेवा हमला करने का आरोप लगाय है। यहां तक कि उन्होंने सोशल मीडिया पर दो दिन से ऐलान देने का जिक्र किया है, लेकिन कौन ऐलान दे रहा था, यह नहीं लिखा गया है। इस तरह से दोनों एफआईआर में हमलावरों की पहचान तक नहीं खोली गई है। अब पुलिस कह रही है कि वीडियोग्राफी करवाई गई है।
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इसी तरह सपा नेता की ओर से दर्ज कराए मुकदमे में एक भी कार्यकर्ता का नाम नहीं लिखा गया है। न ही क्षत्रिय करणी सेना का उल्लेख है। उन्होंने भी अज्ञात लोगों की भीड़ पर जानलेवा हमला करने का आरोप लगाय है। यहां तक कि उन्होंने सोशल मीडिया पर दो दिन से ऐलान देने का जिक्र किया है, लेकिन कौन ऐलान दे रहा था, यह नहीं लिखा गया है। इस तरह से दोनों एफआईआर में हमलावरों की पहचान तक नहीं खोली गई है। अब पुलिस कह रही है कि वीडियोग्राफी करवाई गई है।
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जिनको पकड़ा, उनके नाम पते भी नहीं
आरोपियों को चिह्नित किया जाएगा, जबकि जिन 19 लोगों को पकड़ा गया, क्या उनके नाम, पते पुलिस के पास नहीं होंगे। वहीं दोनों ही केस में पुलिस ने बीएनएस की धाराओं का जिक्र किया है, उनमें केवल सांसद के बेटे की ओर से लिखाए केस में जानलेवा हमले की धारा है, बाकी सामान्य धाराएं लगाई गई हैं, जबकि प्रदर्शनकारियों ने कानून व्यवस्था को खुलेआम चुनौती दी थी। इस संबंध में एसीपी आदित्य कुमार का कहना है कि प्रदर्शनकारियों को चिह्नित करके गिरफ्तारी की जाएगी। टीमें गठित की गई हैं।
आरोपियों को चिह्नित किया जाएगा, जबकि जिन 19 लोगों को पकड़ा गया, क्या उनके नाम, पते पुलिस के पास नहीं होंगे। वहीं दोनों ही केस में पुलिस ने बीएनएस की धाराओं का जिक्र किया है, उनमें केवल सांसद के बेटे की ओर से लिखाए केस में जानलेवा हमले की धारा है, बाकी सामान्य धाराएं लगाई गई हैं, जबकि प्रदर्शनकारियों ने कानून व्यवस्था को खुलेआम चुनौती दी थी। इस संबंध में एसीपी आदित्य कुमार का कहना है कि प्रदर्शनकारियों को चिह्नित करके गिरफ्तारी की जाएगी। टीमें गठित की गई हैं।